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Friday, 18 September, 2026
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म्यांमार ट्रेनिंग कैंप केस: अमेरिकी नागरिक वैनडाइक को जमानत, 6 महीने से तिहाड़ में था बंद

यह घटना NIA द्वारा उसके और 6 यूक्रेनी नागरिकों के ख़िलाफ़ UAPA के तहत नहीं, बल्कि इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल करने के लगभग 10 दिन बाद हुई है.

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नई दिल्ली: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दे दी. वैनडाइक उन सात विदेशी नागरिकों में से एक हैं, जिन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों (Ethnic Armed Groups) को ट्रेनिंग देने के लिए वहां जाने के आरोप में गिरफ्तार किया था. वैनडाइक अब तिहाड़ जेल से बाहर आएंगे, जहां उन्हें इस साल मार्च में गिरफ्तारी के बाद से रखा गया था.

यह NIA की ओर से उनके और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल करने के करीब 10 दिन बाद हुआ है. इस चार्जशीट में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) नहीं लगाया गया है.

स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा ने वैनडाइक को 1 लाख रुपये के बॉन्ड और इतनी ही रकम की जमानत पर जमानत दी. उन्होंने यह शर्त भी लगाई कि ट्रेनिंग कैंप का मामला लंबित रहने तक आरोपी देश नहीं छोड़ सकता. NIA की ओर से दाखिल चार्जशीट पर अदालत 1 अक्टूबर को विचार करेगी.

अदालत ने भारत से बाहर जाने की वैनडाइक की अर्जी पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 22 सितंबर तय की है.

जज ने यह भी कहा कि दूसरे सह-आरोपी भी अपनी जमानत अर्जियां, बॉन्ड और जमानत की रकम जमा कर राहत ले सकते हैं.

वैनडाइक और अन्य आरोपी — हुरबा पेट्रो, स्लिविएक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफांकीव मारियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर — को NIA ने मार्च में अलग-अलग एयरपोर्ट और जगहों से कड़े UAPA प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था. हालांकि, पिछले हफ्ते उन पर सिर्फ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए गए. ये दोनों अपराध फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के स्तर पर समझौते के जरिए खत्म किए जा सकते हैं और इनका संबंध अवैध प्रवेश और वीजा नियमों के उल्लंघन से है.

वैनडाइक की ओर से पेश उनके वकील रोहित दांद्रियाल और रोहित गौर ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के समय NIA की ओर से बताए गए आधार और बाद में दाखिल की गई चार्जशीट में काफी अंतर है. उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत अपराधों को समझौते के जरिए खत्म करने की अर्जी पहले ही फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के सामने दाखिल की जा चुकी है और उस पर फैसला होना बाकी है.

NIA की ओर से पेश स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राहुल त्यागी ने दोहराया कि आतंकी आरोपों से जुड़े पहलू पर जांच अभी जारी है और इसे बाद में दाखिल की जाने वाली सप्लीमेंट्री चार्जशीट में शामिल किया जा सकता है.

दिप्रिंट ने पहले बताया था कि एजेंसी ने चार्जशीट में UAPA नहीं लगाया क्योंकि उसे अब तक ऐसे सबूत नहीं मिले हैं कि इन लोगों ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ काम करने वाले सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग देने में कोई भूमिका निभाई थी. इसी वजह से एजेंसी के पास इस मामले की जांच करने का अधिकार भी नहीं रहा.

चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि सातों आरोपियों ने पिछले साल दिसंबर में वैध दस्तावेजों के साथ भारत में प्रवेश किया था और इमिग्रेशन नियमों के तहत जरूरी प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) या रेस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट (RAP) लिए बिना गुवाहाटी और मिजोरम के रास्ते म्यांमार की सीमा पार की थी.

एजेंसी के मुताबिक, वे आखिरकार विक्टोरिया कैंप पहुंचे, जो पिछले कुछ सालों से म्यांमार में विद्रोही सेना के सैन्य मुख्यालय के रूप में काम कर रहा है. NIA ने आरोप लगाया कि वहां इस समूह ने भारत लौटने से पहले जातीय सशस्त्र समूहों के लिए ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन ऑपरेशन, असेंबली और जैमिंग टेक्नोलॉजी की पहले से तय ट्रेनिंग कराई. वे मार्च के पहले हफ्ते में भारत लौटे थे. हालांकि, भारत से बाहर उड़ान भरने से पहले ही उन्हें अलग-अलग एयरपोर्ट पर रोक लिया गया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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