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योगेश राज । ट्विटर
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नई दिल्ली: वह खुद को हिंदुत्व का बादशाह कहता है. वह सांप्रदायिक और घृणा से भरी हुई पोस्ट डालता है, उसे हिंसा भड़काने पर गर्व है, वह चाहता है कि हिंदू बहनें राखी सिर्फ हिंदुओं से खरीदें. वह धमकी देता है कि गोकशी हुई तो त्योहार बिगड़ जाएगा. वह अखंड भारत का हामी है. गोरक्षा के लिए हिंसा जैसे काम को लेकर वह सोशल मीडिया पर लगातार कुछ न कुछ लिखता है और अब वह गोरक्षा के बहाने हुए उपद्रव में मुख्य आरोपी है जिसमें एक युवक और एक इंस्पेक्टर की जान चली गई. यह व्यक्ति है बुलंदशहर में बजरंग दल का जिला संयोजक योगेश राज.

बुलंद शहर के स्याना गांव में सोमवार को एक खेत में कुछ पशुओं के अवशेष मिले थे. इसे लेकर पुलिस में शिकायत ​की गई. मौके पर पहुंची पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया और ग्रामीणों से कहा कि जिस पर शक है, उनके नाम दे दें. पुलिस ने लिखित में शिकायत ले भी ली. इसके बावजूद बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज की अगुवाई में सड़क जाम कर दी गई.

जब पुलिस ने जाम हटवाने की कोशिश की तो ग्रामीणों ने पथराव किया और पुलिस पर हमला किया. इस टकराव में एक युवक घायल हुआ जिसकी मौत हो गई. थाना प्रभारी सुबोध कुमार सिंह को भीड़ में से ही किसी ने गोली मार दी.

पुलिस का आरोप है कि ग्रामीणों को समझाया गया, वे मान भी गए लेकिन नामजद आरोपियों द्वारा भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया गया.

स्याना गांव के पास में ही रहने वाले ग्रामीण बब्बू चौधरी ने दिप्रिंट को बताया, ‘योगेश राज बजरंग दल से जुड़ा हुआ है. उन लोगों की सोच ठीक नहीं है. वे सेकुलर बातें नहीं करते, सेकुलर बातों से चिढ़ते भी हैं. वे लोग हरदम उकसाने वाली बातें करते हैं. योगेश राज पहले भी जब तब गोहत्या के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन आदि करता रहा है. उन लोगों की सोच ठीक नहीं है.’

योगेश राज के संगठन के बारे में पुलिस ने भले ही चुप्पी साध ली हो, लेकिन ‘योगेश राज प्रवीण’ ने अपने ट्विटर अकाउंट में अपनी पहचान यही दी है कि वह बजरंग दल का जिला संयोजक है.

योगेश राज के ट्विटर अकाउंट से अंतिम ट्वीट 23 नवंबर को हुआ है जिसमें उन्होंने लिखा, ‘अयोध्या में जुटने लगी रामभक्तों की भीड़.. विहिप का एलान- अंगद, श्रीकृष्ण की तरह ये आख़िरी विनती…. इसके बाद होगा रण.’

योगेश के दिमाग में पुलिस, अदालत, कानून आदि कुछ नहीं हैं. वे वैसे ही बात करते हैं, ​जैसे कट्टरपंथी नेता सतह पर बात करते हैं.

योगेश राज भीड़तंत्र का ऐसे सेनापति हैं जिनको भीड़ के न्याय पर गर्व है वे इस न्याय की बेहिचक, बाकायदा घोषणा भी करते हैं. 17 अगस्त, 2017 का उनका एक ट्वीट है, ‘बजरंगदल स्याना ने पकड़ा एक गोतस्कर, अब तक सात गाय काट चुका है साला सुअर जमकर की धुलाई.’

