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Friday, 24 July, 2026
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दिल्ली में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान अपने कर्मियों की कार्रवाई की RAF ने शुरू की जांच

सीआरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि इन घटनाओं की औपचारिक जांच अभी शुरू नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि सत्यापन की इस प्रक्रिया में तथ्य सामने आने के बाद जांच के आदेश दिए जाएंगे.

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नई दिल्ली: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की दंगा-रोधी विशेष इकाई ‘रैपिड एक्शन फोर्स’ (आरएएफ) ने दिल्ली में जारी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान अपने जवानों द्वारा कथित तौर पर अधिक बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल किए जाने के आरोपों की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

अधिकारियों ने बताया कि सीआरपीएफ ने आरएएफ के महानिरीक्षक (आईजी) को निर्देश दिया है कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान की गई कार्रवाई तथा उन घटनाओं का सत्यापन किया जाए, जिनमें जवानों पर हमला किया गया.

सीआरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि इन घटनाओं की औपचारिक जांच अभी शुरू नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि सत्यापन की इस प्रक्रिया में तथ्य सामने आने के बाद जांच के आदेश दिए जाएंगे.

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्न पत्र लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों ने 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के बैनर तले जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल से ‘चलो संसद’ मार्च किया था.

अधिकारियों ने बताया कि आरएएफ ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन अनेक वीडियो और तस्वीरों का संज्ञान लिया है, जिनमें नीले रंग की वर्दी पहने उसके जवान दिखाई दे रहे हैं. इनमें कुछ वीडियो में जवान बंदूक और लाठी लिए नजर आ रहे हैं तथा उन्हें लाठीचार्ज करते देखा जा सकता है. वहीं, कुछ अन्य वीडियो में प्रदर्शनकारियों द्वारा जवानों को घेरकर उन पर हमला करते भी देखा जा सकता है.

सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘ऐसी कार्रवाई के दौरान जवानों के आचरण की जांच के लिए निर्धारित सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा.’’

अधिकारियों ने बताया कि आरएएफ के पास दंगा-रोधी हथियारों में 12 बोर पंप-एक्शन बंदूक (पैलेट गन) भी शामिल है. मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, इसका इस्तेमाल केवल अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में किया जा सकता है, जब जवानों की जान को गंभीर खतरा हो.

उन्होंने बताया कि एसओपी के अनुसार इन बंदूकों का उपयोग ‘डिफ्लेक्टर’ के साथ किया जाना चाहिए, ताकि धातु या रबर के छर्रे से कम चोट पहुंचे और उनके शरीर के निचले हिस्से इससे प्रभावित हो.

अब तक कम से कम दो छात्रों को पैलेट गन के छर्रे लगने से घायल होने के बाद स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

दिल्ली पुलिस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि उसके पास पैलेट गन नहीं हैं और उसने इस संबंध में प्रसारित की जा रही खबरों को भ्रामक बताया है. हालांकि, सीआरपीएफ और आरएएफ ने अपने जवानों द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल किए जाने के आरोपों पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है.

अधिकारियों ने बताया कि आरएएफ उन घटनाओं का भी सत्यापन कर रहा है, जिनमें कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारियों द्वारा कुछ जवानों पर हमला करते हुए दिखाया गया है. इसके अलावा, एक वीडियो में आरएएफ की वर्दी पहने एक व्यक्ति को भाग रहे प्रदर्शनकारी को पैर अड़ा कर गिराते हुए तथा एक अन्य वीडियो में एक प्रदर्शनकारी के खिलाफ कथित रूप से झटका देने वाले हथियार का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया है.

सीआरपीएफ ने प्रदर्शन के दौरान तैनात आरएएफ और अन्य नियमित सुरक्षा बलों के कमांडरों को मीडिया से बातचीत नहीं करने का भी निर्देश दिया है. यह फैसला इस सप्ताह आरएएफ की एक महिला अधिकारी की मीडिया से बातचीत को ‘‘अवांछनीय’’ माने जाने के बाद लिया गया.

अधिकारियों ने बताया कि आरएएफ की सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत की ओर से उनके ‘इंस्टाग्राम हैंडल’ के माध्यम से प्रदर्शन को लेकर की गई कुछ कथित टिप्पणियों का भी सीआरपीएफ मुख्यालय विश्लेषण कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उन्होंने अर्धसैनिक बल की सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन तो नहीं किया.

उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ ने वर्ष 2023 में अपने कर्मियों के लिए सोशल मीडिया संबंधी दिशानिर्देश जारी किए थे, जिनमें उन्हें विवादास्पद या राजनीतिक विषयों पर टिप्पणी करने से परहेज करने की स्पष्ट चेतावनी दी गई थी.

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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