scorecardresearch
Monday, 2 November, 2026
होमदेश‘धार्मिक उत्सव पब्लिक हेल्थ से ऊपर नहीं’—दिवाली के 2 दिन ग्रीन पटाखों की अनुमति: सुप्रीम कोर्ट

‘धार्मिक उत्सव पब्लिक हेल्थ से ऊपर नहीं’—दिवाली के 2 दिन ग्रीन पटाखों की अनुमति: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 2 दिन प्रमाणित ग्रीन पटाखों की अनुमति दी है. इनके इस्तेमाल का समय तय किया गया है और कई पाबंदियां लगाई गई हैं. कोर्ट ने कहा कि धार्मिक परंपराएं प्रदूषण मुक्त वातावरण के अधिकार से ऊपर नहीं हो सकतीं.

Text Size:

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिवाली का जश्न सार्वजनिक स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं मनाया जा सकता. कोर्ट ने दिल्ली-NCR में प्रमाणित ग्रीन पटाखों के सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी है.

कोर्ट ने यह आदेश 29 अक्टूबर को दिया था, लेकिन इसे सोमवार दोपहर आधिकारिक रूप से अपलोड किया गया. 23 पेज के इस आदेश में कहा गया कि धार्मिक परंपराएं सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं से ऊपर नहीं हो सकतीं. हालांकि, कोर्ट ने पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश नहीं दिया और इसके बजाय कुछ समय के लिए सख्त नियमों के साथ सीमित छूट दी.

धार्मिक भावनाओं और संविधान में दिए गए प्रदूषण मुक्त वातावरण के अधिकार के बीच संतुलन बनाने के लिए लगाई गई सख्त शर्तों के तहत, 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 बजे से 7 बजे और रात 8 बजे से 10 बजे के बीच ही ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति होगी. 9 नवंबर से पूरी तरह प्रतिबंध फिर लागू हो जाएगा.

अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों, अधिसूचित साइलेंस जोन और शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर पूरी तरह रोक होगी. आदेश में कहा गया कि इन इलाकों को नो-क्रैकर जोन घोषित किया जाएगा.

वे निर्माता, जिनके पास सीएसआईआर-नीरी (वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान) और पेसो (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन) से वैध सत्यापन है, 2 से 6 नवंबर के बीच मंजूर किए गए ग्रीन पटाखे बेच सकते हैं.

आदेश के मुताबिक, एक साथ जोड़कर चलाए जाने वाले पटाखे, जिन्हें आमतौर पर ‘लड़ियां’ और ‘मालाएं’ कहा जाता है, और बेरियम वाले पटाखे ग्रीन पटाखों के रूप में नहीं बेचे जाएंगे. सीएसआईआर-नीरी से ग्रीन पटाखे के तौर पर मंजूरी नहीं मिलने वाले पटाखों की बिक्री भी नहीं होगी.

ग्रीन लेबल लगाकर सामान्य पटाखों की बिक्री रोकने के लिए हर डिब्बे पर एक उत्पाद-विशेष क्यूआर कोड होना जरूरी होगा. इसमें निर्माता की जानकारी, नीरी रजिस्ट्रेशन, पेसो या जिला मजिस्ट्रेट का लाइसेंस, पटाखे में इस्तेमाल सामग्री और टेस्ट सर्टिफिकेट की जानकारी होगी, कोर्ट ने कहा.

पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें जांच करेंगी, क्यूआर कोड की जांच करेंगी और अवैध या सामान्य पटाखों को जब्त करेंगी. कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने वाले निर्माता और कारोबारी पाए गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

कोर्ट ने अधिकारियों को ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए तय जगहों की पहचान करने का भी निर्देश दिया. इनके अलावा कहीं और बिक्री नहीं होगी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी नहीं.

आदेश में कोर्ट ने अधिकारियों की ओर से अपने निर्देश लागू करने में बार-बार नाकाम रहने की चिंता पर भी ध्यान दिया. कोर्ट ने राज्य सरकारों और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि निर्माता और कारोबारी पर्याप्त रकम की सुरक्षा राशि जमा करें. कोर्ट ने कहा कि नियम तोड़े जाने पर यह सुरक्षा राशि जब्त कर ली जाएगी.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उन राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश दिया गया है, जिनके इलाके दिल्ली-NCR के दायरे में आते हैं, कि वे दिवाली से पहले और दिवाली के बाद की अवधि के लिए अलग-अलग हवा की गुणवत्ता की रिपोर्ट तैयार करें. इसके अलावा, वे तुलना के लिए रेत और पानी के नमूने भी इकट्ठा करेंगे और पूरे दिल्ली-NCR में पटाखों के कारण अस्पतालों में भर्ती होने वाले लोगों पर पड़ने वाले असर की रिपोर्ट देंगे.