बुलंदशहर जिले के स्याना गांव के रहने वाले योगेश बुलंदशहर डीएवी कॉलेज में ही पढ़ाई की. 2015 में ही उसने बजरंग दल ज्वाइन किया. इसके बाद आर्थिक जरूरतों के लिए एक प्राइवेट नौकरी करने लगा. 2016 में उसे बजरंग दल का जिला संयोजक बना दिया गया. जिला संयोजक बनने के ​बाद उसने नौकरी छोड़ दी और संगठन के लिए काम करने लगा.

कानून के प्रति बेखौफ योगेश ने हाल ही में ट्विटर पर लिखा, ‘हिन्दूगिरी के बादशाह हैं हम, तलवार हमारी रानी है, दादागिरी तो करते ही हैं, बाकी महाकाल की मेहरबानी है! जय महाकाल.’

तलवार को अपनी रानी बताने वाले योगेश को महाकाल की मेहरबानी पर इतना भरोसा है कि कानून व्यवस्था को धता बताते हुए वह ट्विटर पर खुलेआम धमकी देता है कि ‘गौकशी हुई तो त्योहार बिगड़ जाएगा, ध्यान रहे.’ यह ट्वीट बकरीद के समय का है.

रक्षाबंधन के मौके पर वह लिखता है, ‘विशेष आग्रह हिंदुओं से ही राखी खरीदें बहनें.’

हर त्यौहार को हिंदू मुस्लिम टकराव में बदलने के खेल में माहिर लोगों की तरह योगेश की घर की दीवार पर अखंड भारत का नक्शा चस्पा है. अखंड भारत यानी प्राचीन भारत जिसमें बांग्लादेश, पाकिस्तान के अलावा कुछ और भूभाग हैं. देश के कट्टर हिंदूवादी इस अखंड भारत की कल्पना करते हैं और इसे अपना लक्ष्य भी बताते हैं.

त्यौहार बिगाड़ देने की धमकी के साथ वे अपने को भगत सिंह की राह पर चलने वाला भी बता देते हैं: ‘मैं भगत सिंह के राह पर चलने वाला हूँ!!! जब तक धमाके नही होंगे तब तक बदलाव सम्भव नहीं!! देश क्रांति मांग रहा है!! वन्देमातरम.’

योगेश को लगता है कि दुनिया जैसी चल रही है, उसमें उनकी ‘शराफत’ का बड़ा तगड़ा योगदान है. वे ट्वीट करते हैं, हमारी शराफत का फायदा उठाना बंद कर दो. जिस दिन हम बदमाश हो गए… कयामत आ जाएगी.’

सांप्रदायिक दिमागों के भी क्या कहने, उन्हें लगता है कि दुनिया उनसे डरती है, जैसे योगेश को लगता है कि अमेरिका उनसे डरता है, ‘अमेरिका की एजेंसी CIA बोली की विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल धार्मिक उग्रवादी-हमें यह खौफ पसंद आया.’

अब कौन जाने कि योगेश की समझदारी में यह भगत सिंह के राह पर चलकर क्रांति का प्रयास था, या उनकी शराफत, लेकिन जो उन्होंने किया वह बहुत भयावह था, जिसमें एक पुलिस अधिकारी की जान चली गई.

फोन पर बब्बू चौधरी ने बताया, ‘जिस इलाके में पशुओं के अवशेष मिले, वहां पर दूर दूर तक मुस्लिम आबादी नहीं है. पुलिस समझ रही थी कि यह बदमाशी है, वह सही काम कर रही थी. इन लोगों ने थाना प्रभारी को ही मार दिया. पुलिस वाले की जान की कीमत पर बहुत बड़ा बवाल टल गया, वरना दंगा भी हो सकता था और ऐसे में बुलंदशहर का बहुत नुकसान होता.’

हालांकि, पुलिस ने एसआईटी गठित कर दी है, जांच जारी है और योगेश राज अभी तक पकड़ा नहीं गया है. अब यह तो पुलिस जांच में ही पता चलेगा कि बुलंदशहर में हुई हिंसा सुनियोजित थी या नहीं? साथ ही जांच से ही यह भी पता चलेगा कि इस पूरे उपद्रव और हत्याकांड में योगेश राज की क्या भूमिका रही.


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