नई दिल्ली: कश्मीरी पंडित डॉक्टर सरला भट्ट की 1990 में हुई हत्या की जांच और कठुआ सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए चलाए गए अभियानों में शामिल जम्मू-कश्मीर पुलिसकर्मियों समेत केंद्र शासित प्रदेश के 52 पुलिसकर्मियों को स्वतंत्रता दिवस 2026 पर वीरता और विशिष्ट एवं सराहनीय सेवा पदकों के लिए चुना गया है.
गृह मंत्रालय की आधिकारिक सम्मान सूची के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शोकेत हुसैन शाह को राष्ट्रपति का विशिष्ट सेवा पदक दिया गया है; जम्मू-कश्मीर पुलिस के 38 पुलिसकर्मियों को वीरता पदक के लिए चुना गया है, इनमें दो उप महानिरीक्षक, दो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और दो पुलिस अधीक्षक शामिल हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस के 13 पुलिसकर्मियों को सराहनीय सेवा पदक के लिए चुना गया है.
सूची में जम्मू-कश्मीर पुलिस के जिन वरिष्ठ अधिकारियों के नाम हैं, उनमें डीआईजी शिव कुमार शर्मा और पांडे राजीव ओमप्रकाश, एसएसपी शोभित डी. सक्सेना और मुश्ताक अहमद तथा एसपी नासिर अहमद और दिव्या डी. शामिल हैं.
हाल ही में, कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) की पुलिस अधीक्षक दिव्या डी. ने 1990 में सरला भट्ट के अपहरण और हत्या की एक साल तक चली जांच पूरी की. इस जांच के बाद इस साल 29 जून को श्रीनगर की एक विशेष अदालत में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई.
सरला भट्ट की जांच
भट्ट का श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) से अपहरण किया गया था. उन्हें JKLF के एक कमांडर के घर में रखा गया और बाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई. गोलियों से छलनी उनका शव श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में फेंक दिया गया था. शव के साथ एक नोट भी था, जिसमें उन्हें मुखबिर बताया गया था. शव 19 अप्रैल 1990 को मिला था.
जम्मू-कश्मीर SIA की ओर से दाखिल चार्जशीट में प्रतिबंधित जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के जेल में बंद प्रमुख यासीन मलिक और अन्य JKLF आतंकवादियों को आरोपी बनाया गया है.
कश्मीरी अलगाववादी मलिक इस समय तिहाड़ जेल में बंद है और आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है.
कठुआ में घुसपैठ
जब IPS अधिकारी शोभित सक्सेना 2024 में कठुआ जिले में तैनात थे, तब बदनोत्ता में सेना के जवानों और आतंकवादियों के बीच घात लगाकर हमला हुआ था. जम्मू-कश्मीर पुलिस के सूत्रों के अनुसार, यह गर्मियों के दौरान घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश की शुरुआत थी.
सक्सेना के लिए एक बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि लोकसभा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा, दोनों चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से हों.
इस दौरान सुरक्षा बलों ने उन घुसपैठियों की पहचान की, जो पाकिस्तान से कठुआ क्षेत्र में दाखिल हुए थे.
सक्सेना ने दिप्रिंट से कहा, “कठुआ में और टीमें तैनात की गईं. संसदीय चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से हुए. अगला लक्ष्य विधानसभा था.”
इसके बाद और ऑपरेशन शुरू किए गए, जिनमें कई आतंकवादी मारे गए. हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के तीनों क्षेत्रों के पास स्थित कठुआ जिले के पहाड़ी इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किए गए.
कठुआ केंद्र शासित प्रदेश का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र भी है.
सक्सेना ने कहा, “विधानसभा चुनाव से दो दिन पहले आतंकवादी उन जगहों तक आ गए थे, जहां गृह मंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी समेत कई राजनीतिक नेता चुनावी रैलियों के लिए आए थे.”
उन्होंने कहा कि ध्यान घुसपैठियों की पहचान करने और खतरे को खत्म करने पर था. सुरक्षा टीमों ने घुसपैठ के तरीकों का अध्ययन किया और खुफिया जानकारी के आधार पर ऑपरेशन किए.
सक्सेना ने दिप्रिंट से कहा, “हमने सफल छापेमारी की. हमने आतंकवादियों के कई ठिकानों का पता लगाकर उन्हें खत्म किया. इससे हमें उनकी रणनीति समझने में मदद मिली. जमीन पर और ज्यादा बल तैनात किए गए. आखिरकार, मार्च 2025 में हम आतंकवादियों का सामना करने में सफल रहे. इसके बाद के महीनों में और आतंकवादी मारे गए. कठुआ क्षेत्र को आतंकवादियों से मुक्त कर दिया गया. इसके बाद कोई नई घुसपैठ नहीं हुई. हमारे जवानों ने सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार मेहनत की और भारत सरकार ने उन्हें सम्मानित भी किया है.”
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर पुलिसकर्मियों को बधाई दी. सिन्हा ने कहा, “उनका साहस और ड्यूटी के प्रति अटूट समर्पण सार्वजनिक सेवा की सर्वोच्च परंपराओं को दिखाता है. देश को उनकी मिसाल पेश करने वाली प्रतिबद्धता और बलिदान पर गर्व है. मैं होम गार्ड्स और सिविल डिफेंस को भी सराहनीय सेवा पदक मिलने पर बधाई देता हूं.”
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