बेंगलुरु/नई दिल्ली: अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार सिविल सेवा की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को मोटिवेशनल भाषण और लेक्चर देने के लिए जाने जाते थे.
उनके भाषणों में अक्सर ‘शायरियां’, दार्शनिक बातें और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में उनकी ऑल इंडिया रैंक का जिक्र होता था. उनकी रैंक 195 थी.
करीब छह साल पहले एक मीडिया समिट में दिए गए ऐसे ही एक भाषण में कर्नाटक के बीदर जिले के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी गंगवार ने कहा था, “आत्मविश्वास और इरादे की बात करें तो वह एक सफलता आपको यह एहसास दिलाती है कि मैं कुछ भी हासिल कर सकता हूं. उसके बाद मुझे किसी मोटिवेशन, किसी अभिभावक या शिक्षक की जरूरत नहीं पड़ी. मेरे अंदर खुद को प्रेरित करने की भावना थी कि अगर मैं इस स्तर तक पहुंच सकता हूं, तो मैं कुछ भी कर सकता हूं.”
अब आज की स्थिति देखिए. आईआईटी-कानपुर से पढ़े गंगवार कथित कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) भर्ती में गड़बड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में हैं.
2016 बैच के IAS अधिकारी गंगवार उस समय KPSC के परीक्षा नियंत्रक थे, जब कथित तौर पर पेपर लीक हुआ. उनकी आखिरी जिम्मेदारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत MSME विभाग के निदेशक की थी.
ईडी के मुताबिक, गंगवार ने कथित तौर पर जनवरी 2026 में 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के लिए हुई परीक्षा का सवालपत्र और उसके जवाब लीक किए. ईडी ने उन्हें 18 सितंबर को गिरफ्तार किया. उस समय वह इसी मामले में पहले से ही अपराध जांच विभाग (CID) की हिरासत में थे.
‘घोटाला’ कैसे सामने आया
जनवरी में पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग में पशु चिकित्सा अधिकारियों के 400 पदों को भरने के लिए प्रतियोगी परीक्षा हुई थी. ईडी के मुताबिक, आरिफ नाम के एक व्यक्ति ने उम्मीदवारों से संपर्क किया और सवालपत्र के जवाब देने के लिए 70 लाख रुपये मांगे.
ऑल कर्नाटक स्टेट स्टूडेंट एसोसिएशन (AKSSA) के अध्यक्ष कांता कुमार ने सबूतों के साथ KPSC कार्यालय का रुख किया. इनमें फोन पर हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग वाली एक पेन ड्राइव भी शामिल थी. इसके बाद उम्मीदवारों और दूसरे संबंधित लोगों की ओर से कई पुलिस शिकायतें दर्ज की गईं, जिससे इस घोटाले का दायरा धीरे-धीरे सामने आया.
भर्ती परीक्षा में 1,400 उम्मीदवार शामिल हुए थे और अगले महीने 329 उम्मीदवारों का चयन हुआ. लेकिन जब KPSC ने पात्रता सूची जारी की, तो उसमें सिर्फ उम्मीदवारों के नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर थे.
कथित बिचौलियों के पास पूरी जानकारी थी. KPSC की एक जांच के मुताबिक, पैसे के बदले OMR उत्तर पुस्तिकाओं में सीधे हाथ से या डिजिटल तरीके से बदलाव किए जाने का भी आरोप है. यानी कथित घोटाला यहीं खत्म नहीं हुआ.
सीआईडी ने 17 सितंबर को गंगवार और अगले दिन कथित बिचौलिए बसवराज कन्नाले को गिरफ्तार किया. इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की. ईडी ने KPSC के अधिकारियों के ठिकानों के साथ-साथ उन सफल उम्मीदवारों के यहां भी तलाशी ली, जो पहले से आयोग की जांच के दायरे में थे.
तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अलग-अलग कागजों के विश्लेषण के आधार पर ईडी ने सवालपत्र लीक करने के तरीके और उससे जुड़े पैसों के लेन-देन को जोड़ना शुरू किया. इसमें गंगवार को मुख्य कड़ी बताया गया.
ईडी की रिमांड अर्जी में कहा गया, “संबंधित संपत्ति प्रबंधक और उम्मीदवारों के बयानों से यह बात सामने आई कि इन जगहों का इस्तेमाल कथित तौर पर लीक सवालपत्र बांटने के लिए किया गया था. आगे की जांच में पता चला कि बसवराज कन्नाले के तत्कालीन KPSC परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के साथ करीबी संबंध थे.”
