नयी दिल्ली, 26 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा से जुड़े कई नियमों के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय का रुख किए जाने के बाद सोमवार को केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नयी दिल्ली के सत्ता प्रतिष्ठान को कोई ‘‘महीन संदेश’’ दे रहे हैं।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय में मोदी सरकार को चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) संविधान का उल्लंघन कर रहा है।
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को अचानक उस आक्रोश का अहसास हुआ है, जो मोदी सरकार की पहचान रहा है।’’
उन्होंने कहा कि जब विपक्ष शासित राज्य मोदी सरकार द्वारा उनके अधिकार ‘‘बेशर्मी और खुले तौर पर हड़पे जाने’’ के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, तब फडणवीस और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शासित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री पूरी तरह चुप थे।
उन्होंने खनिज एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 तथा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) अधिनियम, 2026 का भी उल्लेख किया।
रमेश ने कहा कि राजग शासित राज्य तब भी पूरी तरह चुप रहे जब मनरेगा में निहित उनके तथा पंचायतों के अधिकारों को ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ के जरिये कमजोर किया गया।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री नयी दिल्ली के सत्ता प्रतिष्ठान को कोई महीन संदेश दे रहे हैं?’’
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने हाल में खाद्य सुरक्षा से जुड़े कई नियमों के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया है। याचिका में दावा किया गया है कि एफएसएसएआई ने असंवैधानिक तरीके से समानांतर प्रवर्तन व्यवस्था स्थापित की है, जिससे राज्य सरकार के अधिकारों का अतिक्रमण हो रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने उच्च न्यायालय से इन कथित असंवैधानिक संशोधनों और नियमों को रद्द करने तथा मई 2023 के उस आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया है, जिसमें राज्य अधिकारियों को केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त इकाइयों के निरीक्षण से प्रतिबंधित किया गया था।
भाषा हक मनीषा
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