नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली पुलिस को विरोध प्रदर्शन करने की तारीख देने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया. इसी बीच, केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगहों की सूची से हटा दिया.
इसके बजाय, रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD मैदान को विरोध प्रदर्शन करने के लिए नई जगहों के तौर पर तय किया गया.
दिल्ली पुलिस के एक स्थायी आदेश में कहा गया, “भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक समिति बनाई थी, जिसे मौजूदा तय जगह के बजाय नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देने के लिए दूसरी उचित जगहों की पहचान करने का काम सौंपा गया था. समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन की जगहों की सूची से हटा दिया गया है.”
12 अक्टूबर को, CJP, AISA और नागरिक समाज के संगठनों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की अपील किए जाने के दो दिन बाद, CJP के आशुतोष रंका और सौरव दास दो अन्य सदस्यों के साथ संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचे. वे जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की जानकारी लिखित रूप में देने गए थे.
यह फैसला ऐसे दिन आया, जब विपक्षी INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने वाला था. यह मार्च मध्य दिल्ली के कनॉट प्लेस से शुरू होना था.
देश की राजधानी के बीचोंबीच स्थित जंतर-मंतर कई बड़े विरोध प्रदर्शनों की जगह रहा है. इनमें अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी अनशन, पूर्व सैनिकों का वन रैंक वन पेंशन (OROP) आंदोलन, तमिलनाडु के किसानों का सूखे को लेकर प्रदर्शन और रोहित वेमुला से जुड़े विरोध प्रदर्शन शामिल हैं.
इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन की जगहों की सूची से हटा दिया है. अगली बार वह लोकतंत्र को ही सूची से हटा देंगे.
उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, “तानाशाह की परेशानी कभी भी विरोध प्रदर्शन की जगह नहीं थी. उसकी असली परेशानी तो लोगों के विरोध प्रदर्शन करने के विचार से थी.”
पुलिस से CJP की मांगें
CJP के सह-संयोजक आशुतोष रंका ने कहा, “पिछली बार, 10 अक्टूबर को, दिल्ली पुलिस ने हमसे कहा था कि हमने अपने विरोध प्रदर्शन के बारे में उन्हें 10 दिन पहले जानकारी नहीं दी थी. आज हमने उन्हें लिखित जानकारी दे दी है और विरोध प्रदर्शन की तारीख बताने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम विरोध प्रदर्शन के लिए दोबारा अपील करेंगे.”
CJP के एक अन्य सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) सचिन शर्मा संसद मार्ग पुलिस थाने में मौजूद थे, लेकिन उन्होंने उनसे मुलाकात नहीं की.
दास ने आरोप लगाया, “नई दिल्ली के DCP पुलिस थाने में मौजूद थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने हमें देखा, वह वहां से चले गए.”
पुलिस को सौंपे गए अपने पत्र में CJP ने मांग की कि दिल्ली में पुलिस की तैनाती तुरंत कम की जाए. इसके साथ ही स्वतंत्र पत्रकारों को मनमाने और गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेने और परेशान करने की कार्रवाई बंद की जाए.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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