(ब्रजेन्द्र नाथ सिंह)
नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) पूर्व केंद्रीय मंत्री और शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत ने शिवसैनिकों के लिए ‘‘मातोश्री’’ को श्रद्धा व आस्था का मंदिर करार दिया और दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लाख कोशिश कर ले, वह ना तो शिवसेना को नेस्तनाबूद कर सकेगी और ना ही लोगों के दिलों से बाला साहेब ठाकरे को निकाल पाएगी।
शिवसेना (यूबीटी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने यह भी कहा कि देश में लोकतंत्र व संविधान को बचाने के लिए आगामी लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पराजित करना आवश्यक है और इसके लिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट होना होगा।
उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी पार्टियां अपने-अपने राज्यों में मजबूत हैं, लेकिन भाजपा के बाद राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रमुख मौजूदगी रखने वाली एकमात्र पार्टी कांग्रेस ही है।
‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में सावंत ने यह भी कहा कि भले ही पार्टी का नाम (शिवसेना) और चुनाव चिह्न (तीर-धनुष) उनसे ‘‘छीन’’ लिया गया हो, लेकिन जनता की अदालत में महाराष्ट्र के वर्तमान सत्ताधारी गठबंधन को मुंह की खानी पड़ेगी।
बाला साहब ठाकरे ने 19 जून को 1966 को शिवसेना की स्थापना की थी। मातोश्री ठाकरे परिवार का निवास स्थल है।
ज्ञात हो कि निर्वाचन आयोग ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाले धड़े को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी और चुनावों में तीर-धनुष चिह्न के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।
आयोग के इस फैसले के खिलाफ उद्धव गुट ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
यह पूछे जाने पर कि नाम और चुनाव चिह्न गंवाने के बाद अब तो उद्धव ठाकरे पर बाला साहेब की विरासत भी गंवाने का खतरा मंडरा रहा है, तो सावंत ने पहला हमला मुख्यमंत्री शिंदे पर बोला और साथ ही भाजपा पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा, ‘‘जिस पार्टी ने उन्हें (शिंदे) नाम और शोहरत दिया…इस मुकाम तक पहुंचाया। उस पार्टी के साथ उन्होंने जो व्यवहार किया, उसके लिए गद्दार के अलावा कोई दूसरा शब्द नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि इस ‘‘खेल’’ में भाजपा ने पीछे से प्रमुख निभाई, क्योंकि पहले से ही मकसद शिवसेना को नेस्तनाबूद करने का था।
सावंत ने दावा किया, ‘‘जब बाला साहब ठाकरे जिंदा थे, तब भी भाजपा ऐसे प्रयास करती रहती थी। शिवसेना को कैसे नेस्तनाबूद किया जाए, वे यह कोशिश करते रहे। लेकिन शिवसेना की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि वह कभी इसमें सफल नहीं हो सकती।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव चिह्न ले लिया और नाम छीन लिया, लेकिन लोगों के दिलों में ठाकरे परिवार के प्रति प्रेम है, उसे कभी नहीं छीन सकते।’’
शिंदे पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वह और उनके समर्थित विधायक व सांसद ‘‘बिकाऊ’’ हैं, लेकिन जनता ऐसी नहीं होती।
उन्होंने कहा, ‘‘ठाकरे परिवार के प्रति जनता के मन में श्रद्धा है। वह श्रद्धा कभी खत्म नहीं होती है। जैसे श्रद्धा व आस्था के स्थान होते हैं, वैसे ही मातोश्री है।’’
दक्षिण मुंबई के सांसद सावंत ने कहा कि ठाकरे परिवार के साथ पूरा महाराष्ट्र जुड़ा हुआ है और यह एक ऐसा परिवार है कि वह जो जुबान देगा, तो उस पर खरा उतरेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘यह ऐसा परिवार है, जिसका दिल गरीबों के लिए धड़कता है, उनको न्याय देने की बात करता है, जरूरत पड़ने पर उनके लिए रास्ते पर उतरता है तथा देश के लिए रास्ते पर उतरता है। कुछ भी हो, वे (विरोधी) बाला साहब ठाकरे को नहीं छीन सकते। लोगों के दिलों से उन्हें बाहर नहीं कर सकते।’’
मालूम हो कि निर्वाचन आयोग द्वारा नाम व चुनाव चिह्न शिंदे गुट को दिए जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग को समाप्त किए जाने की बात की थी।
