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Thursday, 13 August, 2026
होमदेशरेड फोर्ट ब्लास्ट के पीछे अल-कायदा का विंग ‘क्षेत्रीय आतंकी संगठन’ बनकर उभर रहा—UNSC पैनल की चेतावनी

रेड फोर्ट ब्लास्ट के पीछे अल-कायदा का विंग ‘क्षेत्रीय आतंकी संगठन’ बनकर उभर रहा—UNSC पैनल की चेतावनी

UNSC की 1267 कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' ने लॉजिस्टिक्स और फाइनेंशियल नेटवर्क बना लिए हैं और वे बड़ी यूनिट्स के बजाय छोटे, बिखरे हुए और डिसेंट्रलाइज़्ड सेल्स के तौर पर काम कर रहे हैं.

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नई दिल्ली: भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा यानी AQIS, एक बिखरे और अलग-अलग हिस्सों में बंटे संगठन से बदलकर अब “एक क्षेत्रीय आतंकी संगठन” बन रहा है. संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधों की निगरानी करने वाली टीम ने बुधवार को सुरक्षा परिषद को जारी अपनी रिपोर्ट में यह चेतावनी दी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2025 में लाल किले पर हुआ धमाका उन बढ़ते सबूतों का एक अहम हिस्सा था, जिनसे पता चलता है कि AQIS ने “लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क बनाए हैं और बड़े समूहों के बजाय छोटे और अलग-अलग सेल के जरिए काम कर रहा है”.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति की रिपोर्ट, जो इस्लामिक स्टेट और दूसरे इस्लामी आतंकी संगठनों की गतिविधियों पर नजर रखती है, में कहा गया है कि AQIS पाकिस्तान में इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन के नाम से भी काम करता है. रिपोर्ट से पता चलता है कि 9/11 हमलों की 25वीं बरसी से कुछ ही हफ्ते पहले भी अल-कायदा दुनिया के कई हिस्सों में सक्रिय है और देशों की स्थिरता के लिए खतरा बना हुआ है.

हाल के महीनों में इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन पर बड़ी संख्या में हमलों को जिम्मेदार ठहराया गया है. इनमें 9 मई को खैबर-पख्तूनख्वा के बन्नू शहर में एक सुरक्षा चौकी पर किया गया आत्मघाती हमला भी शामिल है, जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हुई थी.

संभल में जन्मे जिहादी सना-उल-हक ने AQIS की स्थापना की थी. वह कश्मीर पर ध्यान देने वाले हरकत-उल-मुजाहिदीन का पुराना सदस्य और इस्लामी पल्प-फिक्शन का काफी लिखने वाला लेखक था. AQIS ने एक समय अफगानिस्तान में सबसे बड़े आतंकी प्रशिक्षण शिविर चलाए थे, जिनका पता अब तक चला था.

हालांकि, इसके शीर्ष नेतृत्व को खत्म किए जाने से संगठन को बड़ा नुकसान हुआ और उसके बचे हुए सदस्य अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के दक्षिणी इलाकों में चले गए.

1267 समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन का नेतृत्व कलिमुल्लाह और वकास नाम के एक व्यक्ति के हाथ में है. बताया गया है कि इसमें पाकिस्तान में पहले से सक्रिय तीन संगठनों के लोग शामिल हैं. ये हैं हाफिज गुल बहादुर ग्रुप, हरकत इंकलाब-ए-इस्लामी पाकिस्तान और लश्कर-ए-इस्लाम. गुल बहादुर तहरीक-ए-तालिबान का सबसे खतरनाक नेताओं में से एक है. इस संगठन ने पाकिस्तान में आम लोगों और सैन्य ठिकानों दोनों पर सैकड़ों हमले किए हैं.

विश्लेषक रहीम नासिर के मुताबिक, इस संगठन ने अकेले जुलाई 2025 में कम से कम 90 आतंकी हमले किए. इनमें कुछ हमलों में ड्रोन जैसी नई तकनीकों का भी इस्तेमाल किया गया.

प्रतिबंधों की निगरानी करने वाली संस्था के मुताबिक, AQIS का ज्यादातर नेतृत्व काबुल में रहता है और उसे अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात ने तजकिरा यानी राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी किए हैं. इसके अलावा, एक सदस्य देश ने 1276 समिति को बताया कि AQIS अब अफगानिस्तान के नूरिस्तान में बर्ग-ए-मताल में एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर चला रहा है. यहां शिनजियांग से आए उन जिहादियों को ट्रेनिंग दी जाती है, जो पहले सीरिया में काम कर रहे थे.

फिर से उभरना

1267 समिति की रिपोर्ट ने अफगानिस्तान से अमेरिका की खराब तरीके से की गई वापसी के लगातार सामने आ रहे असर को भी रेखांकित किया है. इसमें आधुनिक सैन्य तकनीक की आसानी से उपलब्धता भी शामिल है.

रिपोर्ट में कहा गया है, “तालिबान के सत्ता संभालने के पांच साल बाद भी बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियारों और दूसरे सैन्य उपकरणों की उपलब्धता बनी हुई है. इससे वहां की वास्तविक सरकार को ऐसे हथियार TTP और दूसरे संगठनों तक पहुंचाने में मदद मिलती रही है.”

कुछ सदस्य देशों के मुताबिक, “नाइट विजन गॉगल्स सहित आधुनिक हथियार प्रणालियों के फैलाव से सूचीबद्ध संगठनों की लड़ने की क्षमता बढ़ी है और सुरक्षा बलों के लिए उनकी घातक क्षमता भी बढ़ी है.”

1267 समिति ने कहा है कि इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा दोनों ही रासायनिक और जैविक हथियार बनाने में लगातार रुचि दिखा रहे हैं, “लेकिन अभी तक वे इससे जुड़ी तकनीकी मुश्किलों को दूर नहीं कर पाए हैं.”

हालांकि, ऐसे हथियार बनाने के तरीके की जानकारी आसानी से उपलब्ध है, लेकिन इन्हें बनाने की जटिल प्रक्रिया के लिए विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है, जो जिहादी संगठनों के पास दिखाई नहीं देता.

हालांकि, 1267 समिति ने बताया कि भारत ने दिसंबर 2025 में हैदराबाद के एक डॉक्टर को इस्लामिक स्टेट के लिए रिकिन बनाने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. सैयद अहमद मोहिउद्दीन को नवंबर 2025 में हिरासत में लिया गया था और अभियोजकों ने दावा किया है कि उसकी कार से बरामद अरंडी का तेल जैविक हथियार बनाने की साजिश में इस्तेमाल किया जाना था.

जिहादी आंदोलन के शीर्ष नेतृत्व को भले ही काम करने में मुश्किलों और कमजोरी का सामना करना पड़ा हो, लेकिन 1267 समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्रीय संगठनों ने अपनी गतिविधियों का विस्तार करने में सफलता हासिल की है, खासकर अफ्रीका में.

नाइजीरियाई जिहादी संगठन बोको हराम द्वारा अपहरण की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है. संगठन ने फिरौती से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों के लिए किया. सोमालिया में सक्रिय एक अन्य संगठन अल-शबाब ने अपने कब्जे वाले इलाकों में व्यापारियों से सुरक्षा के नाम पर पैसे लेकर अपनी गतिविधियों के लिए फंड जुटाया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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