नई दिल्ली: जैकब मार्टिन ने 1998-99 के रणजी ट्रॉफी सीजन में 1,000 से ज्यादा रन बनाए थे और 1999 में कनाडा में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए उन्हें भारतीय टीम में चुना गया था.
उस समय टीम के कप्तान सचिन तेंदुलकर बार-बार होने वाली स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या के कारण नहीं खेल रहे थे. ऐसे में टीम इंडिया के पास एक स्टार बल्लेबाज की कमी थी और सौरव गांगुली की कप्तानी वाली टीम में मार्टिन के पास अपनी पहचान बनाने का अच्छा मौका था. उन्हें दो मैचों में खेलने का मौका मिला, लेकिन वे घरेलू क्रिकेट जैसा शानदार प्रदर्शन नहीं कर सके. हालांकि, उन्होंने अपनी जगह को नुकसान भी नहीं पहुंचाया. भारत ने वह सीरीज 2-1 से जीती.
इसके बाद सात और क्रिकेट मैच आए और चले गए, लेकिन मार्टिन भारतीय टीम की नीली जर्सी में मिले मौके का फायदा नहीं उठा सके. घरेलू क्रिकेट में ढेरों रन बनाने वाले किसी भारतीय बल्लेबाज का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीदों पर खरा न उतरना कोई नई बात नहीं थी. मार्टिन के साथ भी ऐसा ही हुआ.
लेकिन इसके बाद मार्टिन की जिंदगी की कहानी बिल्कुल अलग हो गई.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर होने के बाद भी मार्टिन घरेलू क्रिकेट में एक बड़ा नाम बने रहे. उन्होंने 2001 में बड़ौदा को प्रतिष्ठित रणजी खिताब जिताया. लेकिन इसके बाद मुश्किलों का दौर शुरू हो गया.
तीन साल बाद, 2004 में, दिल्ली पुलिस ने ब्रिटेन से डिपोर्ट किए गए नैमेश कुमार मनुभाई पटेल के खिलाफ मामला दर्ज किया. उस पर पासपोर्ट पर ब्रिटेन के होम ऑफिस की मुहर नकली होने का आरोप था. दिल्ली पुलिस ने 2004 में धोखाधड़ी से जुड़े मामलों के तहत केस दर्ज किया और पटेल को हिरासत में ले लिया. सात साल बाद पुलिस ने मार्टिन को गिरफ्तार किया. पुलिस का आरोप था कि नकली ब्रिटेन होम ऑफिस की मुहर लगवाने में मार्टिन ने मदद की थी और इसके लिए पटेल से करीब 3,000 पाउंड लिए थे.
लेकिन इस साल जून में दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया.
“इस केस की वजह से मैंने सब कुछ खो दिया. मुझे कुछ छोटे-मोटे काम मिले, लेकिन इस केस का साया कई साल तक मेरे ऊपर रहा और इसने मुझे बदनाम किया और मेरे लिए शर्मिंदगी का कारण बना,” मार्टिन ने फोन पर दिप्रिंट से कहा. भावुक मार्टिन ने कहा, “मैंने रेलवे की नौकरी खो दी और एक मेहनती इंसान के तौर पर जो सम्मान कमाया था, वह भी चला गया. इसके अलावा परिवार चलाने और कानूनी खर्च उठाने में भी मुझे बहुत मुश्किल हुई.”
तेंदुलकर की जगह क्रीज से तिहाड़ जेल तक
घरेलू क्रिकेट में मार्टिन का शानदार प्रदर्शन कई सीजन तक जारी रहा और उन्होंने 2001 में बड़ौदा को रणजी ट्रॉफी चैंपियनशिप भी जिताई. हालांकि, उसी साल दक्षिण अफ्रीका में हुई त्रिकोणीय सीरीज भारतीय रंग में उनका आखिरी दौरा साबित हुआ. केन्या के खिलाफ अपने आखिरी वनडे में मार्टिन नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने उतरे और तेंदुलकर के आउट होने के बाद पारी की शुरुआत में ही क्रीज पर आ गए. उनके 36 रन भारत को बल्लेबाजी के ढहने से नहीं बचा सके और टीम 70 रन से मैच हार गई. इसके बाद मार्टिन ने भारत के लिए कभी नहीं खेला.
घरेलू क्रिकेट में 127 मैचों में 48.10 की औसत से 8,563 रन, 23 शतक और 44 अर्धशतक बनाने के बाद मार्टिन ने 2007 में रणजी ट्रॉफी सीजन शुरू होने से ठीक पहले क्रिकेट से संन्यास ले लिया.
तब तक वह भारतीय रेलवे में काम कर रहे थे और घरेलू क्रिकेट में सर्विसेज टीम का भी प्रतिनिधित्व करते थे. लेकिन 2004 के केस का साया उनका पीछा करता रहा और अप्रैल 2011 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. जमानत मिलने से पहले उन्होंने दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक महीने से ज्यादा समय बिताया.
