लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने बेंगलुरु में निवेशकों तक पहुंच बनाने और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत देशी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ एमओयू साइन किए हैं. इन समझौतों के जरिए 51,453 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश को आकर्षित किया गया है.
ये समझौते औद्योगिक और बिजनेस पार्क, जीसीसी, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेयरी प्रोसेसिंग और ब्रुअरी जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं.
इन्वेस्ट यूपी एजेंसी द्वारा जारी सूची के अनुसार, रियल एस्टेट और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कंपनियों ने सबसे बड़े निवेश प्रस्ताव दिए हैं. सबसे बड़े निवेशकों में प्रेस्टिज ग्रुप ने औद्योगिक और बिजनेस पार्कों के लिए 15,000 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव रखा, जबकि होराइजन (ब्लैकस्टोन) ने 10,000 करोड़ रुपये निवेश की प्रतिबद्धता जताई.
इसके अलावा, मैपलेट्री ने 6,000 करोड़ रुपये, एम्बेसी ग्रुप और रहेजा-माइंडस्पेस REIT ने 5,000-5,000 करोड़ रुपये, जबकि सत्त्वा ग्रुप ने 4,000 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया.
जीसीसी सेक्टर में भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली. LG ने 1,200 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा, जबकि InMobi, Ameriprise, AON, MetLife और Tablespace ने अपने जीसीसी ऑपरेशन के विस्तार के लिए क्रमशः 100 करोड़, 112 करोड़, 50 करोड़, 84 करोड़ और 50 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया.
मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में AB InBev ने ब्रुअरी परियोजना के लिए 1,200 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव रखा. वहीं, Ace International ने डेयरी उत्पाद निर्माण के लिए 457 करोड़ रुपये निवेश की प्रतिबद्धता जताई. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता Syrma और Kaynes ने क्रमशः 1,200 करोड़ रुपये और 2,000 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया.
अधिकारियों ने कहा कि इन समझौतों से उत्तर प्रदेश की पहचान औद्योगिक निवेश, जीसीसी विस्तार और उन्नत मैन्युफैक्चरिंग के उभरते केंद्र के रूप में और मजबूत होगी. इसके साथ ही राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी. हस्ताक्षरित एमओयू के तहत कुल प्रस्तावित निवेश 51,453 करोड़ रुपये है.
बुधवार को बेंगलुरु में आयोजित उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026 में मौजूद अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्योग जगत के नेताओं के साथ रणनीतिक बातचीत की. इसमें गूगल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक भी शामिल थी. उन्होंने शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, जीसीसी, आईटी एवं आईटीईएस (IT & ITeS) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अवसरों पर आयोजित उच्चस्तरीय गोलमेज चर्चाओं में भी हिस्सा लिया.
इन बैठकों के दौरान उन्होंने उद्योगों को उत्तर प्रदेश के तेज़ी से विकसित हो रहे निवेश माहौल का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया. अधिकारियों के मुताबिक, यह निवेश वातावरण प्रगतिशील नीतियों, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, जवाबदेह प्रशासन और देश के सबसे प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन ढांचों में से एक पर आधारित है.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश की 36 सेक्टोरल नीतियां निवेशकों के लिए अपार संभावनाएं पैदा करती हैं और सकारात्मक कारोबारी माहौल उपलब्ध कराती हैं. उन्होंने निवेशकों को सुरक्षा, सब्सिडी और सिंगल-विंडो क्लियरेंस का भरोसा दिया. साथ ही सरकार की उस प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसके तहत उद्योगों के लिए सुरक्षित, सहयोगी और विकासोन्मुखी इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है.”
सीएम ने ‘3S’ मॉडल पर दिया जोर
शाम को बेंगलुरु में आयोजित निवेशक रोडशो को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत के “3S” मॉडल—सेफ्टी (सुरक्षा), स्टेबिलिटी (स्थिरता) और स्पीड (रफ्तार)—का उदाहरण बनकर उभरा है. उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और निवेश के लिए ये तीनों सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं.
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने खुद को मजबूत कानून-व्यवस्था, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतरीन कनेक्टिविटी और पारदर्शी प्रशासन वाले राज्य के रूप में स्थापित किया है. साथ ही यहां संस्थानों का मजबूत नेटवर्क, कुशल कार्यबल, उन्नत तकनीक, निवेशक-अनुकूल नीतियां और व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम भी उपलब्ध है.
साल 2017 से पहले की स्थिति को याद करते हुए, जब उन्होंने उत्तर प्रदेश की कमान संभाली थी, आदित्यनाथ ने कहा, “कमजोर कानून-व्यवस्था, नीतिगत ठहराव और प्रभावहीन प्रशासन के कारण उत्तर प्रदेश की छवि खराब हो गई थी. विकास की चर्चा बहुत कम होती थी और राज्य को अक्सर भारत के BIMARU (बीमारू) राज्यों में गिना जाता था.”
उन्होंने आगे कहा, “आज उत्तर प्रदेश वह सब कुछ उपलब्ध कराता है, जिसे भारत हासिल करना चाहता है. अगर कोई चीज देश के किसी और हिस्से में मौजूद है, तो वह यहां भी जरूर मिलेगी, और उत्तर प्रदेश में ऐसी कई चीजें हैं जो कहीं और नहीं मिलतीं.”
उन्होंने राज्य में आए इस बदलाव का श्रेय केंद्र और राज्य में मौजूद “डबल इंजन सरकार” द्वारा दी गई “स्थिरता और सुरक्षा” को दिया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब अपनी बीमारू राज्य वाली छवि से बाहर निकल चुका है.
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य पिछले छह वर्षों से लगातार राजस्व अधिशेष (रेवेन्यू सरप्लस) में है और आर्थिक रूप से सबसे नीचे के तीन राज्यों में शामिल रहने वाला उत्तर प्रदेश अब देश की शीर्ष तीन राज्य अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है.
इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल अपनी बड़ी आबादी के कारण ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक परियोजनाओं के लिए भी जाना जाता है. उन्होंने कहा कि भारत के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक गंगा एक्सप्रेसवे को इस साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया था.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड हवाईअड्डा परियोजनाओं में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन मार्च में हुआ था और वहां से 15 जून से व्यावसायिक उड़ान संचालन शुरू हो गया है.
आदित्यनाथ ने यह भी दावा किया कि राज्य की विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है.
कृषि क्षेत्र पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य किसानों को प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव की सुविधा देता है, जबकि हर जिले में मंडी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां लगभग 86 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचाई सुविधाओं से जुड़ी हुई है.
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