चेन्नई: मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (MIDS) के एसोसिएट प्रोफेसर ए. कलैयारासन ने तमिलनाडु पुलिस पर उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेने का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह करीब 5 बजे सादे कपड़ों में तीन पुलिसकर्मी उनके अड्यार स्थित घर पहुंचे, उनका फोन ले लिया और एक किराये की कार में बैठाकर पूछताछ के लिए ले गए. उनसे इंस्टाग्राम पर की गई एक कथित अपमानजनक टिप्पणी के बारे में पूछताछ की गई, जबकि उनका कहना है कि उन्होंने ऐसी कोई टिप्पणी पोस्ट ही नहीं की थी.
28 अक्टूबर को पुलिस महानिदेशक महेश कुमार अग्रवाल को लिखी गई एक विस्तृत शिकायत में कलैयारासन ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने दावा किया कि वे उन्हें पल्लावरम से तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के विधायक जे. कामाची के खिलाफ की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में पूछताछ के लिए पम्मल स्थित टी4 शंकर नगर पुलिस स्टेशन ले जा रहे हैं.
कलैयारासन ने कहा, “उन्होंने जांच की अनुमति से जुड़ा कोई दस्तावेज नहीं दिखाया. यहां तक कि शिकायत या एफआईआर की कॉपी भी नहीं दी. उन्होंने बस आरोप लगाया कि मैंने एक ऐसे इंस्टाग्राम अकाउंट से अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट की है, जिसके बारे में मुझे कोई जानकारी ही नहीं है.”
कलैयारासन कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस की किताब ‘द द्रविड़ियन मॉडल: इंटरप्रेटिंग द पॉलिटिकल इकॉनमी ऑफ तमिलनाडु’ के सह-लेखक हैं. वह पहले तमिलनाडु सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में भी योगदान दे चुके हैं. उन्होंने पुलिसकर्मियों को बताया कि उनका कोई इंस्टाग्राम अकाउंट नहीं है और उन्होंने उस विधायक का नाम तक नहीं सुना है. इसके बावजूद उन्हें रात के कपड़ों में ही घर से ले जाया गया और परिवार को इसकी जानकारी देने तक की अनुमति नहीं दी गई.
पल्लावरम के पास सड़क किनारे गाड़ी करीब 45 मिनट तक रुकी रही. इस दौरान पुलिसकर्मी फोन करते रहे और उनके पास फोन आते भी रहे. बाद में उन्होंने कलैयारासन से कहा कि उन्हें वापस घर छोड़ने के आदेश मिले हैं.
पुलिस ने कलैयारासन को इंस्टाग्राम अकाउंट का एक स्क्रीनशॉट दिखाया, जिसमें उनकी तस्वीर प्रोफाइल फोटो के रूप में लगी थी. अपने पत्र में उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि यह तस्वीर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की वेबसाइट से ली गई थी, जहां वह पहले रिसर्च से जुड़े थे. अपने अपार्टमेंट पहुंचने के बाद उनसे एक पत्र लिखने को कहा गया, जिसमें यह बताना था कि उनका उस अकाउंट से कोई संबंध नहीं है. इसके बाद उनका फोन लौटा दिया गया और सुबह करीब 7.45 बजे उन्हें घर छोड़ दिया गया.
अग्रवाल को लिखे पत्र में उन्होंने कहा, “जिस तरह मेरे साथ व्यवहार किया गया, उससे मुझे बहुत ज्यादा परेशान और अपमानित महसूस हुआ. मुझे अपनी बात समझाने का उचित मौका तक नहीं दिया गया. इसके अलावा, इस मामले में पीड़ित मैं हूं, क्योंकि किसी ने मेरी तस्वीर का गलत इस्तेमाल करके एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया और ऐसे व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां पोस्ट कीं, जिसे मैं जानता तक नहीं हूं. इसके बावजूद मेरे साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया गया. सुबह-सुबह पुलिसकर्मी मेरे घर पहुंचे और मुझे रात के कपड़ों में ही अपने साथ ले गए.”
यह घटना कुछ दिन बाद हुई है, जब कलैयारासन ने एक टीवी इंटरव्यू में मौजूदा सरकार के कार्यकाल में जरूरी चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी पर चर्चा की थी. उन्होंने चिंता जताई कि इस तरह की कार्रवाइयों से लोग सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा करने और अकादमिक बहस में हिस्सा लेने से हिचक सकते हैं. उन्होंने पुलिस प्रमुख से अनुरोध किया कि कथित गैरकानूनी हिरासत, फर्जी आईडी बनाने और उनकी तस्वीर का गलत इस्तेमाल करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को इस घटना की कड़ी निंदा की. उन्होंने इसे टीवीके सरकार के “फासीवाद की पराकाष्ठा” बताया.
स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “असली अपराधियों को खुला छोड़ देना और शिक्षाविदों को डराने की कोशिश करना कितनी शर्मनाक बात है? डॉ. कलैयारासन को क्यों गिरफ्तार किया गया? क्या इसलिए कि उन्होंने ‘द्रविड़ मॉडल’ शब्द को बढ़ावा दिया और दुनिया को बताया कि द्रविड़ शासन के तहत तमिलनाडु ने कितना विकास किया? या इसलिए कि उन्होंने यह सच बताया कि टीवीके सरकार के सत्ता में आने के बाद ही तमिलनाडु में कीमतें अभूतपूर्व रूप से बढ़ी हैं?”
शंकर नगर पुलिस के सूत्रों ने कहा कि कलैयारासन को पूछताछ के लिए इसलिए ले जाया गया, क्योंकि इंस्टाग्राम अकाउंट पर उनका नाम और तस्वीर थी. पुलिस ने परेशान करने के आरोपों से इनकार किया और कहा कि जब यह साफ हो गया कि प्रोफेसर का उस अकाउंट से कोई संबंध नहीं है, तो उन्हें वापस घर भेज दिया गया.
प्रोफेसर ने हिरासत में लेने और उनकी तस्वीर का गलत इस्तेमाल करके फर्जी अकाउंट बनाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है.
तमिलनाडु के कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस से गलती हुई थी और उसे सुधार लिया गया है.
उन्होंने मीडिया से कहा, “सोशल मीडिया अकाउंट पर उनकी तस्वीर और नाम होने की वजह से गलती हुई और इसी कारण गलतफहमी पैदा हो गई. मैंने उनसे बात की है. अगर कोई गलती हुई है, तो हम उसे सुधारेंगे.”
बाद में प्रोफेसर कलैयारासन ने डीजीपी अग्रवाल की मौजूदगी में चेन्नई सचिवालय में मुख्यमंत्री से मुलाकात की.
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