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Monday, 26 October, 2026
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उत्तर प्रदेश में संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण की व्यवस्था लागू करने की तैयारी

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लखनऊ, 26 अक्टूबर (भाषा) उत्तर प्रदेश में संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण की व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए विभिन्न विभागों के संपत्ति संबंधी डेटाबेस को जोड़ने और स्वामित्व अभिलेखों के ऑनलाइन सत्यापन की प्रक्रिया विकसित की जा रही है।

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में सोमवार को हुई स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की समीक्षा बैठक में यूनिक प्रॉपर्टी आईडी, मान्य स्वामित्व दस्तावेजों और साइबर तहसील सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।

एक सरकारी बयान के मुताबिक, बैठक में बताया गया कि ई-नगरसेवा पोर्टल पर प्रदेश के नगर निकायों की 56.57 लाख संपत्तियां दर्ज हैं। इनके लिए 17 अंकों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी तैयार की जा रही है।

बयान के अनुसार, कृषि भूमि की पहचान खसरा संख्या के आधार पर की जाती है, जबकि आबादी की भूमि के लिए 13 अंकों की आईडी वाली घरौनी तैयार की जा रही है।

बयान में कहा गया कि नगरीय संपत्तियों के स्वामित्व के सत्यापन के लिए नक्शा परियोजना के तहत 10 नगर निकायों का चयन किया गया है। इनमें गोरखपुर और झांसी नगर निगम के अलावा नवाबगंज (बाराबंकी), हरदोई और चित्रकूटधाम के नगर निकाय शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के तहत संपत्तियों के अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जाएंगे। चयनित नगर निकायों में यह काम 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

उन्होंने बताया कि ई-नगरसेवा और नक्शा पोर्टल के डेटाबेस को एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) के जरिए जोड़ा जाएगा, जिससे अभिलेखों का ऑनलाइन सत्यापन आसान होगा।

ई-नगरसेवा की आईडी का इस्तेमाल संपत्ति कर के निर्धारण और वसूली में किया जाता है, जबकि नक्शा परियोजना का उद्देश्य संपत्तियों के वैधानिक स्वामित्व की पुष्टि करना है।

बयान के मुताबिक, बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के विक्रय अधिकार की पुष्टि के लिए खतौनी और घरौनी को मान्य अभिलेख के रूप में चिह्नित किया गया। नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा औद्योगिक विकास विभागों से भी अपने-अपने क्षेत्राधिकार में मान्य दस्तावेजों की पहचान करने को कहा गया।

अधिकारियों ने बताया कि अभिलेखों के ऑनलाइन प्रमाणीकरण और विवाद की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तय करने के लिए महानिरीक्षक निबंधन की अध्यक्षता में गठित समिति अपनी रिपोर्ट राजस्व परिषद को सौंपेगी। इसके आधार पर मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाएगी।

उन्होंने बताया कि स्वतः नामांतरण व्यवस्था के परीक्षण के लिए विभिन्न विभागों की पायलट संस्थाएं चुनी जाएंगी। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण का चयन किया है।

भाषा

सलीम रवि कांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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