नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की छात्र इकाई के नेता के.ए. रऊफ शरीफ की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसके और अन्य के खिलाफ दर्ज धनशोधन के एक मामले को उत्तर प्रदेश के लखनऊ से केरल के एर्नाकुलम स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति वी. रमासुब्रमण्यन और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि ऐसा नहीं कहा जा सकता कि लखनऊ की एक विशेष अदालत के पास धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामलों से शिकायत से निपटने के लिए क्षेत्राधिकार की कमी है।
पीठ ने कहा, ‘‘किसी भी मामले में, शिकायत की सुनवाई पर विचार करने के अधिकार क्षेत्र की कमी इसके स्थानांतरण के आदेश का आधार नहीं बन सकती है।’’
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दावा किया था कि शरीफ के बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन के जरिये काफी पैसा आया था।
लखनऊ की अदालत ने पिछले साल दिसंबर में केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और छह अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) मामले में आरोप तय किए थे।
कप्पन को तीन अन्य लोगों के साथ छह अक्टूबर, 2020 को उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब वह 19-वर्षीया एक महिला के कथित सामूहिक बलात्कार और हत्या की रिपोर्टिंग करने के लिए उत्तर प्रदेश के हाथरस जा रहा था।
कप्पन के अलावा, मामले के अन्य आरोपी शरीफ, अतीकुर रहमान, मसूद अहमद, मोहम्मद आलम, अब्दुल रज्जाक और अशरफ कादिर हैं।
भाषा सुरेश माधव
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