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Thursday, 24 September, 2026
होमदेशSIR विवाद के बीच राहुल गांधी का ECI पर हमला, कहा—‘2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों में धांधली हुई’

SIR विवाद के बीच राहुल गांधी का ECI पर हमला, कहा—‘2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों में धांधली हुई’

राहुल ने दो चुनाव आयुक्तों की 10 महीने में 14 आपत्तियों वाली रिपोर्ट का हवाला दिया; ECI ने कहा कि आंतरिक सवाल सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा, अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए.

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नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि देश की पूरी चुनावी व्यवस्था से छेड़छाड़ की गई है.

नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, दो मौजूदा चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग की प्रक्रिया, डेटाबेस में बदलाव और वोटर लिस्ट की चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर लिखित आपत्ति दर्ज की थी.

राहुल गांधी ने कहा कि भारत में लंबे समय से सरकार के खिलाफ लोगों में नाराज़गी यानी एंटी-इनकम्बेंसी का असर चुनावों में दिखता रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि यह असर बीजेपी के मामले में अचानक क्यों नहीं दिख रहा.

राहुल गांधी ने कहा, “भारतीय चुनाव, लोकसभा चुनाव, 2024 के चुनाव और विधानसभा चुनावों में धांधली की जा रही है.”

उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार का ज़िक्र करते हुए कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने भी उनके खिलाफ सवाल उठाए हैं.

उन्होंने दावा किया कि इन दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनावी व्यवस्था में हुई “गड़बड़ी” और नुकसान के लिए CEC ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार बताया है. ये राहुल गांधी के आरोप हैं.

‘हर राज्य में एंटी-इनकम्बेंसी अचानक गायब हो गई’

राहुल गांधी ने अलग-अलग राज्यों के चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए कहा कि हरियाणा में करीब 50 साल तक सरकारें एक पार्टी से दूसरी पार्टी के बीच बदलती रही हैं. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में भी सत्ता बदलती रही है, लेकिन अब एंटी-इनकम्बेंसी का असर दिखाई नहीं देता.

उन्होंने कहा कि किसी नेता की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज को समझा जा सकता है, लेकिन एंटी-इनकम्बेंसी का पूरी तरह खत्म हो जाना समझ से बाहर है.

राहुल गांधी ने कहा कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और उन्होंने अपने परिवार को कई दशकों से राजनीति में देखा है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश युद्ध में जीत के बाद उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ी थी, लेकिन उसके एक-दो साल के भीतर ही एंटी-इनकम्बेंसी दिखाई देने लगी.

उन्होंने कहा कि ऐसा कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ भी हुआ है, लेकिन उनके मुताबिक नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी के मामले में ऐसा नहीं होता.

राहुल गांधी ने कहा कि अगर वोट के अधिकार के साथ छेड़छाड़ होती है तो इसका असर संसद, कानून और संस्थाओं तक जाता है.

उन्होंने कहा, “वोट चोरी से कानून चोरी होती है और कानून चोरी से संस्था चोरी होती है.”

उन्होंने तर्क दिया कि अगर किसी सांसद का चुनाव कथित तौर पर गलत तरीके से डाले गए वोटों के आधार पर हुआ है, तो उसके जरिए बनाए गए कानूनों की वैधता पर भी सवाल उठता है.

राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग जिस वोट की रक्षा करता है, उसी से संविधान को ताकत मिलती है. संविधान से कानून बनते हैं और कानूनों से संस्थाएं काम करती हैं.

उन्होंने कहा कि अगर वोट की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया गया है तो इसका असर संविधान, कानून और संस्थाओं पर पड़ता है.

‘यह सिर्फ वोट पर हमला नहीं’

राहुल गांधी ने कहा कि उनके मुताबिक यह सिर्फ वोट से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि हर भारतीय के लोकतांत्रिक अधिकार और चुनावी व्यवस्था से जुड़ा मामला है.

उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया में समस्या की बात उठा रहा है.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर लिखित आपत्ति दर्ज की. इनमें नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और चुनावी डेटाबेस की पहुंच से जुड़े मुद्दे शामिल थे.

रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने SIR के दौरान Form 6 में बदलाव और चुनावी रोल के डेटाबेस को केंद्रीय स्तर पर रखने समेत कई मुद्दे उठाए.

चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर कहा है कि चुनाव आयुक्तों की ओर से लिखित नोट, सवाल, तकनीकी सुझाव और अलग-अलग राय किसी बहु-सदस्यीय संस्था में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं.

ECI ने कहा कि पिछले एक साल में SIR समेत आयोग के सभी अंतिम फैसले पूरी चुनाव आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं और सभी आदेशों को कानूनी मंजूरी हासिल है.

राहुल गांधी इससे पहले भी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं. उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पोस्ट में ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया था और कहा था कि यह भारतीय लोगों और संविधान पर हमला है. ये भी राहुल गांधी के आरोप हैं, जिन्हें चुनाव आयोग ने स्वीकार नहीं किया है.


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