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Tuesday, 15 September, 2026
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सेना प्रमुख रूस के दौरे पर, स्पेयर पार्ट्स, एयर डिफेंस सिस्टम, BMP-3 और बैटल टैंकों पर होगी चर्चा

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का रूस दौरा अक्टूबर 2018 में दिवंगत जनरल बिपिन रावत के दौरे के बाद किसी भारतीय सेना प्रमुख की रूस की पहली यात्रा है.

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नई दिल्ली: सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ बुधवार को रूस के आधिकारिक दौरे पर होंगे. इस दौरान मौजूदा रूसी मूल के हथियारों और सैन्य प्रणालियों को अपग्रेड करने, स्पेयर पार्ट्स और उनकी सप्लाई समेत कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है. साथ ही, मॉस्को की ओर से पेश की जा रही कुछ नई सैन्य प्रणालियों पर भी बात हो सकती है.

रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि सेना प्रमुख इस दौरे के दौरान अपने रूसी समकक्ष कर्नल जनरल आंद्रेई मोर्दविचेव और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात करेंगे.

यह दौरा महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब छह साल में किसी भारतीय सेना प्रमुख की रूस की यह पहली यात्रा है. रूस का दौरा करने वाले आखिरी मौजूदा सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत थे, जिन्होंने अक्टूबर 2018 में छह दिनों की यात्रा की थी.

सूत्रों ने बताया कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को आगे बढ़ाना और जमीनी सेना के नजरिए से भारत-रूस रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करना है.

पता चला है कि जनरल सेठ के सामने उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों में भारतीय सेना में अभी इस्तेमाल हो रहे रूसी मूल के उपकरणों के लिए स्पेयर पार्ट्स और उनकी सप्लाई की उपलब्धता शामिल होगी.

असॉल्ट राइफल और बख्तरबंद वाहन से लेकर टैंक, एयर डिफेंस सिस्टम और रॉकेट लॉन्चर तक, रूसी मूल के उपकरण भारतीय सेना में अब भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं. हालांकि, सेना अपने हथियारों और सैन्य प्रणालियों के लिए स्रोतों में विविधता लाने और उन्हें देश में ही बनाने पर लगातार ज्यादा जोर दे रही है.

सेना की लगभग पूरी आर्मर्ड कोर और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रूसी मूल की प्रणालियों पर आधारित है.

सूत्रों ने बताया कि रूस ने भारतीय सेना को कई नई प्रणालियां भी पेश की हैं और इनसे जुड़े प्रस्तावों पर अलग-अलग स्तर पर बातचीत चल रही है.

जिन प्रमुख प्रणालियों पर चर्चा हो रही है, उनमें रूस का Pantsir-S1M भी शामिल है. यह रूस का अपग्रेड किया गया कम दूरी का मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है.

जैसा कि दिप्रिंट ने 2024 में रिपोर्ट की थी कि भारतीय सेना कम से कम 90 Carrier Air Defence Tracked (CADET) सिस्टम खरीदना चाहती है. इनमें कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होनी चाहिए, ताकि मैकेनाइज्ड सैन्य काफिलों की सुरक्षा की जा सके.

सेना की योजना CADET सिस्टम को मैदानी इलाकों, रेगिस्तान, अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों और 5,000 मीटर तक की ऊंचाई वाले ऊंचे और पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात करने की है.

Pantsir को एयर बेस, कमांड पोस्ट और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों जैसी अहम सैन्य संपत्तियों को हवाई हमलों से बचाने के लिए बनाया गया है. इसमें जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ दो 30-mm तोपें लगी हैं. यह विमान, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है.

यह पहली बार नहीं है जब भारतीय सेना की एयर डिफेंस जरूरत के लिए Pantsir का नाम सामने आया है.

2013 में भी यह सेना की इसी तरह की मोबाइल एयर डिफेंस प्रणाली की जरूरत के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही प्रणालियों में शामिल था. उस समय तीन प्रणालियों को शॉर्टलिस्ट किया गया था: दक्षिण कोरिया की Hanwha Defense Systems का Hybrid Biho, Almaz-Antey का अपग्रेड किया गया Tunguska और KBP Tula का Pantsir.

बाद में दक्षिण कोरियाई सिस्टम पसंदीदा बोलीदाता के रूप में सामने आया, लेकिन यह सौदा आगे नहीं बढ़ सका. अधिकारियों ने इसके पीछे स्वदेशी सामग्री से जुड़े मुद्दों को वजह बताया था.

मॉस्को ने 2018 में नई दिल्ली में हुई India-Russia Inter-Governmental Commission on Military Technical Cooperation की बैठक के दौरान रूसी सिस्टम को इस दौड़ से बाहर किए जाने पर आपत्ति भी जताई थी.

रूस जिस एक और बड़े प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहा है, वह नई पीढ़ी के Infantry Fighting Vehicles से जुड़ा है. यह सेना के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में लाइसेंस के तहत हजारों BMP बनाए गए हैं और ये सेना की मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री की रीढ़ हैं.

सेना अपने मौजूदा BMP-2 बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए स्वदेशी कार्यक्रम चला रही है. लेकिन रूस BMP-3 भी पेश कर रहा है, जो नई पीढ़ी का रूसी मूल का Infantry Fighting Vehicle है और एक संभावित विकल्प हो सकता है.

BMP-3 का प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब सेना Future Infantry Combat Vehicle (FICV) नाम की एक परियोजना पर काम कर रही है.

मॉस्को की ओर से एक और बड़ा प्रस्ताव सेना की नई पीढ़ी के Main Battle Tank की जरूरत से जुड़ा है. अभी यह साफ नहीं है कि रूस पहले से मौजूद किसी आधुनिक टैंक प्लेटफॉर्म की पेशकश कर रहा है या भारत के लिए भविष्य के टैंक को मिलकर डिजाइन और बनाने का प्रस्ताव दे रहा है.

सेना के Future Ready Combat Vehicle (FRCV) कार्यक्रम में नई पीढ़ी के Main Battle Tank की योजना है, जो आगे चलकर पुराने हो रहे T-72 और T-90 बेड़े की जगह लेगा. रूस अपनी नई टैंक तकनीक, जिसमें T-14 Armata भी शामिल है, की पेशकश कर सकता है या भारत की FRCV जरूरत के हिसाब से संयुक्त विकास और निर्माण का मॉडल पेश कर सकता है.

इस बीच, भारत ने रूसी मूल की प्रणालियों के अपग्रेड और उनके रखरखाव के लिए ऑर्डर देना जारी रखा है. मार्च में भारत ने सेना के लिए रूसी Tunguska एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के लिए 445 करोड़ रुपये के एक कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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