(हेडलाइन में सुधार के साथ)
चंडीगढ़, 19 दिसंबर (भाषा) हरियाणा विधानसभा में शुक्रवार को राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित चर्चा के दौरान सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के कुछ सदस्यों के बीच तीखी बहस के बाद कुछ देर तक शोर-शराबा हुआ।
सदन में आसन के समीप जाकर हंगामा करने और कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद अपनी सीट पर वापस न जाने पर विधानसभाध्यक्ष ने नौ कांग्रेस विधायकों को कुछ देर के लिए निलंबित कर दिया।
चर्चा के दौरान कांग्रेस सदस्यों ने मंत्री अनिल विज की कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और बाद में अपनी सीट पर वापस बैठ गए, लेकिन वे तब फिर से उठ खड़े हो गये और आसन के समीप पहुंच गये जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुछ टिप्पणियां कीं।
चर्चा में भाग लेते हुए, सैनी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला किया तथा उन पर और कांग्रेस पर ‘मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेककर’ राष्ट्र गीत को खंडित करने का आरोप लगाया।
सैनी ने कहा कि नेहरू को तब कड़ा जवाब देना चाहिए था।
बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित इस गीत को 1950 में भारत के राष्ट्र गीत के रूप में अपनाया गया था।
सैनी की टिप्पणी पर विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य कांग्रेस विधायकों ने तुरंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
हुडा ने कहा, ‘‘राष्ट्र गीत पर चर्चा चल रही है। राष्ट्र गीत का अपमान नहीं होना चाहिए।’’
कुछ ही देर में, अन्य कांग्रेस विधायक भी उठ खड़े हो गये और नारे लगाते हुए आसन के समीप पहुंच गये। अध्यक्ष ने उन्हें अपनी सीट पर वापस जाने की बार-बार चेतावनी दी, लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं सुनी। तब अध्यक्ष ने जस्सी पेटवार, विकास सहारन, बलराम डांगी, गीता भुक्कल, शकुंतला खटक, अशोक अरोरा और नरेश सेलवाल समेत नौ विपक्षी विधायकों के नाम घोषित किए।
डांगी, पेटवार, खटक और सेलवाल सदन से बाहर जाने का विरोध कर रहे थे, इसलिए मार्शलों को उन्हें घसीटकर बाहर निकालना पड़ा।
शोर-शराबे के बीच मुख्यमंत्री का भाषण जारी रहा, लेकिन उनकी कही हुई अधिकांश बातें शोरगुल में दब गईं।
मुख्यमंत्री ने तुष्टीकरण की राजनीति को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिये।’’
हुडा ने कहा कि भाजपा सदस्यों द्वारा राष्ट्र गीत पर चर्चा से अप्रासंगिक बातों को उठाए जाने से उन्हें बहुत दुख हुआ है।
संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा ने कांग्रेस सदस्यों से कहा कि मुख्यमंत्री ने केवल ऐतिहासिक तथ्यों का ही उल्लेख किया है और कांग्रेस को इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
ढांडा ने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस शासन के दौरान लगाये गये आपातकाल का जिक्र किया गया है, तो सदन में इस तथ्य का जिक्र होने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
बाद में, हुड्डा ने अध्यक्ष से अनुरोध किया कि नेहरू के जिक्र से कांग्रेस सदस्य आक्रोशित हो गए थे और अब उन्हें वापस बुला लिया जाना चाहिए।
अध्यक्ष ने हुडा से यह आश्वासन मांगा कि वह यह सुनिश्चित करें कि उनकी पार्टी के सदस्य सदन के वेल में जल्दबाजी न करें। उन्होंने कहा ‘आसन के समीप आना एक फैशन बन गया है।’
बाद में सदन के नेता नायब सैनी ने भी अध्यक्ष से अनुरोध किया कि कांग्रेस सदस्यों को वापस बुलाया जाए, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की राय को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार किया और उन्हें वापस बुला लिया।
इससे पहले भाजपा सदस्य घनश्याम दास ने सदन में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा की शुरुआत की थी।
उनके बाद, कांग्रेस सदस्य आदित्य सुरजेवाला ने कहा था कि जब हम वंदे मातरम कहते हैं, तो हम अपनी मातृभूमि को नमन करते हैं।
उन्होंने कहा था कि हम ‘‘सुजलाम सुफलम’’ की बात करते हैं, जिसका तात्पर्य पानी से भरपूर और प्रकृति मां होता है। उन्होंने कहा था कि ऐसे में वह सरकार से ‘‘हमारे सामने आ रही पर्यावरणीय आपदा’’ के सिलसिले में पूछना चाहते हैं कि क्या यह ‘‘हमारी मातृभूमि का सम्मान करना है?’’
सुरजेवाला ने कहा था कि आज, इसी मातृभूमि का पानी सीसा और यूरेनियम से भरा हुआ है, अरावली के 90 प्रतिशत हिस्से को संरक्षित श्रेणी से बाहर कर दिया गया है, हम जंगल काट रहे हैं।
उन्होंने कहा था कि बुजुर्ग प्रदूषित हवा में सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि बच्चे मास्क पहनकर स्कूल जा रहे हैं।
इस पर, परिवहन मंत्री अनिल विज ने हस्तक्षेप करते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और कहा था, ‘‘वंदे मातरम की पवित्रता को धूमिल किया जा रहा है। ये मुद्दे (जल, प्रदूषण आदि) अपने जगह ठीक हैं, लेकिन इन्हें वंदे मातरम से नहीं जोड़ा जा सकता। वंदे मातरम लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। वंदे मातरम का जाप करते हुए लाखों लोगों ने अपनी मातृभूमि के लिए बलिदान दिया। क्या आज हम इसे जल और अन्य मुद्दों से जोड़ेंगे?’’
इस पर कांग्रेस के सदस्य आपत्ति जताते हुए अपने स्थान पर खड़े हो गए।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए विज ने आरोप लगाया कि उन्होंने वंदे मातरम को वह स्थान कभी नहीं दिया जिसका वह हकदार था।
उन्होंने कहा, ‘‘आपने (मोहम्मद अली) जिन्ना के कहने पर वंदे मातरम के दो अंतरे काट दिए थे।’’
हस्तक्षेप करते हुए, विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने याद दिलाया कि वह स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से आते हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम एक राष्ट्र गीत है और विज को उन्हें यह सिखाने की जरूरत नहीं है कि इसका सम्मान कैसे बनाए रखा जाए।
हुड्डा ने पूछा कि क्या वे (भाजपा के नेता) हमें वंदे मातरम का अर्थ सिखाएंगे?
उन्होंने कहा कि 1950 में संविधान सभा द्वारा अपनाए गए राष्ट्र गीत का सम्मान किया जाना चाहिए और इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन से कहा कि विज ने केवल इतना ही कहा था कि राष्ट्र गीत को प्रदूषण और अन्य मुद्दों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
सैनी ने कहा कि वंदे मातरम ने हमें नया मार्ग दिखाया और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में नई ऊर्जा का संचार किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर हुई चर्चा राष्ट्र गीत के प्रति इस सदन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सदन में विज और कुछ कांग्रेस सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई।
कांग्रेस सदस्य बी.बी. बत्रा ने भाजपा सदस्य द्वारा 1975 के आपातकाल के संबंध में की गई कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।
भाषा राजकुमार सुरेश
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