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Wednesday, 14 October, 2026
होमदेशहिट-एंड-रन में पति की मौत, 9 साल बाद भी मुआवजे का इंतज़ार, कोर्ट के आदेश से जगी उम्मीद

हिट-एंड-रन में पति की मौत, 9 साल बाद भी मुआवजे का इंतज़ार, कोर्ट के आदेश से जगी उम्मीद

हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से जानकारी मांगी है कि 2022 की मुआवजा योजना के तहत कितने मामलों का फैसला हो चुका है और जिन मामलों में फैसला हो गया है, उनमें मुआवजे के भुगतान की क्या स्थिति है.

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चंडीगढ़: हरियाणा के सोनीपत जिले में हिट-एंड-रन हादसे में पति की मौत के नौ साल बाद भी पुष्पा मुआवजे का इंतज़ार कर रही हैं. उनके पति रघबीर की 19 नवंबर 2017 को मौत हो गई थी. जीटी रोड पर एक मॉल के पास किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी और वहां से भाग गया. उस वाहन का कभी पता नहीं चल पाया.

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत बनाई गई सोलैटियम योजना, 1989 के तहत, हिट-एंड-रन हादसों के उन पीड़ितों को मुआवजा दिया जाता था, जिनमें हादसा करने वाले वाहन की पहचान नहीं हो पाती थी. इस योजना के तहत मौत होने पर 25,000 रुपये और गंभीर चोट लगने पर 12,500 रुपये मुआवजा मिलता था. इस योजना की जगह हिट-एंड-रन मोटर हादसों के पीड़ितों के लिए मुआवजा योजना लागू की गई. यह 1 अप्रैल 2022 से लागू हुई. इसके तहत मौत होने पर मुआवजे की राशि बढ़ाकर 2 लाख रुपये और गंभीर चोट लगने पर 50,000 रुपये कर दी गई.

सोनीपत मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 31 मई 2019 को पुष्पा की मुआवजे की याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद यह मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा. 28 सितंबर को जस्टिस हर्ष बुंगर ने पंजाब और हरियाणा सरकारों के साथ-साथ चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया कि वे 30 सितंबर 2026 तक 2022 की योजना के तहत दर्ज हिट-एंड-रन मामलों का आंकड़ा पेश करें.

इस आंकड़े में बताया जाना चाहिए कि कितने मामलों का फैसला हो चुका है, कितने मामले अब भी लंबित हैं और जिन मामलों में फैसला हो चुका है, उनमें मुआवजे के भुगतान की क्या स्थिति है.

अदालत ने कहा, “पंजाब सरकार, हरियाणा सरकार और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की ओर से पेश वकीलों को निर्देश दिया जाता है कि वे 2022 की योजना लागू होने के बाद से 30.09.2026 तक दर्ज हुए ‘हिट-एंड-रन’ मामलों की संख्या से जुड़ा जरूरी आंकड़ा रिकॉर्ड पर रखें.”

अदालत को बताया गया कि सोनीपत के कुंडली पुलिस थाने में 5 अप्रैल 2018 को एफआईआर दर्ज की गई थी. इसमें IPC की धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) और 304-A (लापरवाही के कारण मौत होना) लगाई गई थीं.

पुष्पा का मामला जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के खिलाफ है. उनकी ओर से वकील कृष्ण कुमार ठाकुर पेश हुए.

चंडीगढ़ प्रशासन के वकील ने 28 सितंबर का एक अतिरिक्त हलफनामा पेश किया. इसे चंडीगढ़ में ट्रैफिक (R&D) और सड़क सुरक्षा के उप पुलिस अधीक्षक लक्ष्य पांडेय ने दाखिल किया था. अदालत ने सभी कानूनी आपत्तियों और अपवादों के अधीन इस हलफनामे को रिकॉर्ड पर ले लिया.

हरियाणा के वकील ने पुष्पा के व्यक्तिगत मुआवजे के दावे पर हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा. इस मामले में हरियाणा के उप महाधिवक्ता सतबीर सिंह गोरीपुरिया, पंजाब के वरिष्ठ उप महाधिवक्ता निर्मलजीत सिंह दिवाना और चंडीगढ़ के अतिरिक्त स्थायी वकील अविनित अवस्थी पेश हुए.

अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से पहले जरूरी कार्रवाई पूरी करें. अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को तय की गई है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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