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Monday, 22 June, 2026
होमदेशओडिशा: एनजीओ से जुड़ी महिला कर्मी के कपड़े उतारे जाने को लेकर राजनीतिक विवाद

ओडिशा: एनजीओ से जुड़ी महिला कर्मी के कपड़े उतारे जाने को लेकर राजनीतिक विवाद

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भुवनेश्वर, 20 जून (भाषा) ओडिशा के रायगड़ा जिले में हाल ही में एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की एक महिला समेत दो कर्मचारियों पर भीड़ के हमले और महिला के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ करने और उसके कपड़े उतारने के मामले को लेकर शनिवार को राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने इसे ‘बर्बर और शर्मनाक’ कृत्य करार दिया, जबकि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है और सभी दोषियों को सजा दी जाएगी।

कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि दिल्ली के दो एनजीओ कर्मचारियों के साथ हुई यह घटना राज्य में ‘‘कानून-व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का साफ संकेत’’ है।

रायगड़ा के पुलिस अधीक्षक राज प्रसाद ने बताया कि यह घटना 16 जून की रात कल्याणसिंहपुर पुलिस थाने के तहत आने वाले कंडुलगुडा गांव में हुई, जब ग्रामीणों ने 22 साल की महिला और उसी उम्र के एक पुरुष को बच्चा चोर समझकर उन पर हमला कर दिया।

पुलिस ने अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किया है और तीन आपराधिक मामले दर्ज किए हैं।

प्रसाद ने पत्रकारों से कहा, ‘‘वीडियो फुटेज की जांच के बाद आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।’’

ये दोनों ओडिशा के कालाहांडी, कंधमाल और रायगड़ा ज़िलों में एक एनजीओ के तहत अनुसंधान का काम कर रहे थे।

महिला ने पत्रकारों को बताया, ‘‘स्थानीय लोगों ने मुझ पर हमला किया, मेरे बाल खींचे, मेरे कपड़े फाड़ दिए और मुझे गलत तरीके से छुआ, जबकि हमारा बच्चों को अगवा करने वालों से कोई लेना-देना नहीं था।’’

स्थानीय अस्पताल में इलाज के बाद वे दोनों घर लौट गए।

इस घटना पर चिंता जताते हुए बीजू जनता दल अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि इससे ओडिशा में महिलाओं की गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

पटनायक ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘रायगड़ा के कल्याणसिंहपुर में दिल्ली की एक महिला के साथ हुई इस घिनौनी और बर्बर घटना ने पूरे ओडिशा को झकझोर कर रख दिया है, शर्मिंदा किया है और चिंता में डाल दिया है।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए और पूछा कि ओडिशा की छवि क्यों खराब की जा रही है और क्या सरकार और पुलिस प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बेबस है।

बीजद के अन्य नेताओं, जिनमें सांसद सुलता देव और वरिष्ठ महासचिव लेखाश्री सामंतसिंघार शामिल हैं, ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘राज्य में अपनी तरह की यह पहली घटना है। भीड़ की हिंसा के दौरान कभी किसी महिला के कपड़े नहीं उतारे गए। राज्य सरकार को महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।’’

कांग्रेस की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, ‘‘भाजपा शासित ओडिशा में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर कोई अंकुश नहीं है।’’

महिला कांग्रेस की लगभग 2,000 कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रदेश अध्यक्ष मीनाक्षी बाहिनीपति के नेतृत्व में शहर में अनशन शुरू किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति उदासीन रहने का आरोप लगाया।

विरोध प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री भले ही 100 बार ओडिशा का दौरा करें, लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराध और माताओं-बेटियों की गरिमा के प्रति वे उदासीन हैं।’’

विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा सांसद प्रताप सारंगी ने कहा कि पिछली सरकार के विपरीत पुलिस ने इस घटना में तुरंत कार्रवाई की है।

पीड़ित महिला की मदद करने और उसे अपनी टी-शर्ट से ढकने का प्रयास करने वाले बलराम बाग (पेशे से चालक) ने कहा कि उन्होंने लोगों को रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन किसी ने भी उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया।

भाषा संतोष शफीक

शफीक

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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