नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के अनुसंधानकर्ताओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए एक नई प्रौद्योगिकी विकसित की है, जिस पर मौजूदा प्रौद्योगिकी की तुलना में करीब आधी लागत आएगी। साथ ही, इससे दो पहिया और चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में काफी कमी लाने में मदद मिल सकती है।
अनुसंधान टीम के अनुसार, आईआईटी (बीएचयू) में प्रयोगशाला स्तर पर इसे पहले ही विकसित किया जा चुका है और उन्नयन तथा वाणिज्यिकरण प्रगति पर है।
टीम ने किसी कंपनी का नाम बताए बिना कहा कि देश में इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली एक प्रमुख कंपनी ने इस नई प्रौद्योगिकी में दिलचस्पी दिखाई है और वह पूर्ण वाणिज्यिक उत्पादन करने को तैयार है, जो मौजूदा इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू की जा सकती है।
आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी भुवनेश्वर के विशेषज्ञों के सहयोग से वाराणसी स्थित आईआईटी (बीएचयू) में इस प्रौद्योगिकी को विकसित किया गया है।
आईआईटी (बीएचयू) में मुख्य परियोजना अन्वेषक राजीव कुमार सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा से कहा, “देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें आम आदमी के लिए चिंता का विषय हैं। पेट्रोलियम उत्पादों पर बढ़ती लागत और प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पारंपरिक आईसी (आंतरिक दहन) इंजनों के सबसे अच्छे विकल्प हैं।”
उन्होंने कहा, “ अधिक विद्युत क्षमता वाले ‘ऑफ बोर्ड चार्जिंग’ अवसंरचना के अभाव के चलते वाहन निर्माता वाहन में ‘ऑन बोर्ड चार्जर’ लगाने को मजबूर हैं।”
सिंह ने कहा कि वाहन मालिक अपने वाहन को किसी स्थान से जाकर चार्ज करते हैं, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों का परिचालन बहुत महंगा हो जाता है, लेकिन नई प्रौद्योगिकी से लागत में 40-50 फीसदी तक कमी आएगी, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत घट जाएगी।
आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रमोद कुमार जैन ने कहा कि इस प्रौद्योगिकी से चार्जिंग अवसंरचना में सुधार होगा और इससे भारतीय सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों को उतारने में सरकार के मिशन में मदद भी मिलेगी।
भाषा
नोमान सुभाष
सुभाष
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.