(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समाजवादी नेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण और भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में शामिल नानाजी देशमुख की जयंती पर रविवार को उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि सार्वजनिक जीवन के जरिए देश में बदलाव लाया जा सकता है और उन्होंने अपने विचारों एवं कार्यों से दिखाया कि वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत जमीनी स्तर से होती है।
मोदी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि देते हुए आपातकाल के दौरान उनके निर्भीक रुख का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उनका स्मरण करता हूं। उनका प्रभाव कई पीढ़ियों तक रहा। उन्होंने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि सार्वजनिक जीवन देश में नवपरिवर्तन लाने का माध्यम बन सकता है।’’
मोदी ने कहा कि ‘‘लोकनायक जे पी’’ सुशासन सुनिश्चित करने और समाज के वंचित वर्गों तक पहुंचने के लिए समर्पित थे।
उन्होंने कहा, ‘‘विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करते हुए हम उनके आदर्शों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’
लोकनायक के नाम से प्रसिद्ध जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को हुआ था और आठ अक्टूबर 1979 को उनका निधन हो गया था। वह स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का नेतृत्व किया था।
उन्हें 1999 में मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था।
मोदी ने नानाजी देशमुख को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक सिद्धांतों के साथ समाज सेवा को भी महत्व दिया और अपना जीवन ग्रामीण विकास एवं सामुदायिक भागीदारी को समर्पित कर दिया।
प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘नानाजी देशमुख की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्हें एक महान राष्ट्र निर्माता के रूप में स्नेहपूर्वक याद किया जाता है। उन्होंने अपने विचारों और कार्यों से दिखाया कि वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत जमीनी स्तर से होती है।’’
मोदी ने कहा, ‘‘हम एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के उनके सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।’’
देशमुख का जन्म 11 अक्टूबर 1916 को हुआ था और 27 फरवरी 2010 को उनका निधन हो गया था। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्ववर्ती संगठन भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में से एक थे।
उन्हें 2019 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था।
भाषा सिम्मी गोला
गोला
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