दिल्ली पुलिस मार्टिन के घर तब पहुंची, जब नीमेश पटेल ने कथित तौर पर पूछताछ के दौरान बताया कि उसने राजू भाई भीखू भाई पटेल नाम के एक एजेंट से संपर्क किया था. एजेंट ने उसे विदेश में बसने में मदद का भरोसा दिया था और इसके लिए 7 लाख रुपये मांगे थे. उसने कथित तौर पर यह भी बताया कि राजू पटेल ने उसे कहा था कि जैकब मार्टिन क्रिकेट खिलाड़ियों के रूप में लोगों को विदेश भेजने का इंतजाम करते थे और इसी तरह उसने नीमेश पटेल की मार्टिन से मुलाकात कराई थी.
दिल्ली पुलिस ने राजू पटेल को भी गिरफ्तार किया. पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि मार्टिन ने नीमेश पटेल को भरोसा दिलाया था कि उसे अजवा स्पोर्ट्स क्लब का सदस्य बताकर विदेश भेजा जाएगा. यह क्लब वडोदरा में था.
अदालत में पेश की गई चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने जो योजना बताई, उसके मुताबिक मार्टिन ने कथित तौर पर अजवा स्पोर्ट्स क्लब से जुड़े दूसरे लोगों के साथ नीमेश पटेल की ब्रिटेन यात्रा का इंतिजाम किया था. बाद में नीमेश ने मार्टिन के कहने पर उनसे अलग रास्ता अपना लिया. इसके बाद उसकी मुलाकात जनक नाम के एक एजेंट से हुई, जिसे उसने नकली मुहर के लिए 3,000 पाउंड दिए. लेकिन वह नकली मुहर के साथ पकड़ा गया और उसे ब्रिटेन से डिपोर्ट कर दिया गया.
अभियोजन पक्ष ने आगे दावा किया कि हिरासत के दौरान मार्टिन ने खुद बताया था कि वह अपनी टीम तैयार करते थे और अजवा स्पोर्ट्स क्लब का हिस्सा बताकर लोगों को विदेश भेजते थे. इस मामले में अभियोजन पक्ष का आरोप था कि मार्टिन ने 2003 में ब्रिटेन में मैच खेलने के लिए अपने क्लब के नाम से एक टीम बनाई और नीमेश पटेल को उसमें शामिल कराया.
ट्रायल के दौरान इनमें से कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ और अभियोजन पक्ष का पूरा मामला ही कमजोर पड़ गया.
दिल्ली की एक अदालत ने जून में कहा कि अभियोजन पक्ष का पूरा मामला “अनुमान और अटकलों” पर आधारित था. अदालत ने जांच अधिकारी को केस साबित करने के लिए जरूरी बुनियादी सबूत तक पेश न करने पर फटकार लगाई.
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रणव जोशी ने अपने फैसले में कहा, “कोई ठोस, प्रत्यक्ष और भरोसेमंद सबूत पेश नहीं किया गया. कुछ सबूत उपलब्ध होने के बावजूद जांच अधिकारियों ने उन्हें हासिल नहीं किया, जैसे अजवा क्रिकेट क्लब के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज. अभियोजन पक्ष ने शुरुआत से ही यह आरोप लगाया, लेकिन जैकब मार्टिन के अजवा क्रिकेट क्लब का मालिक होने का कोई सबूत बिल्कुल भी पेश नहीं किया.”
अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष के एक गवाह ने बताया था कि क्लब के मालिक मार्टिन नहीं, बल्कि शिरीष सिरके अजवा थे.
अदालत ने आगे कहा, “PW16 को छोड़कर किसी भी गवाह ने आरोपी जैकब मार्टिन की पहचान नहीं की. अभियोजन पक्ष का यह मामला भी नहीं है कि आरोपी जैकब मार्टिन नीमेश कुमार के साथ इंग्लैंड में रुके थे, ताकि वह नकली मुहर देने में कोई भूमिका निभा सकते.”
अदालत ने यह भी बताया कि इस केस के मुख्य आरोपी नीमेश पटेल ने आखिरी बार अगस्त 2004 में भारत छोड़ा था, न कि 2003 में मार्टिन के साथ 30 खिलाड़ियों के समूह में, जैसा कि आरोप लगाया गया था.
जज जोशी ने कहा, “यह तथ्य साफ तौर पर साबित करता है कि 2003 में नीमेश कुमार की आरोपी जैकब मार्टिन के साथ यात्रा और संबंधित नकली मुहर के बीच कोई संबंध नहीं था.”
