नई दिल्ली: सोमवार को मान सिंह रोड स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में करीब 80 पुलिस अधिकारियों ने अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया.
सोमवार सुबह कई पुलिस अधिकारी PHQ के बाहर जमा हुए और पुलिस थानों के अंदर पुलिसकर्मियों को होने वाले खतरों को लेकर चिंता जताई. एसीपी वशिष्ठ ने कहा, “अगर हम पुलिस थानों के अंदर सुरक्षित नहीं हैं, तो हम दूसरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं?”
इसके बाद पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने PHQ के अंदर एक ‘संपर्क सभा’ आयोजित की, जिसमें उन्होंने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों की शिकायतें सुनीं. दिल्ली पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उन्होंने “उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी वास्तविक चिंताओं को दूर करने के लिए तुरंत और उचित कदम उठाए जाएंगे. इन चिंताओं को व्यवस्थित तरीके से दूर किया जाएगा, ताकि पुलिस बल का मनोबल मजबूत हो और पुलिस की वर्दी की गरिमा और सम्मान बना रहे.”
यह प्रदर्शन शाहदरा पुलिस थाने में हुई कथित झड़प के बाद दो पुलिस अधिकारियों के तबादले के बाद हुआ. यह मामला 23 अक्टूबर का है. एक वकील ने आरोप लगाया था कि पुलिस थाने में हुई झड़प के दौरान उसके सिर पर गंभीर चोट लगी. वकीलों को भरोसा दिलाया गया था कि मारपीट के आरोपी वर्दीधारी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाएगा, लेकिन अगले दिन उन्हें बताया गया कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.
वकीलों ने आगे आरोप लगाया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान उनमें से एक अधिकारी ने “भरी हुई रिवॉल्वर लहराई” और उन्हें “धमकी” दी.
इसके बाद जिला वकीलों ने पुलिस की कथित निष्क्रियता के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी. तीन दिन बाद वशिष्ठ, जो गांधी नगर सब-डिविजन के एसीपी थे और शाहदरा पुलिस थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया. वशिष्ठ को स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमन एंड चिल्ड्रन और अरुण कुमार को सिक्योरिटी डिविजन भेजा गया.
जिला अदालत के वकीलों ने अपना प्रदर्शन तभी खत्म किया, जब इन तबादलों की सार्वजनिक रूप से घोषणा की गई.
तबादलों के बाद पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और बार काउंसिल के सदस्यों के साथ बैठक की. इसमें घटना पर चर्चा की गई और उनके बीच बेहतर तालमेल बनाने की बात हुई. इसके बाद पुलिस अधिकारियों से PHQ के बाहर जमा होने के लिए कहा गया.
पुलिस आयुक्त को दी गई मांगों की सूची में प्रदर्शन कर रहे पुलिस अधिकारियों ने ACP और SHO के तबादले के आदेश को वापस लेने की मांग की. उन्होंने यह भरोसा भी मांगा कि टकराव में शामिल वकीलों के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द या वापस नहीं लिया जाएगा. उन्होंने यह भी मांग की कि प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कानूनी या विभागीय कार्रवाई न की जाए. साथ ही उन्होंने पुलिस आयुक्त के साथ एक बैठक की मांग की, जिसमें “विभागीय दबाव को लेकर बड़ी शिकायतों” और “पुलिस बल के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई” पर चर्चा हो.
हाई-वोल्टेज ड्रामा
सोमवार सुबह नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू होने के बावजूद करीब 80 पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हो गए. प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कहा कि “काले कोट में भेष बदलकर घूमने वाले लोगों” की गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए नियम बनाए जाने चाहिए.
एसीपी ने पुलिस आयुक्त के प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों से मिलने से पहले कहा, “जब भी पांच से ज्यादा वकील अदालत में प्रवेश करें, तो इसे गैरकानूनी सभा माना जाना चाहिए और काले कोट में मौजूद उन भेष बदलने वालों को वहां से हटा दिया जाना चाहिए.”
उन्होंने कहा कि PHQ में एक ऐसा सेल होना चाहिए जो किसी भी वकील का लाइसेंस रद्द कर सके, जो “गैरकानूनी” गतिविधियों में शामिल हो. उन्होंने कहा, “अदालत को हिंसा भड़काने वाले लोगों का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए. पुलिस अधिकारियों को सम्मान के साथ अदालतों में प्रवेश करने में सक्षम होना चाहिए.”
एसीपी ने आगे कहा कि अधिकारियों ने अपनी मांगों की लिखित सूची दे दी है और पुलिस आयुक्त की मौजूदगी में PHQ के सभागार में उनसे मिलने का समय मांगा है. उन्होंने कहा, “हमने अपनी मांगें रख दी हैं. हम मार्च या ऐसा कुछ नहीं करना चाहते, लेकिन हम चाहते हैं कि पुलिस आयुक्त हमारी बात सुनें. अभी तक हमें कोई सूचना नहीं मिली है.”
पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली) सचिन शर्मा प्रदर्शन को रोकने की कोशिश करते हुए दिखाई दिए. उन्होंने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों से कहा, “हम एक अनुशासित बल हैं. प्रदर्शनकारियों की तरह व्यवहार न करें.” वह लगातार उनसे PHQ के अंदर आने के लिए कहते रहे, लेकिन प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों ने मना कर दिया.
बाद में दिन में दिल्ली पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि विभिन्न वकील संगठनों के साथ बैठक के दौरान यह तय किया गया कि जिला और PHQ स्तर पर उनके प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त समन्वय समिति बनाई जाएगी. यह समिति पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक कामकाज के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को दूर करने का काम करेगी.
बयान में कहा गया, “प्रमोशन, MACP, आवास और सेवा से जुड़े अन्य मामलों पर भी उचित ध्यान दिया जाएगा.”
बयान में आगे कहा गया कि सभी जिला और यूनिट प्रमुखों को अपने-अपने स्तर पर नियमित संपर्क सभाएं आयोजित करने, सभी रैंक के पुलिसकर्मियों से सीधे बातचीत सुनिश्चित करने, उनकी शिकायतों की तुरंत जांच करने और तय समय में समाधान के लिए कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है. बयान में कहा गया, “वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से शिकायतों के समाधान की निगरानी करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी वास्तविक शिकायत अनसुनी न रह जाए.”
2019 में भी ऐसा ही एक प्रदर्शन हुआ था. उस समय 2,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी और उनके परिवार के सदस्य ITO स्थित पुराने PHQ के बाहर जमा हुए थे. यह प्रदर्शन पार्किंग को लेकर पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई झड़प के बाद हुआ था. उस प्रदर्शन की एक डरावनी तस्वीर तब सामने आई थी, जब तत्कालीन पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने के लिए बाहर आए थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी शुरू कर दी और उनकी आवाज दब गई.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को भरोसा दिलाया कि अदालत में रिव्यू पिटीशन दाखिल की जाएगी, घायलों को मेडिकल मदद दी जाएगी और उन्हें कम से कम 25,000 रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी. इसके बाद प्रदर्शन खत्म कर दिया गया.
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