ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश सरकार को प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) के लिए लोगों का समर्थन जुटाने के लिए गांवों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से बहुत पहले ही बातचीत शुरू कर देनी चाहिए थी. तुतिंग-यिंगकियॉन्ग से बीजेपी विधायक आलो लिबांग ने यह बात कही. उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने लोगों को इस प्रोजेक्ट के बारे में ठीक से नहीं समझाया और प्रभावित परिवारों के लिए जिस आजीविका योजना का वादा किया गया था, उसे भी लागू नहीं किया.
दिप्रिंट से बातचीत में प्रस्तावित पनबिजली परियोजना का समर्थन करने वाले लिबांग ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से बार-बार कहा था कि गांवों में जाकर लोगों को इस परियोजना के बारे में समझाने के लिए जमीनी स्तर पर अभियान शुरू किया जाए. लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में उन्हें ही इन चर्चाओं से बाहर कर दिया गया, जबकि उनकी विधानसभा सीट में प्रस्तावित बांध के कारण डूबने वाला सबसे बड़ा इलाका आता है.
उन्होंने कहा, “मैंने उपमुख्यमंत्री से कहा था कि हमें 2024 के चुनाव के बाद ही बांध के लिए यह अभियान शुरू कर देना चाहिए. लेकिन 2025 तक भी कुछ नहीं हुआ.”
उन्होंने कहा कि सरकार ने एक और गलती यह की कि जब अधिकारी और बाहर के लोग परियोजना और उसकी शुरुआती व्यवहार्यता रिपोर्ट (PFR) पर चर्चा करने के लिए इलाके में आए, तब स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधियों को इसकी जानकारी नहीं दी गई.
उन्होंने कहा, “दिल्ली से लोग, बाहर से लोग हमारे बिना बताए आ जाते हैं. जाहिर है, इससे लोग घबरा जाएंगे.”
लिबांग की यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब गांवों और सामुदायिक संगठन सियांग और अपर सियांग जिलों में शुरुआती जांच और प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के बांध का लगातार विरोध कर रहे हैं. इस विरोध का असर विधायक पर व्यक्तिगत रूप से भी पड़ा है. सितंबर में प्रदर्शनकारी अपर सियांग जिले के मुख्यालय यिंगकियॉन्ग में उनके घर तक पहुंच गए थे. उन्होंने घर का गेट तोड़ दिया और दरवाजों और खिड़कियों पर पत्थर फेंके. बाहर खड़ी गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया गया.
62 साल के लिबांग ने कहा कि सरकार यह उम्मीद नहीं कर सकती कि वह लोगों को ताकत के दम पर या बाहर से लोगों को भेजकर परियोजना समझाकर अपने पक्ष में कर लेगी. इसके लिए उसे ऐसे स्थानीय प्रतिनिधियों के जरिए काम करना चाहिए जो समुदाय के अपनी जमीन से रिश्ते को समझते हों. उन्होंने आरोप लगाया कि बांध विरोधी संगठनों और इलाके के बाहर के राजनीतिक समूहों ने गांव के लोगों को गुमराह किया है.
उन्होंने कहा, “हमें उनकी बात सुननी होगी और सोच-समझकर उनसे बात करनी होगी. यह दोनों तरफ से बातचीत होनी चाहिए. हम उन्हें जबरदस्ती दबा नहीं सकते.” उन्होंने कहा, “उनके दिमाग में बस यही है कि यह उनकी पुश्तैनी जमीन है और इसके बिना वे कुछ नहीं हैं.”

एक वादा, जिसने अविश्वास बढ़ाया
लिबांग के लिए प्रशासन की ओर से लोगों का भरोसा नहीं जीत पाने का एक उदाहरण परियोजना से प्रभावित इलाकों के परिवारों के लिए घोषित आजीविका सहायता योजना के तहत पैसे देने में हुई देरी है.
यह पैसा लोगों को तुरंत कुछ आर्थिक मदद देने के लिए दिया जाना था, लेकिन लिबांग ने कहा कि अभी तक लोगों को यह पैसा नहीं मिला है.
उन्होंने कहा, “आजीविका योजना के तहत भी लोगों को पैसा नहीं मिला है. अब इससे उनके मन में अविश्वास पैदा हो रहा है. अगर इस योजना के लिए वे पैसे देने की गारंटी नहीं दे सकते, तो बांध बनने के बाद उचित मुआवजा देने की क्या गारंटी है?”
जिला प्रशासन का कहना है कि यह योजना किसी चुनिंदा समूह के लिए नहीं, बल्कि हर परिवार के लिए थी. अपर सियांग के डिप्टी कमिश्नर अशोक ताजो ने दिप्रिंट को बताया था कि गांव के लोग इसमें शामिल होने से पहले लिखित गारंटी चाहते थे.