इसमें कहा गया, “जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री के मुताबिक, गंगवार ने कथित तौर पर 07/01/2026 को HP पेन ड्राइव के जरिए पशु चिकित्सा अधिकारियों की परीक्षा का सवालपत्र और उसके जवाब बसवराज कन्नाले को दिए. कन्नाले ने कथित तौर पर उम्मीदवारों से संपर्क किया. उसने शुरुआत में हर उम्मीदवार से करीब 80 लाख रुपये मांगे और बाद में यह रकम घटाकर 40 लाख रुपये कर दी. उसने बताया कि उसने लीक सवालपत्र देकर नौ उम्मीदवारों की मदद की थी.”
ईडी के मुताबिक, कन्नाले ने परीक्षा से एक दिन पहले उत्तर बेंगलुरु की एक विला में 20 उम्मीदवारों का एक समूह इकट्ठा किया. वहां पेन ड्राइव में उसे दिए गए सवाल उम्मीदवारों के साथ साझा किए गए.
ईडी के मुताबिक, कथित बिचौलिए ने उम्मीदवारों से रिश्वत के तौर पर 1.5 करोड़ रुपये एडवांस में लिए. इसमें से 1.30 करोड़ रुपये नकद गंगवार को दिए गए. ईडी का आरोप है कि कन्नाले से मिले पैसों के एक हिस्से से उसके भाई के नाम पर एक फ्लैट खरीदा गया, जबकि करीब 23 लाख रुपये उसकी मंगेतर के लिए सोने के गहने खरीदने में खर्च किए गए.
गंगवार की हिरासत की मांग करते हुए दाखिल रिमांड अर्जी में ईडी ने आरोप लगाया कि वह 2025 में अपनी भाभी के बैंक खाते में जमा कुल 15.39 लाख रुपये और अपने भाई के बैंक खाते में जमा 10.94 लाख रुपये की नकदी का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके.
ईडी ने कहा कि इन “लेन-देन और संपत्तियों” की “विस्तृत वित्तीय जांच जरूरी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें से कोई हिस्सा अपराध से हुई कमाई है या कथित अवैध रिश्वत के जरिए हासिल या इस्तेमाल किया गया है.”
क्या यह पहली ऐसी घटना है?
ईडी ने ऐसे कई कथित मामलों का दस्तावेजीकरण किया है, जिनमें पैसे एडवांस में लिए गए और बाद में गंगवार को दिए गए, लेकिन ऐसा मामला पहली बार सामने नहीं आया है. न ही जांच के दायरे में सिर्फ यही विभाग है.
जुलाई 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) भर्ती में कथित घोटाले की जांच के लिए जस्टिस (रिटायर्ड) बी. वीरप्पा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी. समिति ने अप्रैल में अपनी रिपोर्ट दी और सीआईडी से आगे जांच की सिफारिश की.
अक्टूबर 2021 में 545 पदों के लिए हुई PSI परीक्षा में कुल 54,041 उम्मीदवार शामिल हुए थे. जुलाई 2022 में नतीजे जारी होने के बाद कई छात्रों ने नंबर दिए जाने के तरीके पर सवाल उठाए. जांच में सामने आया कि कुछ रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों ने बहुत कम सवाल हल किए थे, लेकिन उन्हें बहुत ज्यादा नंबर मिले. इससे बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका बढ़ी.
उस समय विपक्ष में रही कांग्रेस पार्टी ने इस घोटाले को चुनावी मुद्दा बनाया था और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार को निशाना बनाया था. सत्ता में मौजूद कांग्रेस ने मौजूदा जांच में किसी भी गलत काम से इनकार किया है. इसमें अब निलंबित KPSC अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार की कथित भूमिका से भी कांग्रेस ने इनकार किया है.
ईडी के मुताबिक, साहूकार की बेटी सुम को 13 जुलाई 2025 को राज्य की पिछड़ा वर्ग सूची की कैटेगरी 3B के तहत इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ऑफिसर की परीक्षा में बैठाया गया था.
उन्होंने एक आय प्रमाण पत्र जमा किया था, जिसमें उनके परिवार की सालाना आय 40,000 रुपये बताई गई थी. ईडी के मुताबिक, सितंबर 2019 में KPSC सदस्य नियुक्त किए गए साहूकार को 2.05 लाख रुपये का मूल वेतन मिलता था, जो उनके अध्यक्ष बनने के बाद बढ़कर 2.25 लाख रुपये हो गया था.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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