यह पूछे जाने पर कि जब संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है, तो न्याय की उम्मीद कैसे कर रहे हैं, इसपर सावंत ने कहा कि भरोसा तो रखना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘भरोसा है तभी तो हम उच्चतम न्यायालय गए हैं। स्वर्गीय इंदिरा गांधी जैसी बड़ी व ताकतवर नेता के खिलाफ जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय फैसला दे सकता है तो, फिर यह तो उच्चतम न्यायालय है।’’
उन्होंने कहा कि हालांकि, उस वक्त की राजनीति और आज की राजनीति में बहुत फर्क है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज की राजनीति बहुत गंदी है।’’
भाजपा और शिवसेना में अलगाव के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय मंत्रिमरिषद् से इस्तीफा देने वाले सावंत ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार शासन व न्याय व्यवस्था से जुड़ी संस्थाओं को ‘‘अधिग्रहित’’ कर रही है और सरकार की आलोचना करने वालों को उनके जरिए निशाना बना रही है।
उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में बैठे लोगों को तो जनता के सामने एक नजीर पेश करनी चाहिए कि देश की न्यायपालिका पारदर्शी है, किसी के सामने झुकती नहीं है और वह संविधान की रक्षा करती है।
सावंत से जब यह पूछा गया कि मुख्यमंत्री रहते उद्धव ठाकरे का पार्टी में इतने बड़े विद्रोह को भांप न पाना क्या उनकी बड़ी विफलता नहीं थी, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वह सारी चीजों को समझते थे, लेकिन उन्हें कभी नहीं लगा कि वे (शिंदे) इस स्तर तक जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रलोभन और जांच एजेंसियों का भय दिखाने की भाजपा की रणनीति ने इसे और आगे बढ़ाया।
उन्होंने दावा किया कि लोगों में भाजपा और शिंदे गुट को लेकर बहुत गुस्सा है और उन्हें सबक सिखाने के लिए चुनाव का इंतजार कर रही है।
उन्होंने दावा किया ‘‘मुंह की खाने’’ के डर से महाराष्ट्र सरकार महानगरपालिकाओं के चुनाव नहीं करा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘न्यायालयों से भी बड़ी जनता की अदालत होती है।’’
उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस दावे को उन्होंने ध्यान भटकाने का प्रयास करार दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि शिवसेना को बगावत से बचाने के लिए उद्धव ठाकरे ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की पेशकश की थी।
यह पूछे जाने पर क्या भविष्य में उद्धव गुट भाजपा के साथ गठबंधन कर सकता है, सावंत ने जवाब दिया, ‘‘गद्दारों के साथ दोस्ती की है, तो उन्हीं से वह गठबंधन करे।’’
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन के नेतृत्व के सवाल पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक बात तो स्वीकार करनी होगी कि भाजपा के बाद राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रमुख मौजूदगी रखने वाली पार्टी कांग्रेस ही है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस बारे में बोलने वाला मैं पार्टी का छोटा कार्यकर्ता हूं…लेकिन हम (महा विकास आघाड़ी) महाराष्ट्र में ताकतवर हैं, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद बिहार में, अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में। सारे लोग अपने-अपने प्रांतों में मजबूत हैं लेकिन पूरे देश में तो कांग्रेस ही है। आप (आम आदमी पार्टी) अभी पंजाब और दिल्ली में है। वह गुजरात गए थे, क्या हुआ?’’
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सभी को इकट्ठा होने की जरूरत है और उद्धव ठाकरे ने भी यही कहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 1977 में कांग्रेस के खिलाफ सभी पार्टियां एकजुट हुई थीं। इसमें भाजपा भी थी। अबकी बार भाजपा को सत्ता से हटाने व लोकतंत्र व संविधान को बचाने के लिए सभी पार्टियों को एकजुट होना होगा।’’
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ब्रजेन्द्र दिलीप
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