नई दिल्ली: मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया. इसमें पत्रकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास की नागरिकता और पृष्ठभूमि की जांच की मांग की गई है. साथ ही न्यायपालिका के खिलाफ कथित टिप्पणियों को लेकर उनके सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है.
मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की दो जजों की पीठ ने दास, केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा. अदालत ने इस मामले को छह सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है.
तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के गणेश कुमार ने यह याचिका दायर की है. इसका नाम गणेश कुमार बनाम क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी है. कुमार ने दास की पहचान और पृष्ठभूमि की जांच की मांग की है. इसमें उनके माता-पिता से जुड़ी जानकारी भी शामिल है. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि दास ने सार्वजनिक मंचों पर न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के जजों के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां कीं.
याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से दास का पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द करने की मांग की है, अगर जांच में यह सामने आता है कि वह विदेशी नागरिक हैं. याचिका में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को उनके एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट ब्लॉक करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है. साथ ही उन्हें न्यायपालिका के बारे में आगे कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणियां करने से रोकने की मांग की गई है.
सुनवाई के दौरान कुमार की ओर से पेश वकील बी. जगन्नाथ ने पीठ को बताया कि अधिकारियों से शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने दास की पहचान और पतों से जुड़े याचिका के साथ लगाए गए दस्तावेजों का भी जिक्र किया. पीठ ने दस्तावेजों की जांच की और उनमें दी गई जानकारी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा.
वकील ने कहा, “जिस तरह से वह न्यायपालिका के बारे में बोलते हैं… इस तरह से बात नहीं करनी चाहिए.” उन्होंने आगे कहा, “मैंने अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसलिए मैं यह याचिका दायर कर रहा हूं.”
याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय और अन्य अधिकारियों से दास की पृष्ठभूमि और निजी जानकारी की भी जांच करने की मांग की गई है. क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को भी याचिका में पक्ष बनाया गया है, क्योंकि याचिकाकर्ता दास के पासपोर्ट से जुड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है.
दास की नागरिकता और उनकी टिप्पणियों से जुड़े दावे याचिका में लगाए गए आरोप हैं. उनके दस्तावेजों या सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का फैसला आगे की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगा.
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