scorecardresearch
Saturday, 10 October, 2026
होमदेशहरियाणा में प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेने पहुंची पुलिस, गांव वालों ने पुलिसवालों को ही बनाया बंधक

हरियाणा में प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेने पहुंची पुलिस, गांव वालों ने पुलिसवालों को ही बनाया बंधक

हरियाणा के काबुलपुर में शनिवार को करीब 500 निवासियों ने एक SHO और उनकी टीम को घंटों तक रोके रखा और उन्हें तभी जाने दिया जब उन्होंने लिखित में यह बताया कि वे किस अधिकार के तहत वहां आए थे.

Text Size:

चंडीगढ़: शनिवार सुबह करीब 6 बजे दरवाजे पर दस्तक हुई. रोहतक के कबूलपुर गांव में घर के ज्यादातर लोग अभी सो रहे थे.

दरवाजे पर शिवाजी कॉलोनी पुलिस थाने की एक पुलिस टीम थी, जिसका नेतृत्व स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) राकेश कुमार कर रहे थे. वे जिला परिषद के सदस्य जय देव डागर को लेने आए थे. उन्होंने कहा कि वे उन्हें उनके घर से “गिरफ्तार” करने आए हैं. इसका मकसद उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली के जंतर मंतर जाने से रोकना था.

डागर ने बहस नहीं की. इसके बजाय उन्होंने कुछ फोन किए.

कुछ ही मिनटों में गांव के लोग वहां पहुंचने लगे. जल्द ही घर के बाहर करीब 500 लोग जमा हो गए. गांव वालों ने पुलिसकर्मियों से कहा कि डागर को हिरासत में नहीं लिया जाएगा. हिरासत में तो पुलिसकर्मी हैं और वे तब तक वहीं रहेंगे, जब तक रोहतक से कोई वरिष्ठ अधिकारी आकर उनके वहां आने की वजह नहीं बताता.

स्वतंत्र पत्रकार मंदीप पुनिया ने इस टकराव का एक वीडियो X पर पोस्ट किया. उन्होंने हिंदी में लिखा, “जब गांव के लोग पुलिस को ही डिटेन कर लें तो तस्वीर कुछ ऐसी आती है.” X पर कई लोगों ने यह वीडियो शेयर किया, जबकि कुछ लोगों ने इसे रीट्वीट किया या इस पर अपनी टिप्पणियां कीं.

पुलिसकर्मियों और गांव वालों के बीच यह टकराव दोपहर करीब 1 बजे खत्म हुआ. पुलिस टीम को रोहतक वापस जाने की इजाजत तभी मिली, जब उसने गांव वालों को अपने वहां आने का कारण लिखित में दिया.

हिंदी में हाथ से लिखे इस नोट पर पुलिस टीम के हस्ताक्षर हैं. द प्रिंट ने इस नोट को देखा है. इसमें कहा गया है कि रोहतक जिला प्रशासन ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू की थी. CrPC की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू हो चुकी है, जिसमें इससे जुड़ी धारा 163 है. हालांकि, पुलिस की पर्ची में CrPC की पुरानी धारा का ही जिक्र है.

नोट में आगे कहा गया है कि जय देव, जिन्हें इसमें “जिला परिषद काउंसलर” बताया गया है, ने घोषणा की थी कि वह जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए दिल्ली जाएंगे. इसलिए पुलिस BNSS की धारा 172 के तहत उन्हें उनके घर पर हिरासत में लेने आई थी. इस धारा के तहत पुलिस अधिकारी ऐसे व्यक्ति को हिरासत में ले सकता है, जो पुलिस के किसी कानूनी निर्देश का विरोध करता है, उसे मानने से इनकार करता है, उसकी अनदेखी करता है या उसका पालन नहीं करता है.

दिप्रिंट से बात करते हुए डागर ने कहा कि उनका किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है, लेकिन वह “हमेशा न्याय के लिए खड़े रहते हैं”.

उन्होंने कहा, “आज देश में चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करके वोट चोरी करना एक बड़ा मुद्दा है. लोगों को लगता है कि चुनाव आयोग SIR के जरिए वोटर लिस्ट से सही मतदाताओं के नाम हटा रहा है, ताकि सत्ताधारी बीजेपी को फायदा हो. इसी वजह से मैंने जंतर मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने का ऐलान किया था. यह मेरा लोकतांत्रिक अधिकार है.”

उन्होंने कहा, “जब सुबह-सुबह पुलिस ने मेरे दरवाजे पर दस्तक दी, तो मैंने गांव वालों को इसकी जानकारी दी. कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए. जल्द ही पुलिसकर्मी बचाव की मुद्रा में आ गए. वे वहां से जाना चाहते थे, लेकिन गांव वालों ने कहा कि अब उन्हें हिरासत में लिया गया है और वे तभी जा सकेंगे, जब एसपी आकर उन्हें समझाएंगे कि पुलिस ने जो किया, वह सही था. दोपहर में जब पुलिसकर्मियों ने गांव वालों से गतिरोध खत्म करने को कहा, तो गांव वाले तभी माने, जब पुलिस ने अपने वहां आने का कारण लिखित में दिया.”

डागर ने कहा कि लिखित नोट जरूरी था, क्योंकि पुलिसकर्मी “बाद में इस बात से इनकार कर सकते थे कि उन्होंने कभी उन्हें हिरासत में लिया ही था”.

SHO राकेश कुमार ने इन वीडियो को ज्यादा अहमियत नहीं दी. उन्होंने कहा, “जय देव डागर एक अच्छे इंसान हैं और कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं. हालांकि, उन्होंने ऐलान किया था कि वह शनिवार को जंतर-मंतर जाएंगे. दिल्ली में लोगों को इकट्ठा होने से रोकना हमारा कर्तव्य था, क्योंकि यह प्रदर्शन गैरकानूनी है और इसके लिए अधिकारियों से अनुमति नहीं ली गई है. इसलिए हम डागर को उनके घर पर हिरासत में लेने के लिए गांव गए थे और उन्होंने भी जिम्मेदारी से हमारी बात मानी.”

उन्होंने कहा, “जहां तक वीडियो की बात है, गांव वाले वीडियो बनाने और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए स्वतंत्र हैं. हम उन्हें रोक नहीं सकते.”

हालांकि, कुमार ने जल्द ही यह भी कहा कि गांव के लोग बहुत अच्छे थे और जब तक पुलिसकर्मी वहां रहे, तब तक गांव वालों ने उनके साथ अच्छा व्यवहार किया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: मोदी के 25 साल के सफर पर संकटों का साया, एक बड़े तूफान के आसार बन रहे हैं


 

share & View comments