चंडीगढ़, तीन अक्टूबर (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना ने शनिवार को अपनी पार्टी के नेतृत्व और पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि वे उनके निर्वाचन क्षेत्र के कुछ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं।
हालांकि, आम आदमी पार्टी ने मैसरखाना के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें कथित तौर पर ‘‘पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता’’ के आरोप में निलंबित कर दिया।
इससे पहले, पंजाब के बठिंडा जिले की मौर विधानसभा सीट से विधायक मैसरखाना ने फेसबुक पर कहा कि शिक्षकों की कमी से जुड़ी उनकी शिकायत का समाधान नहीं होने से परेशान होकर उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया।
पंजाब में आप सरकार के तहत स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों के पार्टी के दावों पर सवाल उठाते हुए विधायक ने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।
रूंधे गले से आप विधायक ने कहा कि उनका बेटा भी सरकार के ‘उत्कृष्ट विद्यालय’ में पढ़ता है, जहां शिक्षकों की कमी है। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के विधायकों में वह अकेले ऐसे विधायक हैं, जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं।
विधायक ने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व के सामने यह मुद्दा उठाने के बाद उन्हें बताया गया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें बुलाया है। उन्होंने दावा किया, ‘‘लेकिन उन्होंने मुझसे मुलाकात नहीं की। मैं आखिर कब तक इसे बर्दाश्त करूंगा? मैंने पार्टी का क्या बिगाड़ा है?’’
आप विधायक ने कहा कि उन्हें पता है कि आगामी चुनाव में पार्टी उन्हें टिकट नहीं देगी। मैसरखाना ने कहा, ‘‘लेकिन मैं लोगों के लिए लड़ता रहूंगा।’’
विधायक ने कहा कि उन्होंने अपनी शिकायत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाई, लेकिन उसका कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे बताइए कि मैं कहां गलत हूं।’’
मैसरखाना ने आशंका जताई कि उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है।
विधायक के इस तरह खुलकर नाराजगी जताने के बाद आप की पंजाब इकाई के महासचिव हरचंद सिंह बरसट ने कहा कि मैसरखाना को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया गया है।
आप विधायक के बयान का हवाला देते हुए प्रदेश भाजपा ने कहा कि उनकी स्थिति ने राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के ‘‘शिक्षा क्रांति’’ के दावे की पोल खोल दी है।
भाषा आशीष पवनेश
पवनेश
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