छत्रपति संभाजीनगर, आठ नवंबर (भाषा) महाराष्ट्र के मंत्री एवं शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने रविवार को कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दोनों गुटों का विलय अपने अंतिम चरण में नजर आ रहा है और विभिन्न नेताओं की भूमिकाएं जल्द ही स्पष्ट हो जाएंगी।
शिरसाट ने दीपावली के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में पार्थ पवार और राकांपा (शप) प्रमुख शरद पवार के बीच हुई मुलाकात का जिक्र किया तथा कहा कि राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं।
दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे एवं राकांपा महासचिव पार्थ पवार और राकांपा (शप) के नेताओं ने अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद शरद पवार के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए शनिवार को दक्षिण मुंबई स्थित उनके आवास पर मुलाकात की थी।
राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और राकांपा (शप) प्रमुख शरद पवार की मुंबई के एक अस्पताल में हाल ही में हुई मुलाकात ने दोनों गुटों के संभावित विलय की अटकलों को फिर से हवा दे दी है।
एक वायरल वीडियो में, दोनों नेता 10 नवंबर के बाद एक संभावित बैठक करने पर चर्चा करते दिखाई दिए।
इस बीच, राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि अगर अजित पवार जीवित होते, तो इस साल फरवरी में ही दोनों गुटों का विलय हो गया होता।
राकांपा प्रमुख अजित पवार का जनवरी में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया था।
शिरसाट ने कहा, ‘‘मैंने पहले भी कहा था कि कुछ राजनीतिक घटनाक्रम होंगे और हम उन्हें होते हुए देख सकते हैं। हमें केवल यह देखना है कि किस पार्टी का किसमें विलय होता है। मुझे लगता है कि घटनाक्रम अपने अंतिम चरण में है, और विभिन्न लोगों की भूमिकाएं जल्द ही तय हो जाएंगी।’’
शिरसाट की पार्टी शिवसेना राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में राकांपा की सहयोगी है।
शरद पवार द्वारा स्थापित राकांपा 2023 में तब विभाजित हो गई थी जब पटेल सहित पार्टी नेताओं का एक समूह अजित पवार के नेतृत्व में महायुति में शामिल हो गया था। इसके बाद, अजित पवार गुट को पार्टी का मूल नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किया गया, जबकि शरद पवार के गुट को राकांपा (शरदचंद्र पवार) के रूप में जाना जाने लगा।
प्रफुल्ल पटेल की पवार से मुलाकात उस पृष्ठभूमि में हुई जब राकांपा के वरिष्ठ नेताओं ने अपनी पार्टी प्रमुख सुनेत्रा पवार और उनके बेटों-पार्थ और जय- के बगैर दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।
शाह के साथ यह बैठक उन खबरों के बीच हुई, जिनमें कहा गया था कि राकांपा नेतृत्व पार्टी में पार्थ पवार के बढ़ते प्रभाव से खुश नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि क्या मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) के बीच भी विलय संभव है, शिरसाट ने कहा कि उनकी पार्टी नये लोगों का स्वागत करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई हमारे पास आ रहा है, तो हम उनका स्वागत करेंगे।’’
अपनी पार्टी के दिवाली जनसंपर्क कार्यक्रम के बारे में शिरसाट ने कहा कि उनके नेता और कार्यकर्ता पूरे महाराष्ट्र में लोगों से मिल रहे हैं और उन्हें त्योहार मनाने में मदद करने के लिए आवश्यक सामग्री वितरित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम सरकार के माध्यम से आम लोगों को सहायता प्रदान करते हैं, लेकिन एक पार्टी के रूप में, हम उनसे मिलने भी जा रहे हैं, ताकि उन्हें लगे कि उनके पास अपना कोई है जिसके पास वे जा सकते हैं। हमने उन्हें कुछ सामग्रियां दी हैं, ताकि उनके लिए त्योहार थोड़ा आसान हो सके। ऐसा पूरे राज्य में किया जा रहा है।’’
राज्य में सूखा प्रभावित किसानों को सरकार द्वारा दी जाने वाली 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता पर विपक्ष की आलोचना पर तंज कसते हुए शिरसाट ने कहा कि राजनीतिक दल भी इसी तरह की सहायता देने के लिए स्वतंत्र हैं।
उन्होंने दावा किया, ‘‘पांच हजार रुपये सरकारी सहायता है, और यदि विपक्ष को इससे कोई समस्या है, तो उसे भी ऐसी ही सहायता प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने ‘लाडकी बहिन योजना’ के साथ भी ऐसा ही किया था। उन्हें सहायता देने से किसने रोका था?’’
भाषा सुरेश सुभाष
सुभाष
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.