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Monday, 26 October, 2026
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प्रधानमंत्री मोदी पर खरगे की टिप्पणी राहुल गांधी की राजनीतिक संस्कृति को दर्शाती है: जदयू

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नयी दिल्ली, 26 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री एवं जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की आलोचना करते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि विपक्षी नेता ने बार-बार राजनीतिक मर्यादा की सभी सीमाएं लांघी हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष की ‘‘मानसिक स्थिति ठीक नहीं है’’।

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा ने भी आरोप लगाया कि खरगे राहुल गांधी की ‘‘राजनीतिक संस्कृति’’ को प्रतिबिंबित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टिप्पणियां जानबूझकर की गईं और इनके पीछे हताशा है।

खरगे ने रविवार को ‘‘मोदी का बाप भी जाएगा’’ टिप्पणी करके सियासी विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने यह टिप्पणी एक व्यक्ति के उस दावे के जवाब में कही थी, जिसमें उसने कहा था कि प्रधानमंत्री कहीं नहीं जाएंगे।

खरगे ने कथित विवादित बयान पटना में बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिया था।

सिंह ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में सवाल उठाया कि इतने वरिष्ठ राजनीतिक पद पर बैठा कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकता है।

जदयू नेता ने कहा, ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष ने बार-बार मर्यादा की सारी हदें पार कर दी हैं; उन्होंने कोई ऐसी सीमा नहीं छोड़ी जिसे उन्होंने पार न किया हो।’’

सिंह ने कहा, ‘‘इसके केवल दो ही कारण हो सकते हैं: या तो उम्र का असर उन पर हो रहा है, या फिर वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? ऐसी बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती।’’

जदयू नेता ने 1974 के आंदोलन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ हुए राजनीतिक विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों ने उनकी सरकार के खिलाफ लड़ाई तो लड़ी, लेकिन उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने से परहेज किया।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस के नेता भी इस देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। 1974 के आंदोलन के दौरान, लोगों ने इंदिरा गांधी के शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, लेकिन किसी ने भी उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया। इन लोगों को क्या हो गया है?’’

सिंह ने मोदी पर बार-बार हमले करने को लेकर कांग्रेस की आलोचना की और दरभंगा में एक रैली के दौरान मोदी की मां के लिए कथित तौर पर अपशब्द कहे जाने से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया।

जदयू नेता ने कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी लगातार ऐसी कोशिशें कर रही है। राहुल गांधी दरभंगा में एक रैली करने गए थे, जहां उन्होंने एसआईआर (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) के खिलाफ बात की और वहां मोदी जी की मां के लिए अपशब्द कहे गए। एक बार तो उन्होंने प्रधानमंत्री को चोर तक कह दिया। यह क्या है? कांग्रेस पार्टी ने तो सारी हदें पार कर दी हैं।’’

सिंह ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर तंज कसते हुए कहा कि जनता विपक्षी पार्टी को सत्ता में लौटने का मौका नहीं दे रही है और उसका राजनीतिक प्रभाव लगातार कम होता जा रहा है।

ललन सिंह ने कहा, ‘‘अगर कभी दुर्भाग्यवश लोगों ने उन्हें मौका दे दिया, तो राहुल गांधी देश को उस स्थिति से भी बदतर हालात में पहुंचा देंगे, जो इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान देखने को मिली थी।’’

उन्होंने राजनीतिक चर्चाओं के मानकों को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का विरोध करना उचित है, लेकिन ऐसा बुनियादी शिष्टाचार की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

जदयू नेता ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष भाषा के चयन में राहुल गांधी का अनुसरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी एक-दूसरे के पूरक हैं। शायद पार्टी को लगा कि राहुल गांधी एक बहुत बड़े नेता बन गए हैं, और चूंकि वह ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए पार्टी को भी ऐसा ही करना चाहिए। इनमें आत्म-संयम नाम की कोई चीज ही नहीं है।’’

झा ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह पूरी तरह से हताशा है। खरगे जी के बोलने का तरीका देखिए। यह कोई अनजाने में कही गई बात नहीं थी; बल्कि जानबूझकर कही गई थी। इससे पता चलता है कि उनकी सोच क्या है और राहुल गांधी के नेतृत्व में किस तरह की नयी राजनीतिक संस्कृति पनपी है। वे इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं।’’

उन्होंने पूर्व के कथित विवादित बयानों का संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘जनता सबकुछ देख रही है। उन्हें (विपक्ष को) यह समझना चाहिए कि जनता ने प्रधानमंत्री को वोट दिया है और उन्हें लगातार तीसरी बार चुना है। इस देश में कांग्रेस का बचा ही क्या है? यह और कुछ नहीं, बल्कि हताशा है।’’

झा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता इसलिए माफी नहीं मांग रहे हैं क्योंकि उन्होंने ये बातें जानबूझकर कही हैं और वे अपनी कही गई बातों पर यकीन भी रखते हैं।

जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष ने कांग्रेस पर आरोप लगाया, ‘‘वे अपनी पार्टी में लोगों को इसी तरह की भाषा सिखाते हैं। उनके कार्यकर्ता ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल करते हैं, और उनके नेता भी ऐसा ही करते हैं।’’

झा ने कहा, ‘‘कांग्रेस की मौजूदा हालत और जिस तरह की भाषा का वह इस्तेमाल कर रही है, उसे देखते हुए मुझे लगता है कि देश की जनता अगले 100 साल में भी उसे मौका नहीं देगी।’’

भाषा धीरज नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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