चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को कहा कि जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक राह और विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन हरियाणा की प्रगति और प्रदेश की जनता की खुशहाली सभी की साझा मंजिल है. उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों की पहचान इस बात से है कि वे हरियाणा की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं.
मुख्यमंत्री पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा की ओर से संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे.
सैनी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की जरूरतों और उम्मीदों को समझें और प्रदेश के विकास में अपना योगदान दें.
उन्होंने कहा कि हरियाणा ने अपनी स्थापना के 60 साल पूरे कर लिए हैं. हीरक जयंती के मौके पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन गौरवशाली अतीत से सीख लेकर भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की मौजूदगी से इसकी गरिमा बढ़ी है. संसदीय प्रक्रियाओं, सदन की मर्यादा और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों पर उनका मार्गदर्शन सभी के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा की हीरक जयंती के कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शामिल होकर प्रदेशवासियों को अपना आशीर्वाद दिया.
सैनी ने कहा कि हरियाणा की 60 साल की विकास यात्रा सिर्फ सड़कों, संस्थानों और उद्योगों के विस्तार की कहानी नहीं है. इसमें किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और आम लोगों की मेहनत भी शामिल है.
उन्होंने कहा कि खेतों की हरियाली से लेकर उद्योगों की ऊंचाइयों तक, गांवों की पगडंडियों से आधुनिक एक्सप्रेस-वे तक और अखाड़ों की मिट्टी से विश्व के खेल मंचों तक हरियाणा ने मेहनत, साहस और संकल्प से विकास के नए अध्याय लिखे हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की उपलब्धियों की नींव उन चर्चाओं, फैसलों और कानूनों से भी बनी है, जिन्हें जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा में आकार दिया.
उन्होंने बताया कि 1 नवंबर 1966 को हरियाणा अस्तित्व में आया था और उस समय विधानसभा में 54 सदस्य थे. 1967 में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 81 हुई और 1977 में यह संख्या 90 हो गई.
सैनी ने कहा कि विधानसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी हो और आम जनता को अधिक सुविधाएं मिल सकें.
उन्होंने कहा कि हरियाणा आज 15वीं विधानसभा के दौर में अपनी लोकतांत्रिक यात्रा आगे बढ़ा रहा है. उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर 1966 को हरियाणा विधानसभा की पहली बैठक हुई थी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय संसाधन सीमित थे और शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई, बिजली, सड़क और प्रशासन जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार बड़ी चुनौती था. उन्होंने उन सभी जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार जताया, जिन्होंने ऐसी परिस्थितियों में प्रदेश के भविष्य की मजबूत नींव रखने का काम किया.
सैनी ने कहा कि संविधान का सम्मान हमारे फैसलों और व्यवहार में दिखाई देना चाहिए. संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्श हैं. जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि इन आदर्शों को शासन के कामकाज में उतारें.
उन्होंने कहा कि जब किसी पात्र नागरिक को बिना भेदभाव उसका अधिकार मिलता है, कमजोर व्यक्ति की बात सुनी जाती है और समाज में एक-दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ता है, तभी संवैधानिक मूल्य मजबूत होते हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा कानून बनाने, सरकारी धन के इस्तेमाल को मंजूरी देने और सरकार को जवाबदेह बनाने का महत्वपूर्ण मंच है.
उन्होंने कहा कि सदन में उठाया गया एक सार्थक सवाल किसी गांव की समस्या को समाधान तक पहुंचा सकता है और किसी विधेयक पर दिया गया उपयोगी सुझाव लाखों लोगों की जिंदगी बेहतर कर सकता है.
सैनी ने कहा कि प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण, बजट चर्चा और समितियों का काम संसदीय व्यवस्था को मजबूत बनाता है. इनका प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए अध्ययन, तैयारी और जनता से लगातार संपर्क जरूरी है.
उन्होंने कहा कि जवाबदेही शासन को मजबूत बनाती है. विपक्ष की ओर से उठाई गई जनहित की बात को गंभीरता से सुनना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है. इसी तरह आलोचना के साथ व्यावहारिक सुझाव देना भी सार्वजनिक जीवन की बड़ी सेवा है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में तीखी बहस हो सकती है, लेकिन भाषा की गरिमा बनी रहनी चाहिए. जनप्रतिनिधियों को तर्कों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए.