नई दिल्ली: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं एक बार फिर न्यायालय ने खारिज कर दीं. राज्य सरकार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मामले में शुरू से ही त्वरित और सख्त कार्रवाई की गई.
सरकार के मुताबिक, घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित की गई. आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई हुई. जांच में करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान और अहम साक्ष्य शामिल थे.
सरकार ने दावा किया कि मजबूत अभियोजन के चलते आरोपियों की जमानत अर्जियां लगातार खारिज होती रहीं और अंततः दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली. अंकिता के माता-पिता की मांग पर तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गए. परिवार की सीबीआई जांच की मांग पर सरकार ने जांच के आदेश भी दिए.
परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता के साथ अंकिता के भाई और पिता को नौकरी भी दी गई.
सरकार ने कांग्रेस और अन्य संगठनों पर ‘VIP’ के मुद्दे को लेकर बिना ठोस सबूत आरोप लगाकर मामले का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. सरकार ने कहा कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली हो, उसे कानून के तहत कठोर सजा दिलाई जाएगी.