कोर्ट ने सभी अनुपालन रिपोर्ट और हलफनामे दाखिल करने के लिए 14 दिसंबर की तारीख तय की है. कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर इस समय सीमा का पालन नहीं किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी. कोर्ट ने साफ किया कि वह अपने निर्देशों के पालन की निगरानी जारी रखेगा. पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को तय की है.

आदेश में लोगों के व्यवहार में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया है. इसमें बार के सदस्यों और दूसरी प्रमुख हस्तियों, जिनमें अभिनेता, मशहूर हस्तियां और खिलाड़ी शामिल हैं, से जन-जागरूकता अभियानों में शामिल होने की अपील की गई है, ताकि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए दिवाली मनाने को बढ़ावा दिया जा सके. कोर्ट ने प्रदूषण के नुकसान के बारे में बच्चों को जागरूक करने के लिए जागरूकता और जानकारी देने वाले कार्यक्रम चलाने पर भी जोर दिया.

इस आदेश का मुख्य विचार यह है कि धार्मिक उत्सव और पर्यावरण की जिम्मेदारी एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं. कोर्ट ने दिवाली से जुड़े गहरे धार्मिक, सामाजिक और भावनात्मक भावनाओं को माना. साथ ही कोर्ट ने याद दिलाया कि जश्न मनाने के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि दूसरों के स्वास्थ्य और भलाई से समझौता किया जाए.

कोर्ट का यह आदेश दिवाली के दौरान प्रदूषण से जुड़े एक लंबित मामले में दाखिल कई अर्जियों पर आया है. इनमें कुछ अर्जियों में पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई थी. इन अर्जियों में कोर्ट से पिछले साल के अपने आदेश पर फिर से विचार करने को कहा गया था, जिसमें पटाखों के सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी. वहीं कुछ अर्जियों में कोर्ट से ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति देने की मांग की गई थी.

निर्देश जारी करने से पहले कोर्ट ने दिवाली के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व और इस बात पर विचार किया कि यह त्योहार कैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय त्योहार बन गया है. कोर्ट ने कहा कि यह त्योहार जाति, समुदाय या धर्म की परवाह किए बिना लोग मनाते हैं और यह खुशी और समृद्धि लेकर आता है.

आदेश में प्राचीन हिंदू ग्रंथों, जिनमें स्कंदपुराण और पद्मपुराण शामिल हैं, का भी जिक्र किया गया. इसमें कहा गया कि दीपक पारंपरिक रूप से दिवाली के जश्न का एक जरूरी हिस्सा रहे हैं. हालांकि, बारूद के आने के बाद त्योहार मनाने के तरीके में बदलाव आया और पटाखों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होने लगा.

कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25(1) के तहत पटाखे चलाना धार्मिक प्रथा का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य से जुड़ी शर्तों के अधीन है. कोर्ट ने कहा कि स्वस्थ, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त वातावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिया गया है.

पीठ ने कहा, “पर्यावरण को खराब होने देना, जिससे सभी जीवित प्राणियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा हो, उत्सव के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देता है और जश्न बेकार हो जाएगा.”

कोर्ट ने पटाखों से होने वाले गंभीर पर्यावरणीय नुकसान, खासकर हवा में पार्टिकुलेट मैटर यानी बेहद छोटे प्रदूषण कणों के फैलने को लेकर चिंता जताई.

साथ ही कोर्ट ने कहा कि राज्य इन निर्देशों का पालन करने में नाकाम रहे हैं और जरूरी आकलन भी नहीं दिया है. लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि पूरी तरह प्रतिबंध के बावजूद प्रदूषण का स्तर बढ़ा है.

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कोर्ट ने कहा कि सामान्य पटाखे ग्रीन पटाखों के नाम पर बेचे जाते रहे हैं. इसलिए पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से न केवल पटाखों की अवैध बिक्री को बढ़ावा मिल रहा था, बल्कि उपभोक्ताओं को असली ग्रीन पटाखे और जरूरी जांच के बाद मंजूर किए गए नई पीढ़ी के जुड़े हुए ग्रीन पटाखे खरीदने से भी रोका जा रहा था.

पटाखों के नियंत्रित इस्तेमाल की अनुमति देते हुए कोर्ट ने साफ किया कि उसका आदेश अलग-अलग हितों के बीच संतुलन बनाने और यह सुनिश्चित करने की जरूरत पर आधारित है कि नियमों की व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: ‘काले कोट वालों की हिंसा’ पर बवाल, दिल्ली पुलिस प्रमुख ने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से की बात


 

share & View comments