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Saturday, 18 April, 2026
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विधि आयोग अपने सदस्यों की नियुक्ति में विसंगतियों व देरी से जूझ रहा:अध्ययन

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नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) भारतीय विधि आयोग अपने सदस्यों की नियुक्ति में विसंगतियों व देरी तथा विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले सदस्यों की कमी समेत कई मुद्दों से जूझ रहा है। ‘सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी’ (सीसीएस) द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह दावा किया गया है।

सीसीएस ने शुक्रवार को कहा कि आयोग के गठन में विसंगतियां थीं और इसकी संरचना में सीमित विविधता रही, जिसमें कानूनी क्षेत्र की पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों का वर्चस्व है।

अध्ययन के अनुसार, ”वर्तमान में, सरकार के पास यह तय करने का पूरा अधिकार है कि सदस्य कौन होंगे, कितने होंगे और उनकी सेवा के नियम और शर्तें क्या होंगी। इन निर्णयों की प्रक्रिया का खुलासा नहीं किया गया है।”

इसके मुताबिक, अध्ययन के दौरान कुछ हितधारकों के साथ चर्चा की गई, जिन्होंने इस बात का जिक्र किया कि केवल उन लोगों को ही आयोग में स्थान दिया जाता है, जिन्हें सरकार पुरस्कृत करना चाहती है।

इसमें कहा गया है कि आयोग के अधिकतर सदस्य वकील और पूर्व न्यायिक अधिकारियों सहित कानूनी क्षेत्र से जुड़ी पृष्ठभूमि से हैं। यह स्थिति उस समय भी रही है जब आयोग ने दिवाला और कॉरपोरेट कानून से संबंधित मुद्दों की समीक्षा की है।

अध्ययन में कहा गया कि ऐसे में आयोग अर्थशास्त्र जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों से प्राप्त होने वाली विविधतापूर्ण विशेषज्ञता का लाभ प्राप्त करने में विफल रहता है।

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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