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Thursday, 13 August, 2026
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फुकेट-दिल्ली फ्लाइट विवाद: एयर इंडिया ने सभी पायलटों के लिए ड्रग टेस्ट अनिवार्य किया

सूत्रों के मुताबिक, 4 अगस्त की उस फ़्लाइट के कैप्टन का ड्रग टेस्ट पॉज़िटिव आया है, जिसमें अचानक 300 फ़ीट की ऊंचाई कम हो गई थी. इसके बाद यह इंटरनल मेमो जारी किया गया है.

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नई दिल्ली: एयर इंडिया ने सभी ग्रुप पायलटों की उन सभी पदार्थों और दवाओं के लिए अनिवार्य जांच का आदेश दिया है, जिनकी मौजूदा नियमों के तहत अनुमति नहीं है. सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला 4 अगस्त की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट उड़ाने वाले कैप्टन की दोबारा हुई ड्रग टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद लिया गया है. इस फ्लाइट में अचानक 300 फीट की ऊंचाई कम हो गई थी. इस घटना में कम से कम 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य प्रभावित हुए थे.

एयरलाइन ने गुरुवार को अपने पायलटों को भेजे एक पत्र में यह फैसला बताया. दिप्रिंट ने इस पत्र को देखा है. पत्र में कहा गया है, “फिर भी अब हमें लगता है कि इससे आगे बढ़ना जरूरी है. इसलिए हमने सभी ग्रुप पायलटों की उन सभी पदार्थों या दवाओं के लिए पूरी जांच कराने का फैसला किया है, जिनकी मौजूदा नियमों के तहत अनुमति नहीं है. यह जांच अनिवार्य है और आज 13 अगस्त 2026 से शुरू होगी.”

यह जांच कई जगहों पर की जाएगी और पायलटों की मौजूदा ट्रेनिंग और फ्लाइट के बाद की प्रक्रिया के दौरान भी होगी. पत्र में कहा गया है, “यह गुरुग्राम अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान, फ्लाइट के बाद हमारे फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर या Air India के दफ्तरों में, या आपके संबंधित बेस द्वारा बताए गए स्थानों पर की जाएगी.” जिन पायलटों को किसी तरह की जानकारी या स्पष्टीकरण चाहिए, उनसे अपने चीफ पायलट या बेस मैनेजर से संपर्क करने को कहा गया है.

एयरलाइन ने कहा कि यह फैसला पायलटों की ओर से उठाई गई चिंताओं के बाद लिया गया है और इसका उद्देश्य पूरी एयरलाइन में सुरक्षा और प्रोफेशनल तरीके से काम करने को और मजबूत करना है.

मौजूदा DGCA नियमों के तहत, एयरलाइनों को हर साल कम से कम 10 प्रतिशत फ्लाइट क्रू की रैंडम तरीके से साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच करनी होती है. एयर इंडिया की नई नीति इस नियम से आगे जाती है, क्योंकि इसमें सभी ग्रुप पायलटों की जांच अनिवार्य कर दी गई है, न कि सिर्फ रैंडम तरीके से चुने गए पायलटों की. एयरलाइन ने कहा कि जांच में उन पदार्थों या दवाओं को शामिल किया जाएगा, जिनकी मौजूदा नियमों के तहत अनुमति नहीं है. यह जांच ट्रेनिंग के दौरान, फ्लाइट के बाद उसके ब्रीफिंग सेंटर या दफ्तरों में, या पायलटों के बेस द्वारा तय जगहों पर की जाएगी.

4 अगस्त की घटना की जांच अभी जारी है. सूत्रों ने पुष्टि की थी कि कैप्टन की साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच पॉजिटिव आई थी. फ्लाइट में 137 यात्री सवार थे.

दिप्रिंट को मिली फ्लाइट के बाद की मेंटेनेंस रिपोर्ट में घटना के समय के आसपास 12 चेतावनी और खराबी से जुड़े मैसेज दर्ज थे. इनमें तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में लो-प्रेशर की चेतावनी, ऑटोपायलट का बंद होना और बाएं और दाएं दोनों फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम में खराबी शामिल थी.

एयर इंडिया ने कहा कि वह पहले से ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से तय सभी नियमों का पालन करती है और ये नियम दूसरे बड़े एविएशन देशों में लागू नियमों जैसे ही हैं.

एयरलाइन ने गुरुवार के पत्र में कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, एयर इंडिया भारत के DGCA की ओर से तय सभी नियमों का पूरी तरह पालन करती है. ये नियम यूरोप और अमेरिका सहित दूसरे बड़े एविएशन देशों में लागू नियमों जैसे ही हैं.” एयरलाइन ने कहा कि यह अतिरिक्त जांच मौजूदा नियमों के तहत जरूरी जांच से आगे बढ़कर की जा रही है.

पत्र में कहा गया है, “यह पहल, जो नियमों की जरूरत से आगे जाती है, सुरक्षा और प्रोफेशनल तरीके से काम करने के सबसे ऊंचे मानकों को बनाए रखने और हमारे यात्रियों, हितधारकों और पूरे समुदाय को भरोसा दिलाने के हमारे संकल्प को दिखाती है.”

एयरलाइन ने यात्रियों का अपने पायलटों और दूसरे कर्मचारियों पर भरोसा बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया. उसने कहा, “दशकों से एयर इंडिया भारतीय एविएशन की पहचान रही है. इस दौरान हमारे पायलटों की प्रोफेशनल क्षमता, हुनर और सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के साथ-साथ दूसरे कर्मचारियों के काम ने लाखों यात्रियों और पूरे समुदाय का भरोसा हासिल किया है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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