नई दिल्ली: शुक्रवार देर रात 150 से ज्यादा युवाओं की भीड़ ने अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) के दफ्तर में आग लगा दी. भीड़ प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) के विरोध में प्रदर्शन कर रही थी.
प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए जगह तय करने के लिए सियांग और अपर सियांग जिलों में तीन संभावित जगहों पर सर्वे करने की जिम्मेदारी NHPC को दी गई है.
शुक्रवार की घटना ने प्रोजेक्ट के भविष्य को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता पैदा कर दी है. इस प्रोजेक्ट को चीन के यारलुंग त्सांगपो पर मेदोग काउंटी में बन रहे 60,000 मेगावाट के मेगा हाइड्रोपावर डैम के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है. यारलुंग त्सांगपो तिब्बत से होकर बहती है और अरुणाचल प्रदेश में भारत में प्रवेश करती है, जहां इसे सियांग के नाम से जाना जाता है. यह ब्रह्मपुत्र की मुख्य सहायक नदी है. यह दिबांग और लोहित समेत दूसरी सहायक नदियों से मिलती है और फिर असम में ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है.
स्थानीय आदि और गालो आदिवासी समुदायों के लगातार विरोध के कारण सियांग प्रोजेक्ट 2008 से जमीन पर ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया है. उस समय तत्कालीन यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) सरकार ने इसे राष्ट्रीय प्रोजेक्ट घोषित किया था.
NHPC अब तक उस सही जगह की पहचान भी नहीं कर पाई है, जहां सियांग डैम बनाया जाना है. इसके अलावा, भारत की सबसे बड़ी हाइड्रोपावर कंपनी, जिसे प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए जरूरी सर्वे का काम पूरा नहीं कर पाई है.
स्थानीय लोगों के अलावा, अब कांग्रेस भी इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रही है.
डैम की जगह अभी तक तय नहीं
NHPC ने 30 दिसंबर 2022 को जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग को सौंपी गई ड्राफ्ट प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट में सियांग और अपर सियांग जिलों में तीन संभावित जगहों—उग्गेंग, डाइट डाइम और पारोंग—की पहचान की थी. सरकारी सूत्रों ने बताया कि NHPC को तीनों जगहों पर कोर ड्रिलिंग और जियोफिजिकल स्टडी करने और उनकी तुलना करने को कहा गया था, ताकि डैम की जगह को अंतिम रूप दिया जा सके.
लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण 2022 से काम लगभग पूरी तरह रुका हुआ है. स्थानीय लोगों का कहना है कि डैम न केवल उनकी पुश्तैनी जमीन और रोजी-रोटी को बर्बाद करेगा, बल्कि इस इलाके के पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाएगा. प्रोजेक्ट से जुड़े एक NHPC अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट जमा करने से पहले जो आखिरी काम बचा है, वह एक्सप्लोरेटरी कोर ड्रिलिंग है. लेकिन हम सर्वे के काम को ज्यादा आगे नहीं बढ़ा पाए हैं.”
उन्होंने कहा, “जब तक सर्वे पूरा नहीं होता और प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार नहीं होती, तब तक हम यह तय नहीं कर पाएंगे कि डैम आखिर किस जगह बनेगा.”
2017 से पहले NHPC ने SUMP को दो चरणों में बांटा था—सियांग अपर फेज I और सियांग अपर फेज II. 2017 में ही केंद्र सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने दोनों चरणों को मिलाकर एक सिंगल स्टोरेज प्रोजेक्ट बनाने का प्रस्ताव दिया था. अप्रैल 2022 में केंद्र ने NHPC को डैम की जगह तय करने के लिए प्री-फीजिबिलिटी स्टडी करने को कहा. इसके बाद प्रोजेक्ट को फिर से कुछ गति मिली.
अधिकारियों के मुताबिक, जब भी NHPC की टीम ड्रिलिंग का काम शुरू करने की कोशिश करती है, स्थानीय लोग उन्हें वहां से वापस जाने के लिए मजबूर कर देते हैं. शुक्रवार से सियांग प्रोजेक्ट से जुड़े करीब 15 NHPC अधिकारियों को पासीघाट में अपने घरों से काम करना पड़ रहा है. दूसरे NHPC अधिकारी ने कहा, “पासीघाट में NHPC का दफ्तर पूरी तरह जला दिया गया है. वहां कुछ भी नहीं बचा है.”
