नई दिल्ली: मणिपुर में कुकी और नागा समुदायों के बीच बंधक संकट शुरू होने के एक हफ्ते से ज्यादा समय बाद भी, 44 लोगों में से 20 लोग अब तक लापता हैं. सुरक्षा अधिकारियों के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि रोज बातचीत होने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल पाया है.
सूत्रों के अनुसार, अब भी लापता लोगों में 14 कुकी नागाओं के कब्जे में हैं. वहीं 6 नागा या तो अभी भी कुकी समुदाय के पास हैं या उनका पता नहीं चल पाया है. दोनों समुदाय एक-दूसरे के दावों को गलत बता रहे हैं.
एक सूत्र ने कहा. “बातचीत जारी है. लगातार कोशिशों और कई दौर की मध्यस्थता और बातचीत के बाद दोनों समुदायों ने कई लोगों को रिहा किया है, लेकिन अभी भी 20 लोग बाकी हैं और बातचीत चल रही है.”
चर्च नेताओं, समुदाय के प्रतिनिधियों और सुरक्षा बलों के अधिकारियों की रोज बैठक हो रही है ताकि समाधान निकाला जा सके. सूत्र ने कहा. “दोनों समुदायों के सदस्य, चर्च नेता, सुरक्षा बलों के प्रतिनिधि, सभी लगे हुए हैं और रोज बैठक कर रहे हैं. हां, स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, लेकिन आगे किसी भी टकराव को रोकने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है.”
छह लापता नागा
छह नागाओं को लेकर विवाद ही इस गतिरोध की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है.
समुदाय संगठन यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) का कहना है कि उसके 18 लोगों को कुकी समुदाय ने पकड़ा था, जिनमें से 12 लोगों को छोड़ दिया गया. इनमें तीन दंपतियों की पत्नियां भी शामिल थीं. उनके पति अब भी लापता छह लोगों में शामिल हैं.
UNC की वर्किंग कमेटी के सचिव ए.सी. थोत्सो ने कहा. “कुकी समुदाय द्वारा अगवा किए गए 18 नागाओं में तीन दंपति थे. जबकि 12 लोगों को छोड़ दिया गया, जिनमें उन दंपतियों की पत्नियां भी थीं, लेकिन उनके पति अब भी लापता छह लोगों में शामिल हैं. हमें डर है कि उन्हें मार दिया गया है और उनके शव कुकी नेशनल फ्रंट के पास हैं.”
कुकी समुदाय ने इन आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि उन्होंने 15 मई को 14 नागाओं को छोड़ने के बाद किसी और को नहीं रखा है और उन्हें किसी अन्य व्यक्ति के बारे में जानकारी नहीं है.
थोत्सो ने कहा कि नागा स्वयंसेवकों ने 14 कुकी लोगों को “हिरासत” में रखा है और उन्हें तभी छोड़ा जाएगा जब छह लापता नागाओं का पता चल जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और पुलिस ने दोनों समुदायों से कई दौर की बातचीत की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. उन्होंने पुलिस पर सिर्फ दिखावा करने का आरोप भी लगाया.
उन्होंने कहा. “हम पुलिस और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया से बेहद निराश हैं. पुलिस सिर्फ दिखावे के लिए सर्च ऑपरेशन कर रही है, लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला. हमारे लोगों को कुकी समुदाय ने हाई सिक्योरिटी इलाके से अगवा किया, लेकिन किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई.”
ऊपर बताए गए सुरक्षा सूत्र ने भी कहा कि छह लोगों की तलाश जारी है. सूत्र ने कहा. “उन्हें खोजने की कोशिश जारी है.”
कुकी पक्ष की बात
कुकी-जो समुदाय के संगठन कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (COTU) के प्रवक्ता लुन किपगेन ने कहा कि हिरासत में रखे गए 14 कुकी लोगों को सौदेबाजी का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कुकी समुदाय की परेशानियों पर बराबर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
किपगेन ने कहा. “सितंबर के आखिरी हफ्ते में उखरूल में पूरे कुकी गांवों को कथित तौर पर तांगखुल समुदाय ने जला दिया था, जिससे सैकड़ों कुकी लोग बेघर हो गए. फिर पिछले बंधक संकट के दौरान, दो कुकी लोग जो गांव के पानी के रास्तों की मरम्मत करने गए थे, लापता हो गए. इसके बाद कुकी गांव के स्वयंसेवकों ने 21 नागाओं को हिरासत में लिया. लेकिन जब 21 नागाओं को छोड़ दिया गया, तब दो लापता कुकी मृत पाए गए.”
उन्होंने नागा समूहों के अंदर बढ़ती दरारों की ओर भी इशारा किया.
उन्होंने कहा. “नागा ईस्टर्न फ्लैंक के चार कैडरों को कथित तौर पर एनएससीएन-आईएम ने उखरूल में मार दिया था और नागा भूमिगत समूहों के बीच तनाव बना हुआ है, जिसका दोष कुकी समुदाय पर लगाया जा रहा है. उखरूल के टी कासोम में दो नागा भी मारे गए, जिसके बाद तांगखुल समूहों ने कथित तौर पर दूसरे नागा कबीलों से कुकी समुदाय के खिलाफ एकजुट होने की अपील की. इन सब बातों को पूरे संदर्भ में देखना चाहिए. हम नागाओं के खिलाफ नहीं हैं.”
नागा ईस्टर्न फ्लैंक, उग्रवादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम-इसाक-मुइवाह (NSCN-IM) का एक क्षेत्रीय सैन्य कमांड है. तांगखुल एक नागा जनजाति है.
किपगेन ने यह भी कहा कि पिछले हफ्ते तीन चर्च नेताओं और उनके ड्राइवर की हत्या करने वालों की पहचान अब तक पुलिस नहीं कर पाई है. उन्होंने इसे “बेहद निराशाजनक और बिल्कुल भरोसा न दिलाने वाला” बताया.
मौजूदा बंधक संकट तब शुरू हुआ जब थाडो बैपटिस्ट एसोसिएशन (TBA) के तीन कुकी चर्च नेताओं और उनके ड्राइवर की हत्या कर दी गई. उनकी गाड़ी पर कांगपोकपी जिले में कोटलेन और कोटजिम गांवों के बीच इंफाल-तामेंगलोंग हाईवे पर हमला हुआ था. यह लोग चुराचांदपुर में TBA सम्मेलन में शामिल होकर लौट रहे थे, तभी कथित तौर पर नागा उग्रवादी संगठन जेलियांगरोंग यूनाइटेड फ्रंट (ZUF) ने गोलीबारी की. इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
पिछले तीन महीनों में कुकी और नागा समुदायों के बीच झड़पें बढ़ गई हैं. दोनों पक्षों ने बंधक बनाए जाने, आगजनी और हमलों की घटनाओं की जानकारी दी है.
मणिपुर 2023 से जातीय हिंसा में फंसा हुआ है, जब राज्य में समुदायों के बीच झड़पें शुरू हुई थीं. शुरुआत में यह हिंसा हिंदू मैतेई और ईसाई कुकी-जो समुदायों के बीच थी, लेकिन बाद में इसमें राज्य के लगभग सभी दूसरे समुदाय भी शामिल हो गए. तब से अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग बेघर हो चुके हैं.
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