मुंबई: 12 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद के साथ और पीक दिन पर लगभग 2.5 करोड़ लोगों की भीड़ का अनुमान लगाते हुए, महाराष्ट्र 2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित भीड़ प्रबंधन प्रणाली की योजना बना रहा है. अधिकारी श्रद्धालुओं की मदद और आपातकालीन सेवाओं के लिए AI आधारित ऐप और सिस्टम पर भी काम कर रहे हैं.
पिछले हफ्ते एक वर्कशॉप हुई जिसमें राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ग्लोबल टेक कंपनियों जैसे मेटा, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और MIT मीडिया लैब के इंजीनियरों और रणनीतिकारों के साथ मिले. इसके साथ ही भारतीय डिजिटल और AI कंपनियां जैसे भाषिणी, सोकेट.ai और आद्या.ai भी इसमें शामिल थीं. लागत का अनुमान अभी तैयार किया जा रहा है.
यह वर्कशॉप नासिक त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण (NTKMA) द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के तहत किए जा रहे उद्योग और विशेषज्ञ परामर्शों की एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा थी. वर्कशॉप के बाद प्राधिकरण ने कहा कि इसका उद्देश्य 2027 के कुंभ मेले को “अब तक का सबसे तकनीकी रूप से उन्नत कुंभ” बनाना है.
इसी तरह की AI निगरानी प्रणाली 2025 में प्रयागराज के 45 दिनों के महाकुंभ में भी इस्तेमाल की गई थी. “डिजिटल महाकुंभ” कहते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने AI आधारित कैमरे और ड्रोन लगाए थे. साथ ही उन्होंने चार इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) भी बनाए थे जो रियल टाइम रिपोर्ट ट्रैक करते थे.
नासिक और त्र्यंबकेश्वर में होने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला 21 महीने तक चलेगा. यह 31 अक्टूबर 2026 को शुरू होगा और 24 जुलाई 2028 तक चलेगा. ‘अमृत स्नान’ या पवित्र स्नान 2 अगस्त 2027 से शुरू होगा, जब साधु और श्रद्धालु नासिक के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त कुंड में गोदावरी नदी में स्नान करेंगे.
इस चर्चा में एक विशेष रूप से बनाया गया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ‘कुंभ AI स्टैक’ प्रस्तावित किया गया, जो मुख्य रूप से निगरानी पर आधारित होगा.
कुंभ मेला कमिश्नर शेखर सिंह ने द प्रिंट को बताया, “प्रस्तावित ‘कुंभ AI स्टैक’ को लाइव CCTV फीड, सेंसर इनपुट और टेलीकॉम संकेतों को मिलाकर भीड़ की असामान्य घनत्व और मूवमेंट पैटर्न को पहचानने के लिए बनाया जा रहा है.” उन्होंने कहा, “जब शुरुआती चेतावनी संकेत मिलेंगे, तो फील्ड टीमों और कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजा जाएगा ताकि भीड़ को मोड़ा जा सके, एंट्री को नियंत्रित किया जा सके और समय पर कार्रवाई हो सके.”
भीड़ घनत्व की सीमा सुरक्षा एजेंसियों और विशेषज्ञों से सलाह लेकर तय की जाएगी. उन्होंने कहा, “सिस्टम का उद्देश्य सुरक्षा सीमा पार होने से पहले ही अलर्ट देना है ताकि रोकथाम की जा सके, न कि बाद में प्रतिक्रिया दी जाए.”
बड़ी संख्या में मौजूदा और नए CCTV कैमरों को एक एकीकृत कमांड और कंट्रोल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. उन्होंने कहा, “फोकस सार्वजनिक सुरक्षा, भीड़ का जमावड़ा पहचानने और असामान्यता का पता लगाने पर है. संवेदनशील तकनीकों का उपयोग हमेशा कानून और सरकारी दिशानिर्देशों के दायरे में रहेगा.”
सेवा के लिए ऐप्स
क्योंकि कुंभ नासिक शहर और त्र्यंबकेश्वर दोनों में फैला होगा, इसलिए अधिकारी एक एकीकृत मॉनिटरिंग सिस्टम बना रहे हैं जो दोनों जगहों का रियल टाइम डेटा देगा. उन्होंने द प्रिंट को बताया, “यह दोनों स्थानों पर रियल टाइम समेकित ऑपरेटिंग पिक्चर देगा, जिससे भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर समन्वित निर्णय लिए जा सकेंगे, खासकर पीक स्नान दिनों में.”
प्रशासन ‘सूचना, निर्देश और इनसाइट्स’ नामक तीन स्तरों वाला डिजिटल मॉडल भी बना रहा है. उन्होंने कहा, “श्रद्धालुओं को ऐप्स, IVR और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ‘सूचना’ मिलेगी. फील्ड स्टाफ और पुलिस को ऑपरेशनल डैशबोर्ड के जरिए ‘निर्देश’ मिलेंगे, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों को एनालिटिक्स आधारित ‘इनसाइट्स’ मिलेंगे ताकि वे पहले से निर्णय ले सकें.”
एक बहुभाषी AI असिस्टेंट “कुंभदूत” भी विचाराधीन है. यह सेवा रूट, सुविधाओं और सुरक्षा सलाह से जुड़े सामान्य सवालों के जवाब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप के जरिए देगी और नेटवर्क भीड़ होने पर बैकअप सिस्टम से काम करेगी.
भीड़ नियंत्रण के अलावा IT प्लेटफॉर्म स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़े तनाव बिंदुओं पर भी नजर रखेंगे. इसमें भीड़भाड़, कचरे का जमाव, डिहाइड्रेशन का जोखिम और संभावित बीमारी फैलने की स्थिति शामिल होगी, ताकि विभाग जल्दी कार्रवाई कर सकें.
तैयारी जांचने के लिए प्राधिकरण ने “कुंभ AI सैंडबॉक्स” प्रस्तावित किया है, जिसमें त्योहार से पहले भीड़ बढ़ने, ट्रैफिक जाम, मेडिकल इमरजेंसी और चरम मौसम जैसी स्थितियों का सिमुलेशन किया जाएगा.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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