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Sunday, 10 May, 2026
होमदेशजनकपुरी स्कूल दुष्कर्म: आरोपी की जमानत को HC में चुनौती देगी पुलिस, पिता ने लापरवाही का लगाया आरोप

जनकपुरी स्कूल दुष्कर्म: आरोपी की जमानत को HC में चुनौती देगी पुलिस, पिता ने लापरवाही का लगाया आरोप

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उत्पीड़न और धमकाने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि जांच निष्पक्ष, पेशेवर और तटस्थ तरीके से की गई थी.

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नई दिल्ली: दिल्ली के जनकपुरी इलाके के एक निजी स्कूल में कथित तौर पर दुष्कर्म का शिकार हुई 3 साल की बच्ची के पिता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने मदद नहीं की, जिसकी वजह से मेडिकल जांच में देरी हुई.

आरोपी ललित कुमार को 1 मई को गिरफ्तार किया गया था और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. हालांकि, 7 मई को उसे कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी गई और 20,000 रुपये के जमानती बॉन्ड भरने को कहा गया.

पुलिस अब दिल्ली हाई कोर्ट में जमानत पर रोक लगाने की अपील दायर करेगी. पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त दराडे शरद भास्कर ने रविवार को दिप्रिंट से इसकी पुष्टि की.

DCP ने कहा, “अभियोजन पक्ष ने अदालत में जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया था. हालांकि अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी.” उन्होंने कहा, “जमानत आदेश का विस्तार से अध्ययन किया जा रहा है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.”

इससे पहले DCP ने कहा था कि 1 मई को जनकपुरी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) यानी दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था.

यह मामला बच्ची की मां की शिकायत पर दर्ज हुआ था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि स्कूल समय के दौरान एक पुरुष स्कूल कर्मचारी ने बच्ची का यौन शोषण किया.

आरोपी स्कूल में क्लर्क है और पिछले 30 साल से वहां काम कर रहा है. DCP ने कहा, “अदालत में बयान दर्ज कराया गया. कानून के मुताबिक CCTV और DVR फुटेज समेत अन्य सबूत जब्त किए गए.”

‘पुलिस की निष्क्रियता’

बच्ची के पिता, जो प्रॉपर्टी डीलर हैं, ने दिप्रिंट को बताया कि यह घटना बच्ची के स्कूल के दूसरे दिन हुई.

उन्होंने कहा, “मेरी बेटी पहली बार 28 अप्रैल को स्कूल गई थी. उसके बाद वह बीमार हो गई. फिर 30 अप्रैल को दोबारा स्कूल गई. घर आकर सो गई. उसने हमें कुछ नहीं बताया. जब वह उठी तो उसने बताया कि उसके साथ क्या हुआ. उसने बताया कि स्कूल में किसने उसे छुआ और उसे दर्द हो रहा था. उसे टॉफी देकर स्कूल के बेसमेंट में ले जाया गया था.” यह कहते हुए पिता भावुक हो गए.

उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन से शिकायत करने पर भी कोई मदद नहीं मिली. “प्रिंसिपल ने हमारी बात नहीं सुनी. उन्होंने केयरटेकर से भी सवाल नहीं किया…”

पिता ने आरोप लगाया कि जब वे पुलिस के पास गए, तो पुलिस इस बात में समय लगाती रही कि मामला किस जिले में आता है.

उन्होंने कहा, “हम लगातार इधर-उधर भागते रहे. पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र को लेकर भ्रम था. पुलिस ने हमारी मदद नहीं की.”

जब परिवार जनकपुरी पुलिस स्टेशन पहुंचा, तो बच्ची से आरोपी की पहचान करने को कहा गया. पिता ने कहा कि उनकी बेटी द्वारा आरोपी की पहचान करने के बाद गिरफ्तारी हुई.

उन्होंने कहा, “हमें बहुत भागदौड़ करनी पड़ी ताकि हमारी शिकायत सुनी जाए और पुलिस उसे खारिज न कर दे.” उन्होंने यह भी कहा कि पूछताछ के दौरान बच्ची और परिवार को कई घंटों तक पुलिस स्टेशन में इंतजार कराया गया.

हालांकि DCP भास्कर ने कहा कि जांच “वैज्ञानिक सबूतों, फोरेंसिक जांच, गवाहों के बयान और मामले की परिस्थितियों के आधार पर निष्पक्ष, पेशेवर और बिना पक्षपात के” की गई.

पुलिस द्वारा परेशान करने और डराने के आरोपों पर DCP ने कहा कि ये आरोप गलत, बेबुनियाद और जांच के वास्तविक तथ्यों के खिलाफ हैं.

उन्होंने कहा, “पूछताछ के दौरान शिकायतकर्ता और बच्ची को आरामदायक और बच्चों के अनुकूल माहौल दिया गया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें सिर्फ कानूनी पूछताछ और काउंसलिंग के लिए बुलाया गया था.”

अदालत की टिप्पणी

7 मई के आदेश में द्वारका कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहित गुलिया ने कहा, “यह दिखाया गया है कि आरोपी सुबह करीब 8:37 बजे स्कूल के जूनियर विंग से बाहर गया था और उसके बाद वापस नहीं लौटा. साथ ही आरोपी ने पुलिस बुलाने पर जांच में सहयोग किया.”

आदेश में कहा गया कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है जिससे लगे कि आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था या जांच में हस्तक्षेप कर रहा था.

जांच अधिकारी ने माना कि कथित अपराध स्थल की जांच क्राइम टीम ने की थी और CCTV कैमरों के DVR समेत जरूरी सामान जब्त किए गए हैं. आदेश में कहा गया, “इसके अलावा जूनियर विंग के शिक्षकों से भी पूछताछ की गई है.”

न्यायाधीश ने आदेश में कहा, “ऊपर बताए गए तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह साफ है कि आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखने की जरूरत नहीं है. इसलिए मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना आरोपी ललित कुमार को जमानत दी जाती है.”

जब आरोपी को जमानत मिली, उस समय बच्ची के पिता अदालत में मौजूद थे.

उन्होंने कहा, “जब अदालत ने जमानत दी, तो मुझे लगा जैसे सारी उम्मीद खत्म हो गई. ऐसा लगा कि हम अपनी बच्ची के लिए जो लड़ाई लड़ रहे थे, वह हार गए. जिसने हमारी बेटी के साथ यह किया, वह बाहर है. हम अदालत में इंसाफ मांगने आए थे, लेकिन अब देखिए हम कहां हैं. सरकार कहती है ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, लेकिन हमारी बेटियों को कौन बचाएगा?”

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि अब मेरे पास अपनी बेटी को स्कूल भेजने की हिम्मत है. स्कूल बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित जगह माना जाता था, लेकिन इस घटना ने हमें जिंदगी भर के लिए सदमे में डाल दिया है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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