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Sunday, 21 June, 2026
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23 जिले अब कम पड़ रहे हैं—आखिर पश्चिम बंगाल को और जिलों की जरूरत क्यों महसूस हो रही है

पश्चिम बंगाल में ज़िलों की औसत आबादी भारत में सबसे ज़्यादा है. लेकिन, मौजूदा और पूर्व सिविल सर्वेंट्स का कहना है कि नए ज़िले बनाने में बहुत ज़्यादा प्रशासनिक और वित्तीय खर्च आता है.

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नई दिल्ली: क्या भारत का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला राज्य, पश्चिम बंगाल, जिसकी 9 करोड़ से ज्यादा आबादी का प्रशासन सिर्फ 23 जिले संभाल रहे हैं, उसमें और जिले होने चाहिए?

यह मांग पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने 15 साल के कार्यकाल में कई बार उठाई थी. उनका कार्यकाल पिछले महीने समाप्त हुआ, जब उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा. इस दौरान ममता सरकार ने पांच नए जिले बनाए थे.

जून 2014 में अलीपुरद्वार और अप्रैल 2017 में कालिम्पोंग, झाड़ग्राम, पूर्व बर्दवान और पश्चिम बर्दवान बनाए गए. इससे राज्य में कुल जिलों की संख्या 23 हो गई. ममता बनर्जी ने 2022 में सात और जिले बनाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन वह सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहा.

अब राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद और जिले बनाने की मांग फिर से जोर पकड़ रही है. राज्य सरकार के दो वरिष्ठ सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि सुवेंदु अधिकारी की सरकार कुछ मौजूदा जिलों को बांटकर नए जिले बनाने पर विचार कर रही है.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “बजट में इस बारे में कुछ घोषणा हो सकती है.”

हालांकि अधिकारी ने यह भी माना कि जिलों की संख्या बढ़ाने का फायदा तभी होगा, जब उसी अनुपात में कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे को भी बढ़ाया जाए. उन्होंने कहा, “पहले का अनुभव बताता है कि ऐसा हमेशा नहीं हुआ है.”

अधिकारी ने आगे कहा, “अब डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और कई सरकारी सेवाएं ऑनलाइन हो गई हैं. इसलिए नागरिकों के लिए दफ्तर जाकर काम करवाना पहले जितना जरूरी नहीं रहा. ऐसे में दफ्तर की नजदीकी आज उतनी महत्वपूर्ण नहीं है, जितनी मान लीजिए एक दशक पहले थी.”

क्यों उठ रही है यह मांग

2011 की जनगणना के अनुसार, मौजूदा 23 जिलों में से सात जिले – हुगली, पूर्व मिदनापुर, पश्चिम मिदनापुर, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना – की आबादी 50 लाख से ज्यादा है.

आठ जिले – बांकुरा, पूर्व बर्दवान, बीरभूम, हावड़ा, कोलकाता, मालदा, पश्चिम मिदनापुर और उत्तर दिनाजपुर – की आबादी 30 लाख से 48 लाख के बीच है.

इतनी बड़ी आबादी का प्रशासन संभालना एक बड़ी चुनौती है. कई बार जिलों का भौगोलिक विस्तार इतना ज्यादा होता है कि प्रशासन चलाना मुश्किल हो जाता है.

उदाहरण के लिए, उत्तर 24 परगना का क्षेत्रफल 4,094 वर्ग किलोमीटर है और इसकी आबादी एक करोड़ से ज्यादा है. दक्षिण 24 परगना का क्षेत्रफल 9,960 वर्ग किलोमीटर है और आबादी 81 लाख से ज्यादा है, जबकि मुर्शिदाबाद का क्षेत्रफल 5,324 वर्ग किलोमीटर है और इसकी आबादी 71 लाख से ज्यादा है.

पश्चिम मिदनापुर का क्षेत्रफल 6,308 वर्ग किलोमीटर है और इसकी आबादी 59 लाख है. और यह सभी आंकड़े 2011 की जनगणना के हैं. पिछले 15 वर्षों में ये संख्या काफी बढ़ चुकी होगी.

अगर पश्चिम बंगाल की तुलना ज्यादा आबादी वाले दूसरे राज्यों से करें तो तस्वीर और साफ होती है.

2011 के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 9 करोड़ की आबादी और सिर्फ 23 जिलों के साथ पश्चिम बंगाल में प्रति जिले औसतन 39.7 लाख लोग रहते हैं. यह भारत के बड़े राज्यों में जिला स्तर पर सबसे ज्यादा औसत आबादी में से एक है.

भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 19.98 करोड़ है, जो 75 जिलों में बंटी हुई है. वहां प्रति जिले औसतन 26.6 लाख लोग रहते हैं.