ट्रायल के आखिर में अपने बयान में मार्टिन ने अदालत को बताया कि उनके परिचित चेतन काले, जो उस समय बड़ौदा के कप्तान थे, उनके घर आए थे और उन्होंने उन्हें 15 खिलाड़ियों की उस टीम में शामिल होने के लिए कहा था, जो 2003 में अजवा स्पोर्ट्स क्लब की ओर से ब्रिटेन में खेलने जा रही थी.
जज ने कहा, “इसमें कोई विवाद नहीं है कि नीमेश कुमार जिस वीजा पर ब्रिटेन गया था, वह असली था और छह महीने के लिए वैध था. ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि आरोपी जैकब मार्टिन ने नीमेश कुमार की मुलाकात एजेंट जनक पंचौली और अश्विन पटेल से कराई थी या नीमेश कुमार के लिए नकली मुहर की व्यवस्था करने की साजिश में हिस्सा लिया था. इसके अलावा, ऐसा भी कोई सबूत नहीं है कि आरोपी जैकब मार्टिन ने नीमेश कुमार या उसके परिवार के सदस्यों से कोई पैसा लिया था.”
इसके बाद जज ने मार्टिन को सभी आरोपों से बरी कर दिया.
इस मामले में दूसरे आरोपी नीमेश पटेल और राजू पटेल को अदालत जुलाई 2011 और जून 2014 में पहले ही दोषी ठहरा चुकी थी.
‘मेरे कंधों से बोझ उतर गया, अब अपनी जिंदगी वापस चाहता हूं’
बरी होने के दो महीने बाद भी मार्टिन वडोदरा में युवा क्रिकेटरों को कोचिंग दे रहे हैं. उन्होंने संन्यास के बाद यह काम शुरू किया था, लेकिन यह नौकरी भी विवादों से दूर नहीं रही. 2016 में उन्हें बड़ौदा का कोच बनाया गया था, जिस पर काफी सवाल उठे थे.
हालांकि, बड़ौदा के क्रिकेट कोच के तौर पर मार्टिन लगातार खबरों में बने रहे, क्योंकि बड़ौदा के लिए खेलने वाले पंड्या भाइयों, हार्दिक और क्रुणाल, ने अपने शानदार प्रदर्शन से सुर्खियां बटोरीं.
उन्होंने भारतीय रेलवे जॉइन किया था और गिरफ्तारी के समय वह चीफ टिकट इंस्पेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे. गिरफ्तारी के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया.
बरी होने के बाद मार्टिन ने कहा कि उन्होंने रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव, पश्चिम रेलवे और रेलवे बोर्ड को अपनी नौकरी वापस पाने के लिए पत्र लिखा है.
मार्टिन ने कहा, “इस केस ने मेरी जिंदगी और करियर दोनों छीन लिए. इस केस में बरी होने के बाद मेरे ऊपर से इस झूठे केस का बोझ उतर गया है, लेकिन मुझे अपनी नौकरी वापस चाहिए और इसलिए मैंने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखा है.”
मार्टिन ने कहा कि केस चलने के दौरान भी वह कभी बेरोजगार नहीं रहे और बड़ौदा की रणजी टीम के कोच के रूप में काम कर रहे थे, लेकिन इस दौरान उन्हें बहुत ज्यादा आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा.
दिसंबर 2018 में मार्टिन एक जानलेवा हादसे का शिकार हुए और कई दिनों तक लाइफ सपोर्ट पर रहे. इलाज के लिए उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत पड़ी. उनके भारतीय कप्तान सौरव गांगुली, जो तब तक BCCI के अध्यक्ष बन चुके थे, ने उनके इलाज के लिए 5 लाख रुपये की मदद मंजूर की.
गांगुली ने ‘द टेलीग्राफ’ से कहा था, “मार्टिन और मैं टीम के साथी रहे हैं और मैं उन्हें एक शांत और अंतर्मुखी इंसान के तौर पर याद करता हूं. मार्टिन के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हुए मैं उनके परिवार को बताना चाहता हूं कि वे अकेले नहीं हैं.”
कई क्रिकेटरों ने उनके इलाज के लिए पैसे दिए, लेकिन मार्टिन ने शिकायत की कि इस केस की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस और अदालत के सामने खुद का बचाव करने के लिए उन्हें अकेले ही सब कुछ करना पड़ा.
मार्टिन ने कहा, “मैंने खेल के सभी बड़े सितारों के साथ खेला, लेकिन जब मुझे मीडिया और हर जगह अपमान और चरित्र पर सवालों का सामना करना पड़ा, तब किसी ने भी तब तक धैर्य रखने की अपील नहीं की, जब तक कि पूरी सच्चाई सामने नहीं आ गई. जिन बड़े क्रिकेटरों के साथ मैंने लंबे समय तक खेला और अनुभव साझा किया, उनमें से किसी ने मेरे पक्ष में बात नहीं की या मुझसे यह जानने के लिए संपर्क नहीं किया कि इस केस की असल परिस्थितियां क्या थीं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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