नई दिल्ली: दस सितंबर को सुबह के 9:25 बजे गांधीनगर जिला अदालत को एक ईमेल मिला, जिसमें BRICS सम्मेलन के दौरान प्रगति मैदान में धमाके की धमकी दी गई थी. इसके 12 मिनट बाद विधायी और संसदीय कार्य विभाग को एक और धमकी भरा संदेश भेजा गया. इसमें गुजरात विधानसभा, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), केंद्र के शीर्ष नेतृत्व और BRICS में भारत का समर्थन करने वाले देशों को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी.
‘mortonrenisch73@gmail.com’ और ‘jondmoragn52627@gmail.com’ से भेजे गए ये धमकी भरे ईमेल गुजरात भर में सरकारी इमारतों, स्कूलों, कॉलेजों और अदालत परिसरों को भेजे गए ईमेल के एक बड़े समूह का हिस्सा थे.
जांच गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCoE) को 5,13,847 अलग-अलग ईमेल आईडी और पासवर्ड के चौंकाने वाले जखीरे तक ले गई. इस मामले में बिहार और झारखंड से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
आरोपियों—भागलपुर से गिरफ्तार रोशन कुमार भूमिहार और देवघर से गिरफ्तार गुलशन ने कथित तौर पर वीपीएन के जरिए इन अकाउंट्स को एक्टिव किया और उनका इस्तेमाल किया.
जांचकर्ताओं के लिए सबसे चिंताजनक बात इस नेटवर्क की सीमा पार पहुंच थी. कथित तौर पर इसके हैंडलर्स के बांग्लादेश से संबंध थे और इस काम को अंजाम देने के लिए क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट का इस्तेमाल किया जा रहा था.
दो आरोपी
CCoE के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि उन्होंने डिजिटल फॉरेंसिक की जांच शुरू की, जिसमें उन आईपी एड्रेस की जांच भी शामिल थी, जहां से ईमेल भेजे गए थे. उन्होंने कहा, “जांच में पता चला कि बम से सचिवालय को उड़ाने की धमकी वाला ईमेल भेजने वाले आरोपी को भागलपुर से गिरफ्तार किया गया. अभी तक पहली नज़र में इसका मकसद पैसे कमाना लगता है.”
इस बीच, अधिकारी ने बताया कि 5 लाख से ज्यादा ईमेल आईडी और पासवर्ड तैयार करने के कथित मास्टरमाइंड को देवघर से गिरफ्तार किया गया.
अधिकारी के मुताबिक, 12वीं पास राय फ्रीलांस वेबसाइट डेवलपर के तौर पर काम करता है और गुजरात के अधिकारियों को धमकी वाले ईमेल भेजने के लिए इस्तेमाल किए गए अकाउंट (jondmoragn52627@gmail.com) को सीधे चलाता था.
अधिकारी के मुताबिक, गुलशन डिजिटल मार्केटिंग के कारोबार में था. उन्होंने कहा, “वह 2022 से बड़ी संख्या में ईमेल आईडी तैयार कर रहा था. वह मुख्य सप्लायर था, जो रोशन को पहले से इस्तेमाल के लिए तैयार अकाउंट देता था.”
छापेमारी के दौरान जांचकर्ताओं को धमकियां भेजने के लिए इस्तेमाल किए गए उपकरण मिले. इसके साथ ही उन्हें अलग-अलग ईमेल आईडी और पासवर्ड वाला एक डेटाबेस भी मिला.
‘बांग्लादेशी’ कनेक्शन, क्रिप्टो वॉलेट
CCoE की जांच से पता चला है कि 5 लाख से ज्यादा ईमेल अकाउंट बनाने का मुख्य मकसद पैसे कमाना था और “इसके साथ भारत विरोधी साइबर अभियानों को भी समर्थन दिया जा रहा था.”
ऊपर बताए गए पुलिस अधिकारी ने कहा, “आरोपी तकनीक के अच्छे जानकार थे. वे बांग्लादेश में मौजूद हैंडलर्स के संपर्क में रहते थे. पूरे नेटवर्क को बांग्लादेश से आर्थिक मदद और दिशा-निर्देश मिलने की बात सामने आई है. इस काम के लिए क्रिप्टो वॉलेट का इस्तेमाल भी पाया गया है.”
जांच में पता चला कि आरोपी हर एक ईमेल आईडी और पासवर्ड की गूगल शीट्स और एक्सेल फाइल्स कथित तौर पर बांग्लादेश में अपने संपर्क को भेजते थे. अधिकारी ने कहा, “अभी तक हमें 10,000 USDT से ज्यादा का डेटा मिला है. लेकिन कई और क्रिप्टो वॉलेट भी हैं, इसलिए रकम काफी ज्यादा है.”
USDT या Tether एक डिजिटल टोकन है, जो डिजिटल डॉलर की तरह काम करता है. यह सरकार की ओर से जारी किया गया आधिकारिक कानूनी पैसा नहीं है.
अधिकारी ने दोनों आरोपियों के काम करने के तरीके के बारे में बताया, “सुरक्षा प्रोटोकॉल से बचने के लिए गुलशन ने टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और गूगल ऑथेंटिकेटर सिस्टम को बायपास किया. वह अकाउंट्स को इस तरह कॉन्फिगर करता था कि OTP मोबाइल नंबरों पर न जाएं.”
उन्होंने कहा, “इसके बाद उन्होंने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल करके इन अकाउंट्स को एक्टिव किया और उनका इस्तेमाल किया.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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