बिहार की आबादी 10.4 करोड़ है और वहां 38 जिले हैं. यानी प्रति जिले औसतन 27 लाख लोग हैं. राजस्थान की आबादी 6.8 करोड़ है और वहां 41 जिले हैं. मध्य प्रदेश की 7.2 करोड़ आबादी के लिए 55 जिले हैं, यानी प्रति जिले लगभग 13 लाख लोग. वहीं ओडिशा की 4.2 करोड़ आबादी के लिए 30 जिले हैं, यानी प्रति जिले करीब 14 लाख लोग.

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव बसुदेब बनर्जी, जो दिसंबर 2015 से जून 2017 तक इस पद पर रहे, ने कहा कि जिलों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है और इसकी वजह बहुत सीधी है.

उन्होंने कहा कि भारत के बड़े राज्यों में आदर्श जिला आकार और प्रति जिले औसत आबादी करीब 20 से 25 लाख होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, “इससे किसी भी आपात स्थिति, प्राकृतिक आपदा या चुनाव के दौरान प्रशासन और शासन को संभालना आसान हो जाता है.”

बसुदेब बनर्जी, जो राज्य के गृह सचिव भी रह चुके हैं, ने कहा कि पश्चिम बंगाल ने बड़े भौगोलिक क्षेत्र और बड़ी आबादी से निपटने के लिए पुलिस जिला की अवधारणा शुरू की थी. इसके तहत एक बड़े जिले को दो पुलिस जिलों में बांटा जाता है, जिनके अधिकार क्षेत्र अलग-अलग होते हैं. हर पुलिस जिले की कमान पुलिस अधीक्षक यानी एसपी रैंक के अधिकारी के हाथ में होती है.

उन्होंने कहा, “यानी एक जिले में एक जिलाधिकारी तो होता है, लेकिन दो एसपी और दो अलग-अलग पुलिस अधिकार क्षेत्र होते हैं.”

उदाहरण के लिए, दक्षिण 24 परगना में तीन एसपी और तीन अलग-अलग पुलिस जिले हैं.

पूर्व तृणमूल कांग्रेस राज्यसभा सांसद और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार ने दिप्रिंट से कहा कि ऐतिहासिक रूप से पश्चिम बंगाल में जिला सीमाएं दशकों तक नहीं बदलीं.

उन्होंने कहा, “लेफ्ट फ्रंट सरकार के आखिरी दौर में ही उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर को अलग-अलग जिलों में बांटा गया था. ममता बनर्जी के शासन में कई जिलों का पुनर्गठन और विभाजन किया गया.”

उन्होंने बताया कि अप्रैल 2017 में बर्दवान को पूर्व और पश्चिम बर्दवान में बांटा गया. अप्रैल 2017 में झाड़ग्राम को अलग जिला बनाया गया. फरवरी 2017 में दार्जिलिंग से कालिम्पोंग को अलग किया गया, जबकि जून 2014 में जलपाईगुड़ी से अलीपुरद्वार को अलग जिला बनाया गया.

आर्थिक लागत

कई पश्चिम बंगाल कैडर के सिविल अधिकारियों ने दिप्रिंट से कहा कि अगर भाजपा सरकार ज्यादा आबादी वाले मौजूदा जिलों को बांटकर नए जिले बनाती है, तो उसे पहले जरूरी बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की तैयारी करनी चाहिए.

एक पूर्व मुख्य सचिव, जिन्होंने नाम नहीं बताने की शर्त पर बात की, ने कहा, “बड़े जिलों को दो हिस्सों में बांटना समझदारी है. लेकिन सरकार को बिना जरूरी बुनियादी ढांचा दिए यह काम जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए. नहीं तो पूरा उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा. सिर्फ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नए पद बनाने के लिए जिले नहीं बनाए जाने चाहिए.”

सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने कहा कि नए जिले बनाने में भारी आर्थिक और प्रशासनिक खर्च आएगा. शायद यही वजह थी कि 2022 में पिछली तृणमूल सरकार अपना प्रस्ताव लागू नहीं कर पाई.

अगस्त 2022 में ममता बनर्जी ने सात नए जिले – सुंदरबन, इच्छामती, रानाघाट, बिष्णुपुर, जंगीपुर, बहरामपुर और बसीरहाट – बनाने की घोषणा की थी. इससे जिलों की संख्या 30 हो जाती, लेकिन घोषणा के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई.

बसुदेब बनर्जी के अनुसार, “नए जिले बनाने का मतलब है कि इसके लिए बहुत बड़ा बजट देना होगा. शायद इसी वजह से पिछली सरकार ने पुलिस जिलों का रास्ता अपनाया, जहां दो एसपी और एक जिलाधिकारी रखकर पुलिस प्रशासन का विकेंद्रीकरण किया गया.”

उनके मुताबिक, राज्य को जिलों की संख्या बढ़ाकर प्रति जिले आबादी को लगभग 25 लाख तक लाना चाहिए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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