गिर सोमनाथ: गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुनभाई मोधवाडिया ने रविवार को कहा कि पिछले तीन दिनों में एशियाई शेरों में बेबेसिया संक्रमण का कोई नया संदिग्ध मामला सामने नहीं आया है, जबकि 17 शेर अभी भी निगरानी में हैं.
दिन के दौरान मंत्री ने गिर शेर क्षेत्र में स्थित जामवाला रेस्क्यू सेंटर, बाबरिया वन रेंज और जसाधार एनिमल केयर सेंटर का दौरा किया और संदिग्ध संक्रमण के कारण आठ शावकों की मौत के बाद की स्थिति की समीक्षा की.
उन्होंने कहा, “फिलहाल कुल 17 शेर निगरानी में हैं. पिछले तीन दिनों में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है. इसके अलावा आसपास के इलाकों और उससे लगे क्षेत्रों के शेरों पर भी नजर रखी जा रही है. डॉक्टरों की एक टीम लगातार काम कर रही है.”
संदिग्ध बेबेसिया संक्रमण के कारण शेरों की मौत के मामले गिर अभयारण्य के बाहर राजस्व क्षेत्रों में सामने आए हैं, खासकर गिर सोमनाथ जिले के गिर गढ़डा और अमरेली जिले के बाबरा कोट क्षेत्र में.
बेबेसिया एक परजीवी बीमारी है, जो किलनियों (टिक्स) के जरिए फैलती है और संक्रमित जानवरों में कमजोरी, खांसी और नाक से स्राव जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है.
उन्होंने कहा कि करीब 500 शेरों का कृमिनाशक उपचार और टिक उपचार पहले ही पूरा किया जा चुका है. वन अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान पिछले तीन महीनों से चल रहा है.
प्रक्रिया के बारे में बताते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शेरों के समूहों को रिंग केज में लाकर उन्हें कृमिनाशक और टिक हटाने की दवाएं दी जाती हैं.
गिर (पश्चिम) के उप वन संरक्षक प्रशांत तोमर ने कहा, “जब भी किसी शेर को किसी भी कारण से, चाहे चिकित्सा कारण हो या कोई और, पिंजरे में रखा जाता है, तो उसका कृमिनाशक उपचार किया जाता है. उसे ऐसी दवाएं दी जाती हैं जो शरीर के अंदर और शरीर की सतह पर रहने वाले परजीवियों, दोनों के खिलाफ प्रभावी होती हैं.”
मोधवाडिया ने बाद में एक्स पर फिर कहा कि पिछले तीन दिनों में संदिग्ध संक्रमण के कारण किसी भी शेर की मौत की खबर नहीं मिली है. उन्होंने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए वन विभाग द्वारा उठाए गए “समय पर और प्रभावी कदमों” की भी सराहना की.
उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर वन अधिकारी, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ और फील्ड स्टाफ शेरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं.
मंत्री ने पहले कहा था कि संक्रमण के संभावित फैलाव को रोकने के लिए अधिकारियों ने उन क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले शेरों को अलग कर दिया है, जहां संक्रमण की सूचना मिली थी.
एशियाई शेर, जो कभी एशिया के बड़े हिस्सों में पाए जाते थे, अब केवल गुजरात में बचे हैं, जहां उनकी पूरी जंगली आबादी गिर वन क्षेत्र और उसके आसपास केंद्रित है. यही क्षेत्र उनका आखिरी प्राकृतिक आवास है.
यह भी पढ़ें: नेहरू के लिए साइंस सिर्फ एक उद्योग नहीं था, बल्कि सोचने का तरीका और जीवन जीने का सलीका था