नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने और “वोट चोरी” घोटाले में सरकारी गवाह बनने की अपील की. उन्होंने कहा कि वह इस “गलत काम” के पीछे मुख्य व्यक्ति नहीं हैं और अगर वह पद छोड़ देते हैं, तो उन्हें माफ भी किया जा सकता है.
राहुल ने सोमवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “आपने अपराध किया है और सच कहूं तो आप सबसे बड़े अपराधी नहीं हैं. आपसे गलती हुई है. इस गलती के पीछे आपका दिमाग नहीं है. हम उन लोगों के पीछे हैं, जिन्होंने आपसे यह सब करवाया.”
उन्होंने कहा, “आपके लिए यह बहुत आसान है. इस्तीफा दीजिए और रास्ते से हट जाइए. कोई दिक्कत नहीं है. हम आपको माफ करने के बारे में भी सोच सकते हैं, क्योंकि ऐसा करना इस देश की सेवा होगी. यह संविधान की सेवा होगी.”
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और उद्योगपति गौतम अडानी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त पर दबाव डाला गया था. उन्होंने कहा, “हम यह जानते हैं. और हम समझते हैं कि आप किस तरह के दबाव में हैं.”
उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ विपक्ष की लड़ाई खत्म नहीं होगी. उन्होंने कहा, “विरोध प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए है. उसके बाद प्रधानमंत्री, श्री अमित शाह और इन लोगों को हटाने के लिए है. हम रुकने वाले नहीं हैं.”
उन्होंने घोषणा की कि INDIA गठबंधन के नेता चुनाव में निष्पक्षता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे. उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मौजूदा घटनाओं पर चिंता जताते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है.
उन्होंने कहा, “आज INDIA गठबंधन के नेता और मैं एक साथ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और यह याचिका दायर करेंगे.”
‘सभी विरोध प्रदर्शन एक ही आंदोलन का हिस्सा हैं’
दिप्रिंट के एक सवाल के जवाब में, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी समेत नागरिक समाज के समूहों और अलग-अलग जगहों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछा गया था, राहुल ने कहा कि ये सभी प्रदर्शन संविधान की रक्षा के लिए चल रहे एक साझा आंदोलन का हिस्सा हैं.
उन्होंने कहा, “सभी विरोध प्रदर्शन एक ही विरोध प्रदर्शन का हिस्सा हैं. विचार बिल्कुल साफ है: भारत आगे बढ़ रहा है.”
उन्होंने आगे कहा, “हमें इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन हैं या किस संगठन से आते हैं. अगर आप भी हमारी तरह संविधान की रक्षा कर रहे हैं, तो हम आपके साथ हैं. हम आपका समर्थन करेंगे, आपकी मदद करेंगे, आपकी रक्षा करेंगे और आपसे भी यही उम्मीद करते हैं.”
सरकार के साथ बातचीत को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके आसपास के लोगों के जरिए कुछ लोग उनसे संपर्क कर चुके हैं. लेकिन उन्होंने जोर दिया कि वह अपनी बात सबके सामने रख रहे हैं.
उन्होंने कहा, “कई लोगों ने संपर्क किया है. यह दिलचस्प है. हालांकि, वे सीधे मुझसे संपर्क नहीं करते. वे मेरे आसपास के लोगों से संपर्क करते हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “मैं ऐसा कुछ नहीं करता, जिसे भारत के लोगों से छिपाकर रखा जाए. पूरी पारदर्शिता है. सरकार और भारत के लोगों से मुझे जो कहना होता है, मैं यहीं कहता हूं. मैं सड़क पर कहता हूं.”
‘दिल्ली को किले में बदल दिया गया है’
राहुल ने कहा कि मोदी सरकार लोगों को विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचने से रोक रही है.
उन्होंने सवाल किया, “दिल्ली को कैद क्यों कर दिया गया है? भारत की राजधानी को जेल क्यों बना दिया गया है? लोगों को दिल्ली आने से रोका जा रहा है. ट्रेनों और बसों को रोका जा रहा है. लोगों को उनमें से उतारा जा रहा है. दिल्ली को एक किले में बदल दिया गया है.”
उन्होंने जोर देकर कहा कि बैरिकेड लगाने से इस आंदोलन को जनता का समर्थन मिलने से नहीं रोका जा सकेगा.
उन्होंने कहा, “दिल्ली में बैरिकेड लगाए जाने से यह भ्रम पैदा होता है कि लोगों को रोक दिया गया है. लेकिन दिल्ली के लोगों के दिमाग पर बैरिकेड नहीं लगाए जा सकते.”
उन्होंने आगे कहा, “हम सड़क के लिए लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं. हम लोगों के विचारों के लिए लड़ रहे हैं. हम भारत के लोगों के दिलों के लिए लड़ रहे हैं.”
राहुल ने कहा कि पुलिसकर्मी सवाल कर रहे थे कि उनसे भारत के युवा प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए क्यों कहा जा रहा है, जबकि कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्यों को खुलेआम आने-जाने दिया जा रहा है.
उन्होंने कहा, “पुलिस पूछ रही है कि हमें भारत के युवाओं को पीटने के लिए क्यों कहा जा रहा है. हमें युवाओं को रोकने के लिए क्यों कहा जा रहा है? और फिर हमें कहा जा रहा है कि RSS के लोगों को खुलेआम घूमने दिया जाए.”
‘अधिकारी जानकारी साझा कर रहे हैं’
राहुल ने कहा कि सरकार के 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और उसे जानकारी दे रहे हैं.
उन्होंने कहा, “वे हमें जानकारी दे रहे हैं. ED के अंदर, CBI के अंदर, विदेश मंत्रालय के अंदर, वे सभी हमें जानकारी दे रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि विपक्ष राष्ट्रपति को सौंपने के लिए सबूत तैयार कर रहा है.
राहुल ने कहा, “हम राष्ट्रपति के पास जाएंगे और उन्हें सबूत देंगे. राष्ट्रपति के कार्यालय की ओर से इनकार नहीं किया गया था.”
विपक्ष आगे क्या करेगा, इस सवाल पर राहुल ने इस आंदोलन की तुलना भगवान शिव के तांडव से की. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी तय योजना पर निर्भर नहीं है.
उन्होंने कहा, “यह तांडव है. यह शिव का नृत्य है. इसमें कोई योजना नहीं है. आज हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं. कल कुछ और होगा.”
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने युवाओं और अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े नागरिकों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक नेता के बारे में नहीं, बल्कि देश के भविष्य के बारे में है.
उन्होंने कहा, “यह राहुल गांधी या नरेंद्र मोदी के बारे में नहीं है. यह भारत के बारे में है. यह संविधान, भारत के लोगों, उनकी अभिव्यक्ति की आजादी और भारत के भविष्य के बारे में है.”
उन्होंने कहा कि जब तक चुनाव व्यवस्था में सुधार नहीं होता और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा.
उन्होंने कहा, “जब तक संविधान की रक्षा नहीं होती, जब तक चुनाव आयुक्त को हटाया नहीं जाता, जब तक चुनाव व्यवस्था में बदलाव नहीं होता और जब तक भारत को न्याय नहीं मिलता, तब तक भारत के युवा नहीं रुकेंगे.”
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