श्रीनगर, 28 अगस्त (भाषा) कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को कहा कि नेपाल की त्रासदी को चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए घाटी की “नाजुक पारिस्थितिकी” की तत्काल रक्षा करने का आह्वान किया।
जामिया मस्जिद में शुक्रवार की नमाज के लिए आए लोगों को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने कहा कि नेपाल और पूरे हिमालयी क्षेत्र में मची तबाही से सभी को गंभीर रूप से चिंतित होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “ये अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं। ये इस बात की चेतावनी हैं कि हिमनदों के ढहने के कारण हमारे पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र कितना नाजुक हो गया है।”
उन्होंने कहा, “हम इस कठिन समय में नेपाल के लोगों के साथ दिल से हार्दिक एकजुटता व्यक्त करते हैं और उन लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं, जिन्होंने अपनी जान गंवायी है। साथ ही, हम उन अनेक लोगों की सुरक्षा और शीघ्र सकुशल वापसी के लिए प्रार्थना करते हैं, जो अब भी लापता हैं तथा सभी प्रभावित लोगों के लिए शक्ति और राहत की कामना करते हैं।”
मीरवाइज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भी उसी नाजुक हिमालयी क्षेत्र का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, “हम पहले से ही अधिक तीव्र बारिश, बादल फटने, अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं देख रहे हैं। जलवायु परिवर्तन निस्संदेह एक प्रमुख कारक है, लेकिन हमें यह भी सवाल करना चाहिए कि कहीं हमारे विकास का मौजूदा तरीका स्थिति को और अधिक खतरनाक तो नहीं बना रहा है।”
भाषा रंजन माधव
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