नयी दिल्ली, दो नवंबर (भाषा) संसद की एक समिति ने चार राज्यों में बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के लंबित मामलों और विशेष त्वरित अदालतों के कामकाज की सोमवार को समीक्षा की।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और केरल के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने गृह पर विभाग संबंधी संसदीय स्थायी समिति को जानकारी दी।
बैठक में शामिल हुए सदस्यों ने बताया कि अधिकारियों से ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण’ (पॉक्सो) कानून के तहत लंबित मामलों के बारे में पूछा गया। उनसे ऐसे मामलों से विशेष रूप से निपटने के लिए गठित ‘फास्ट ट्रैक’ (त्वरित) विशेष अदालतों के कामकाज के बारे में भी पूछा गया।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में देशभर में इस तरह के लंबित मामलों की संख्या सर्वाधिक है, जो 65,000-75,000 के आसपास है। इसी तरह, केरल में 13,000-18,000, राजस्थान में 12,000-16,000 और तमिलनाडु में 8,000-11,000 मामले लंबित हैं।
देशभर में बाल यौन अपराधों और दुष्कर्म के 2.45 लाख से अधिक मामले लंबित हैं।
भाषा वैभव नरेश
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