विधायक ने कहा कि सरकार की योजना बनाने की प्रक्रिया पर्याप्त नहीं थी, खासकर इस परियोजना के बड़े स्तर और राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए.
उन्होंने कहा, “अगर सरकार गांव के लोगों का भरोसा जीतना चाहती थी, तो उसे यह योजना जल्दी लागू करनी चाहिए थी.”
उन्होंने कहा कि देरी की वजह से प्रशासन के लिए लोगों को परियोजना को लेकर अपने वादों पर भरोसा दिलाना और मुश्किल हो गया है.
प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर तनाव ने भी इस अविश्वास को और बढ़ाया है. लिबांग ने सुरक्षा बलों की मौजूदगी का बचाव किया. उन्होंने कहा कि हिंसा रोकने और परियोजना का समर्थन करने वाले गांव के लोगों की सुरक्षा के लिए उनकी जरूरत थी.
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने परियोजना के समर्थन में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, उनके घरों, खेतों और संतरे के बागों में उनके गांवों से बाहर के लोगों ने तोड़फोड़ की.
लिबांग ने बेगिंग गांव का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि यह उन शुरुआती गांवों में था, जिसने MoU पर हस्ताक्षर किए थे. लिबांग के मुताबिक, इसके बाद मई में गेकू के लोगों ने वहां के निवासियों को डराया-धमकाया.
उन्होंने कहा, “इस तरह की कार्रवाई मई में ही हो जानी चाहिए थी, जब भीड़ आकर घरों और खेतों को नुकसान पहुंचाने लगी थी. इसलिए अब लोग मानसिक रूप से डरे हुए हैं.”
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल लोगों की सुरक्षा के लिए वहां हैं, प्रदर्शनकारियों से भिड़ने के लिए नहीं.
उन्होंने कहा, “बल वहां उनके खिलाफ लड़ने या उन्हें परेशान करने के लिए नहीं है. वे सिर्फ उनकी सुरक्षा के लिए वहां हैं.” उन्होंने SIFF की सुरक्षा बलों को हटाने की मांग को भी गैर-जरूरी बताया.
हालांकि, SIFF का कहना है कि बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती से लोगों में डर पैदा हुआ है. उसने राज्य सरकार के साथ आगे किसी भी बातचीत से पहले सुरक्षा बलों को हटाने की मांग की है.
बांध के पक्ष में तर्क
विरोध के बावजूद लिबांग ने कहा कि इस परियोजना से इलाके में बेहतर बुनियादी ढांचा, कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसर आ सकते हैं. खासकर युवाओं के लिए, जो पारंपरिक खेती को जारी नहीं रखना चाहते.
उन्होंने माना कि नदी के पास की निचली कृषि भूमि प्रभावित होगी. लेकिन उन्होंने कहा कि मौजूदा कई घर और गांवों के नए हिस्से ऊंचाई पर हैं और वे डूबेंगे नहीं.
उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि चर्चा में आने वाली पूरी जमीन को पुश्तैनी खेती की जमीन बताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस इलाके में पारंपरिक रूप से झूम खेती की जाती रही है.
उन्होंने कहा, “युवा पीढ़ी रोज-रोज खेती करते रहना नहीं चाहती. वे दफ्तर में बैठकर काम करना चाहते हैं.” उन्होंने कहा, “अब पूरी दुनिया आगे बढ़ गई है, तो हम नंगे पैर कैसे चलते रहेंगे? हमें आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित करना होगा.”
लिबांग ने कहा कि उन्होंने प्रभावित इलाकों के लिए परियोजना के लोकल एरिया डेवलपमेंट प्लान के फंड में बड़ा हिस्सा देने की मांग भी की है. प्रस्तावित हिस्सा करीब 2 प्रतिशत था, लेकिन उन्होंने इसे बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने की मांग की, ताकि स्थानीय समुदायों को इसका ज्यादा सीधा फायदा मिल सके.
लिबांग ने कहा, “अगर मुझे आपसे कुछ चाहिए, तो मुझे आपके साथ मिलकर काम करना होगा, जबरदस्ती नहीं. अगर राज्य और केंद्र सरकार को लगता है कि यह जबरदस्ती हो सकता है, तो वे बहुत गलत हैं. अगर ऐसा हुआ, तो हालात बहुत खराब हो सकते हैं.” उन्होंने कहा, “लोग मुझसे जवाब मांग रहे हैं, लेकिन मैं भी अपने से ऊपर बैठे लोगों से जवाब मांग रहा हूं.”
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