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Saturday, 29 August, 2026
होमदेश‘शुद्धिकरण’ छुआछूत का दूसरा नाम, BJP-RSS इसे खुलेआम कर रहे: खरगे की हल्द्वानी रैली को लेकर राहुल गांधी

‘शुद्धिकरण’ छुआछूत का दूसरा नाम, BJP-RSS इसे खुलेआम कर रहे: खरगे की हल्द्वानी रैली को लेकर राहुल गांधी

दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि देश में इस समय संविधान की विचारधारा और BJP-RSS की विचारधारा के बीच राजनीतिक मुकाबला चल रहा है.

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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधा. उन्होंने उत्तराखंड के उस कार्यक्रम स्थल पर हाल में किए गए ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान को लेकर हमला बोला, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रैली को संबोधित किया था. राहुल ने इस प्रथा को “छुआछूत का दूसरा नाम” बताया और कहा कि संविधान के तहत यह अपराध है.

दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि देश में इस समय संविधान की विचारधारा और BJP-RSS की विचारधारा के बीच राजनीतिक मुकाबला चल रहा है.

गांधी ने कहा, “राजस्थान में हमारे CLP नेता एक मंदिर जाते हैं और BJP नेता वहां ‘शुद्धिकरण’ करते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष खरगे जी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश और संविधान को समर्पित किया है, हल्द्वानी के रामलीला मैदान में भाषण देने जाते हैं और वहां शुद्धिकरण किया जाता है. ऐसा कौन करता है? BJP और RSS के लोग.”

उन्होंने कहा, “सिर्फ BJP और RSS के लोग ही ऐसा करते हैं और यह अपराध है. भारत के संविधान के तहत यह अपराध, आपराधिक गतिविधि है. ‘शुद्धिकरण’ वास्तव में छुआछूत का दूसरा नाम है. छुआछूत को गैरकानूनी घोषित किया गया है, फिर भी BJP के लोग इसे खुलेआम करते हैं.”

गांधी ने कहा कि इस तरह के अनुष्ठान से यह संदेश जाता है कि दलित “अशुद्ध” हैं और उन्हें छुआ नहीं जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, “जब वे यह शुद्धिकरण करते हैं, तो असल में वे कह रहे होते हैं कि दलितों को छुआ नहीं जाना चाहिए, दलित अशुद्ध हैं और यह भारतीय संविधान के तहत अपराध है.”

गांधी ने आगे कहा कि देश में बड़ा राजनीतिक मुकाबला दो विरोधी विचारधाराओं के बीच है.

उन्होंने कहा, “देश में दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई चल रही है. एक तरफ भारत का संविधान है, आंबेडकर, गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल का संविधान. दूसरी तरफ BJP और RSS की विचारधारा है. आज भारत में जो राजनीति चल रही है, वह इन दोनों विचारधाराओं के बीच है.”

गांधी ने जाति के आधार पर भेदभाव के कथित मामलों का भी ज़िक्र किया और कहा कि संवैधानिक सुरक्षा के बावजूद दलितों को रोजमर्रा की जिंदगी में भेदभाव का सामना करना पड़ता है.

उन्होंने कहा, “हज़ारों साल से इस देश में दलितों पर अत्याचार और हिंसा होती रही है. संविधान ने इसे गैरकानूनी बना दिया, लेकिन आज भी स्कूलों में दलित बच्चों से टॉयलेट साफ करवाए जाते हैं और फर्श पर झाड़ू-पोंछा करवाया जाता है.”

उन्होंने कहा, “बस इस बात के असर के बारे में सोचिए कि इसका आने वाली पीढ़ी के दिमाग पर क्या असर पड़ता है. बच्चे देखते हैं कि उनके कुछ साथी झाड़ू लगा रहे हैं, जबकि झाड़ू लगाने वाले बच्चे देखते हैं कि कुछ दूसरे बच्चों को यह काम नहीं करना पड़ता. यही भारत की सच्चाई है.”

कांग्रेस नेता ने कहा कि आम संसाधनों तक पहुंच में भी जातिगत भेदभाव देखा जा सकता है.

गांधी ने दावा किया, “दलितों को गांव के कुएं से पानी पीने की अनुमति नहीं होती. उन्हें अपने निजी कुएं खोदने पड़ते हैं, क्योंकि उन्हें गांव के साझा कुएं का इस्तेमाल करने से रोका जाता है.”

उन्होंने आरोप लगाया, “चाय की दुकानों पर आपको दो तरह के कप इस्तेमाल होते दिखेंगे. एक दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला कांच का कप, जिसे धोया जा सकता है, और दूसरा कागज या प्लास्टिक का कप, जिसे इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता है. प्लास्टिक या कागज के कप दलितों के लिए होते हैं, जबकि कांच के कप दूसरों के लिए.”

उन्होंने कहा, “यही भारत की सच्चाई है. यही उत्तर प्रदेश की सच्चाई है, यही उत्तर भारत की सच्चाई है. आप इसे शहरों और गांवों में देख सकते हैं.”

हल्द्वानी का यह विवाद 8 अगस्त को रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की रैली से जुड़ा है. यह रैली 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले हुई थी. बाद में एक दक्षिणपंथी संगठन के सदस्यों ने कार्यक्रम स्थल पर शुद्धिकरण अनुष्ठान किया, जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने इसकी आलोचना की.

खरगे जी ने भी राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया था. उन्होंने इस अनुष्ठान को अपनी दलित नेता की पहचान से जोड़ते हुए कहा था कि उन्हें “अछूत” दिखाने की कोशिश की गई.

खरगे ने कहा था कि कार्यक्रम स्थल पर अपने भाषण के दौरान उन्होंने किसी समुदाय या धर्म का ज़िक्र नहीं किया था.

उन्होंने कहा था, “लेकिन मेरे भाषण के बाद BJP से जुड़े लोगों ने उस मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया. आपने इसके बारे में अखबारों में पढ़ा होगा. क्या लोकतंत्र में इस तरह की चीजें होनी चाहिए? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं?”

बाद में उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वह इस घटना का राजनीतिकरण नहीं चाहते. हालांकि, उन्होंने सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की और शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ छुआछूत कानून के तहत मामला दर्ज करने की मांग की.

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