एक साल से ज्यादा समय में यह दूसरी बार है जब NHPC अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा है. 21 मई 2025 को सियांग के नीचे की ओर बसे छोटे से गांव बेगिंग के लोगों ने NHPC की टीम को पारोंग गांव में प्री-फीजिबिलिटी टेस्ट करने से रोक दिया था. ग्रामीणों ने NHPC की टीम की ओर से लाई गई ड्रिलिंग मशीनों समेत दूसरे उपकरणों को नुकसान पहुंचाया और टीम को वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया.
NHPC के वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि मई 2025 से, जब प्रदर्शनकारियों ने पारोंग के पास उनके वाहनों को जला दिया था, टीम प्रोजेक्ट के सर्वे के काम में कोई आगे की प्रगति नहीं कर पाई है. उन्होंने कहा, “सर्वे के काम की बात करें तो हम जमीन पर एक इंच भी आगे नहीं बढ़े हैं.”
मौजूदा स्थिति को देखते हुए NHPC अधिकारियों ने कहा कि प्रोजेक्ट के वास्तव में शुरू होने में अभी काफी समय लगेगा.
एक अधिकारी ने कहा, “PFR अभी तक पूरी नहीं हुई है. इसी PFR के आधार पर डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई जाएगी. इसके बाद अलग-अलग एजेंसियों से मंजूरी लेनी होगी. इस पूरी प्रक्रिया में कई साल लगेंगे. मैं अभी कोई अनुमान नहीं लगाना चाहता.”
प्रोजेक्ट का महत्व
सियांग प्रोजेक्ट सिर्फ चीन के प्रस्तावित मेगा डैम के मुकाबले रणनीतिक नजरिए से ही महत्वपूर्ण नहीं है. जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने दिप्रिंट को बताया कि सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट में हर साल करीब 109 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी उपलब्ध होगा. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पानी का भंडारण और बाढ़ के असर को कम करना है. बिजली बनाना इसका एक अतिरिक्त फायदा होगा.
इस जलाशय से भूजल स्तर में कमी को रोकने में मदद मिलेगी. लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर चीन के बनाए जा रहे मेगा डैम में कोई टूट-फूट होती है, तो यह जलाशय नदी के पानी के बहाव में अचानक होने वाले बदलाव को रोकने में सक्षम होगा.
जब से चीन ने 170 अरब डॉलर की लागत से दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर डैम में से एक बनाने की योजना का ऐलान किया है, तब से भारत के निचले इलाकों, जिसमें अरुणाचल प्रदेश भी शामिल है, पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता बनी हुई है.
केंद्र की पहल से भी स्थानीय लोग नहीं माने
पिछले जून में केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ मिलकर 350 करोड़ रुपये के स्पेशल डेवलपमेंट एंड लाइवलीहुड प्रोग्राम की शुरुआत की थी. इसका मकसद प्री-फीजिबिलिटी स्टडी आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय लोगों का भरोसा जीतना था.
डेवलपमेंट एंड लाइवलीहुड प्रोग्राम के तहत सियांग और अपर सियांग जिलों के 26 गांवों को शामिल किया जाना था. इन गांवों पर डैम का कुछ या पूरा असर पड़ने की आशंका है. इस प्रोग्राम के तहत स्थानीय लोगों को बागवानी, पशुपालन, हस्तशिल्प और बांस से सामान बनाने, मधुमक्खी पालन आदि का प्रशिक्षण दिया जाना था. कुछ ग्रामीणों को अपने घरों को पर्यटकों के लिए होमस्टे में बदलने में भी मदद दी जानी थी.
इस प्रोग्राम से करीब 10,000 लोगों को फायदा मिलना था, जिनमें आधी महिलाएं थीं. अरुणाचल प्रदेश सरकार को उन इलाकों में अस्पताल और स्कूल बनाने में मदद करनी थी, जहां इन ग्रामीणों को बसाया जाना था. लेकिन अधिकारियों ने कहा कि प्रोग्राम शुरू ही हुआ था कि फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.
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