मंगलुरु (कर्नाटक), सात जुलाई (भाषा) पद्मश्री से सम्मानित और सुदूर गांवों में कम लागत वाले सस्पेंशन सेतुओं का निर्माण करने के लिए प्रसिद्ध 76 वर्षीय गिरीश भारद्वाज का मंगलवार तड़के सुलिया में एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में सुलिया से मैकेनिकल इंजीनियर भारद्वाज ने तीन दशकों तक देशभर में 140 से अधिक सस्पेंशन पैदल पुलों का निर्माण कर अलग-थलग पड़े ग्रामीण समुदायों को जोड़ा।
उनके अनूठे, कम लागत वाले पुल की डिजाइनों ने स्कूलों, अस्पतालों और बाजारों तक वर्ष पर्यंत पहुंच की सुविधा देकर हजारों लोगों का जीवन बदला।
भारद्वाज ने अपना पहला सस्पेंशन सेतु पयस्विनी नदी पर 1989 में बनाया था और बाद में उनके काम का विस्तार कर्नाटक, केरल और कई अन्य राज्यों में हुआ जिससे उन्हें भारत के सेतु पुरुष के तौर पर ख्याति मिली।
ग्रामीण संपर्क और सामाजिक सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए उन्हें भारत सरकार द्वारा 2017 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। भारद्वाज के निधन की खबर से पूरे कर्नाटक में शोक की लहर है और लोग उन्हें एक ऐसे इंजीनियर के तौर पर याद कर रहे हैं जिनके पुलों ने ना केवल नदियों को जोड़ा, बल्कि सुदूर गांवों में विकास की खाई को भी भरा।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारद्वाज ने दूर दराज के और पहाड़ी गांवों को जोड़कर और अनगिनत लोगों के लिए जीवन आसान बनाते हुए देशभर में 140 से अधिक सस्पेंशन पुलों का निर्माण किया।”
उन्होंने कहा, “मैं पद्मश्री से सम्मानित डाक्टर गिरीश भारद्वाज के निधन की खबर से बहुत दुखी हूं। उनके निधन से राज्य ने एक दुर्लभ तकनीकी दूरदृष्टा खो दिया।”
भाषा सं राजेंद्र वैभव
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