देहरादून, दो नवंबर (भाषा) सह-पायलट नियम को लेकर हेलीकॉप्टर संचालकों द्वारा सोमवार को चारधाम चार्टर सेवा रोक दिए जाने के बीच उनके साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद गतिरोध समाप्त करने के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने चार नवंबर को एक और बैठक बुलाई है जबकि कई श्रद्धालु अब भी धामों में फंसे हुए हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी ।
इससे पहले दिन में इस नियम को लेकर हेलीकॉप्टर चार्टर सेवा संचालकों के प्रतिनिधियों, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और यूकाडा के अधिकारियों के बीच बैठक हुई ।
यूकाडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बैठक में सरकार ने चारधाम मार्गों पर चलने वाले चार्टर संचालकों के लिए वार्षिक पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान अगले साल से ‘सह-पायलट नियम’ को अनिवार्य रूप से लागू करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, संचालक इस सुझाव पर सहमत नहीं हुए, जिसके कारण सरकार को एक और बैठक बुलाने को मजबूर होना पड़ा ।’’
यूकाडा के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए ‘सह-पायलट नियम’ जोड़ा गया है। अगले साल से हेलीकॉप्टर संचालकों के पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान इसे नियमों में शामिल कर लिया जाएगा। इस तरह, यह अनिवार्य हो जाएगा। जो संचालक इस नियम को मानने के लिए सहमत होंगे, केवल वही अपना पंजीकरण करा सकेंगे। फिलहाल, चार्टर संचालक इस नियम को मानने के लिए तैयार नहीं हैं।’’
हर उड़ान में दो पायलट अनिवार्य किए जाने के यूकाडा के नियम के विरोध में संचालकों ने सोमवार से चार धाम चार्टर सेवाएं रोक दीं । उनका कहना है कि दो पायलटों का नियम लागू करने से यह ‘सभी संचालकों के लिए आर्थिक रूप से अव्यावहारिक’ हो जाएगा । उन्होंने सरकार से इस आदेश को वापस लेने का आग्रह किया है ।
डीजीसीए को रविवार को लिखे एक पत्र में संचालकों ने कहा था, ‘‘हर चार्टर उड़ान में दो पायलटों की तैनाती अनिवार्य करने से परिचालन लागत, क्रू की जरूरत, ठहरने और लॉजिस्टिक्स के खर्च तथा कुल संचालन जिम्मेदारियों में काफी बढ़ोतरी होगी। मौजूदा व्यावसायिक ढांचे, चार्टर की मौजूदा दरों और सीमित परिचालन मार्जिन को देखते हुए संचालकों के लिए इन अतिरिक्त खर्चों को खुद उठाना संभव नहीं है। इस पूरे अतिरिक्त बोझ को ग्राहकों पर डालना भी व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक नहीं है।’’
सरकार ने यह नियम लागू करने का निर्णय शनिवार को 30 अक्टूबर को चमोली जिले में जोशीमठ के पास हुए एक हेलीकॉप्टर हादसे के बाद लिया था जिसमें कर्नाटक के पांच श्रद्धालुओं समेत छह लोगों की मौत हो गई थी ।
संचालकों द्वारा उड़ानें बंद किए जाने के कारण कई श्रद्धालु चारों धामों में फंस गए हैं । यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे धामों में फंसे श्रद्धालुओं को सड़क मार्ग से वापस देहरादून लाना सुनिश्चित करें।
उन्होंने यह भी कहा कि शीतकाल के लिए मंदिरों के कपाट बंद होने से पहले यात्रा के बचे हुए दिनों के लिए बुकिंग रद्द होने की स्थिति में संचालकों को उसका पूरा पैसा लौटाने का भी निर्देश दिया गया है।
अधिकारी ने कहा कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए चार्टर उड़ानों में दो पायलट रखने का फैसला किया गया है, ताकि हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) की निगरानी बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि लेकिन संचालकों ने फिलहाल इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इसके लिए हेलीकॉप्टरों में अन्य बदलावों के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त नियंत्रण प्रणालियां भी लगानी होंगी।
चार्टर उड़ान सेवा को लेकर गतिरोध तब पैदा हुआ है जब चारधाम यात्रा अपने आखिरी चरण में पहुंच चुकी है। गंगोत्री धाम के कपाट दीवाली के अगले दिन अन्नकूट पर्व पर 10 नवंबर को, यमुनोत्री और केदारनाथ धामों के कपाट भैया दूज के पर्व पर 11 नवंबर को जबकि बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को श्रद्धालुओं के लिए बंद किए जाएंगे ।
भाषा दीप्ति राजकुमार
राजकुमार
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