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Wednesday, 19 August, 2026
होमदेश22 परीक्षाएं रद्द होने के बाद झारखंड छात्रों ने 2 महीने के लिए आंदोलन स्थगित किया

22 परीक्षाएं रद्द होने के बाद झारखंड छात्रों ने 2 महीने के लिए आंदोलन स्थगित किया

छात्र नेता रवींद्र पासवान का कहना है कि JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने अपने विरोध प्रदर्शन को दो महीने के लिए रोकने का फ़ैसला किया है, ताकि झारखंड सरकार को अपने वादों पर कार्रवाई करने का समय मिल सके.

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नई दिल्ली: भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ 29 जुलाई से प्रदर्शन कर रहे झारखंड के छात्रों ने बुधवार को अपने आंदोलन को दो महीने के लिए रोकने का ऐलान किया. इसके एक दिन पहले हेमंत सोरेन सरकार ने पहले की 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया था, छह परीक्षाओं को उन परीक्षाओं को कराने वाली एजेंसियों की जांच पूरी होने तक रोक दिया था और 17 परीक्षाओं को CID की जांच के दायरे में रखा था.

बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा, “आज हमारे प्रदर्शन का 26वां दिन है. छात्रों के आंदोलन के नतीजे में राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हमारी मांगें माननी पड़ीं. हमारी परीक्षा सुधार की मांग दूसरी ही बैठक में मान ली गई थी, लेकिन आज परीक्षाओं को रद्द करने की हमारी सभी मांगें भी मान ली गई हैं. मैं परीक्षाओं को रद्द कराने का श्रेय झारखंड के सभी छात्रों और युवाओं को देना चाहता हूं, क्योंकि आपने अनुशासन के साथ प्रदर्शन किया और अपनी मांगें रखीं. हमने 22 परीक्षाएं रद्द कराईं. यह हम सभी की बड़ी जीत है.”

इसके बाद उन्होंने ऐलान किया कि JPSC-JSSC Reform Manch ने अपने प्रदर्शन को दो महीने के लिए रोकने का फैसला किया है. इससे राज्य सरकार को अपने वादों पर काम करने का समय मिलेगा.

उन्होंने कहा, “हमें लगा कि अगर मुख्यमंत्री खुद इतने बड़े स्तर पर इतनी सारी परीक्षाओं को खुले तौर पर रद्द करने की कोशिश कर रहे हैं, तो उनकी नीयत छात्रों के हित में है. हम प्रदर्शन खत्म नहीं कर रहे हैं, सिर्फ फिलहाल इसे रोक रहे हैं. इन दो महीनों में हमारी मांग है कि सरकार हमारी 100 फीसदी मांगें पूरी करे, परीक्षा माफिया को सामने लाए और अब तक रद्द नहीं की गई सभी परीक्षाओं को रद्द करे. अगर इन दो महीनों में हमें लगा कि सरकार छात्रों के साथ नहीं है, तो दो महीने बाद प्रदर्शन फिर शुरू किया जाएगा और वह प्रदर्शन इससे कहीं ज्यादा मजबूत होगा.”

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सोमवार रात जश्न का माहौल देखने को मिला था. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (JSSC CGL) परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया था. यह छात्रों की एक बड़ी मांग थी. इसके अलावा टेस्टिंग कंपनी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) की ओर से कराई गई सभी परीक्षाओं को भी रद्द कर दिया गया था.

छात्र नेता और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा पार्टी के सदस्य देवेंद्र नाथ महतो ने सोमवार को 16 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी थी. उस समय झारखंड की मंत्री दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी भी मौजूद थे. दो और छात्रों, राहुल क्रांति और उम्मे हबीबा ने भी उसी दिन अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी थी.

बाकी दो छात्रों, 30 वर्षीय रूपेश कुमार पाल और 28 वर्षीय सबिता कुमारी ने बुधवार को अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी.

झारखंड सरकार ने मंगलवार को परीक्षा सुधार को लेकर भी एक नोटिफिकेशन जारी किया. नोटिफिकेशन में कहा गया है, “झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (JSSC) की ओर से कराई गई मौजूदा और पिछली परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर मिली शिकायतों, CID/SIT की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों, सरकार के सामने रखी गई जानकारी और अलग-अलग माध्यमों से मिले सुझावों को देखते हुए परीक्षा सुधार की जरूरत पैदा हुई है.”

इसमें कहा गया है कि मंत्रिपरिषद ने फैसला किया है कि JPSC/JSSC में गड़बड़ी और गलत कामों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए हाई कोर्ट से फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का अनुरोध किया जाएगा. इसके अलावा JPSC/JSSC में एक आंतरिक मॉनिटरिंग सेल भी बनाया जाएगा.

परीक्षा सुधारों का व्यापक अध्ययन करने के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनाई जाएगी. इसमें एक प्रतिष्ठित संस्थान के निदेशक के साथ दूसरे अधिकारी भी सदस्य होंगे. इस कमेटी को अगले दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी.

2023 से 2026 के बीच निकाली गई कुल 22 परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं. इनमें से 19 परीक्षाएं “झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से कराई जा रही मौजूदा परीक्षाओं और TDPL के जरिए कराई गई परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतों के मद्देनजर” रद्द की गई हैं. दो और परीक्षाएं इसलिए रद्द की गईं क्योंकि उनका कुछ हिस्सा TDPL या दूसरी विवादित एजेंसियों ने कराया था.

2024 से 2025 के बीच निकाली गई छह परीक्षाओं को रोक दिया गया है. नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इन परीक्षाओं का शुरुआती काम TDPL के अलावा किसी दूसरी एजेंसी ने किया था. लेकिन राज्य सरकार ने शुरुआती परीक्षा से जुड़ी एजेंसी की साख की जांच CID को सौंप दी है.

2010 से 2022 के बीच निकाली गई 17 परीक्षाओं को “संभावित गड़बड़ियों” की जांच के लिए CID के दायरे में रखा गया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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