श्रीगंगानगर: विजयनगर जाकर वापस घर लौटने का सफर 13 साल की गैंगरेप पीड़िता के लिए एक सामान्य यात्रा होने वाली थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
अब श्रीगंगानगर स्थित अपने घर पर लौटकर और उस दर्दनाक घटना से उबरने की कोशिश कर रही किशोरी ने बताया कि उसकी मुलाकात 18 वर्षीय मैकेनिक गुरजीत से कैसे हुई. गुरजीत लगातार उससे दोस्ती करने की कोशिश करता रहा और उसे विजयनगर आने के लिए मनाता रहा. विजयनगर, श्रीगंगानगर से सड़क मार्ग से करीब 100 किलोमीटर दूर है.
शुरुआत में दोनों की नजरें तब मिली थीं, जब गुरजीत राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) के क्षेत्रीय कार्यालय के पास एक इलाके में कार मैकेनिक का काम करता था.
लड़की ने बताया कि इसके बाद गुरजीत ने उसे इंस्टाग्राम पर फॉलो रिक्वेस्ट भेजी. “हम दोनों मैसेज पर बात करने लगे. वह कभी-कभी मुझे विजयनगर में अपनी कार रिपेयर की दुकान दिखाता था और मुझसे मिलने के लिए कहता था.”
आखिरकार उसने 18 जून को गुरजीत से मिलने का फैसला किया. उसने कहा, “मैं अक्सर अपने लड़के और लड़की दोस्तों से मिलने जाती हूं. यह भी उससे अलग नहीं था.”
विजयनगर में गुरजीत उसे मोटरसाइकिल पर घुमाने ले गया, लेकिन उसके मन में कुछ और ही था. पीड़िता ने बताया, “वह मुझे एक सुनसान जगह पर ले गया और मेरे मना करने के बावजूद मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा. वह लगातार कह रहा था कि वह मुझसे शादी करना चाहता है.”
बाद में गुरजीत उसे बस स्टॉप पर छोड़ गया, जहां से किशोरी ने श्रीगंगानगर के लिए बस पकड़ी. अपने शहर पहुंचने के बाद उसे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि घर जाने के लिए ऑटो में बैठते ही उसके साथ कैसी भयावह घटना होने वाली है.
पहले उसका अपहरण किया गया, फिर उसे नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया गया और एक होटल में बंधक बनाकर रखा गया. पुलिस के मुताबिक, चार दिनों तक जॉय इन, होटल ड्रीम और होटल सैफायर में दो दर्जन से ज्यादा ‘क्लाइंट’, होटल मैनेजर और कर्मचारियों ने उसके साथ बलात्कार किया.
पुलिस ने गुरजीत समेत 21 लोगों को गिरफ्तार किया है और कई अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है. आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
‘ऐसा लगा जैसे मेरी जिंदगी मेरी आंखों के सामने गुजर रही थी’
जब किशोरी श्रीगंगानगर पहुंची तो वह जल्द से जल्द घर जाना चाहती थी. उसने कहा, “मैं बस यही सोच रही थी कि मां के घर लौटने से पहले मुझे घर पहुंचना है. लेकिन रात के 8 बज चुके थे और मुझे पता था कि अब मैं मुसीबत में हूं.”
जल्दी घर पहुंचने के लिए उसने साझा ऑटो लेने का फैसला किया. तभी रामबाबू नाम का एक ऑटो चालक उसके पास आया और बिना कोई अतिरिक्त किराया लिए उसे घर छोड़ने की बात कही.
उसने बताया, “शुरुआत में सब ठीक था. फिर उसने कहा कि उसे एक होटल से कुछ सामान लेना है और उसे सिर्फ दो मिनट लगेंगे.” मैं परेशान थी और उसे जल्दी करने के लिए कह रही थी.
किशोरी ने बताया कि कुछ ही मिनटों बाद उसकी नजर धुंधली होने लगी और वह अपने शरीर को हिला भी नहीं पा रही थी.
अपने कमरे की दीवार पर बनी एक तस्वीर को देखते हुए उसने दिप्रिंट को बताया कि उसके बाद के कुछ दिन धुंधले से हैं. उसने कहा, “ऐसा लग रहा था जैसे मेरी अपनी जिंदगी मेरी आंखों के सामने गुजर रही हो और मैं उसे बस देख रही हूं.”
यह दर्दनाक सिलसिला चार दिन तक चला. उसने कहा, “मैं बिल्कुल हिल नहीं पा रही थी और लोग मेरे साथ गलत काम करते रहे. बहुत सारे आदमी आते थे. कभी मुझे दूसरे होटल ले जाया जाता था, तो कभी मुझे एक कमरे में बंद कर दिया जाता था, जहां होटल का सफाई कर्मचारी मुझ पर नजर रखता था.” यह कहते हुए उसकी नजरें अपनी कांपती उंगलियों पर टिकी रहीं.
पुलिस ने पुष्टि की कि ऑटो चालक भी गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल है.

इनकार और सदमा
22 जून को जब पुलिस ने उसे जॉय इन होटल से छुड़ाया, तब उसे बस इतना याद है कि वह घबराकर अपनी मां को ढूंढ रही थी. उसने कहा, “मैंने क्रॉप टॉप, जींस और मेकअप किया हुआ था. उन्होंने मेरे सारे कपड़े ले लिए थे और मेरी मां मुझे पहचान भी नहीं पा रही थीं.”
तभी उसने अपनी मां का दुपट्टा निकालकर दिखाया, ताकि साबित कर सके कि वही चार दिन से लापता उनकी बेटी है.
उसकी मां ने उस पल को याद करते हुए कहा, “मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था. उसका चेहरा सूजा हुआ था, शरीर पर चोट के निशान थे, वह लगातार पूरे शरीर में दर्द की शिकायत कर रही थी. उसने आखिर किसके कपड़े पहन रखे थे? वह मेरी बेटी जैसी बिल्कुल नहीं लग रही थी.”
उस रात मां और बेटी दोनों खुद से यही पूछती रहीं कि क्या जो कुछ हुआ, उसमें उनकी कोई गलती थी.
किशोरी ने दृढ़ता से कहा, “मैं बार-बार खुद से पूछ रही थी कि अगर मैं गुरजीत से मिलने नहीं जाती, तो क्या यह सब होता? मुझे पूरा यकीन है कि वह इस पूरे गिरोह का हिस्सा है. यह सब उसी ने करवाया है.”
उसकी मां ने बताया कि उन्होंने भी खुद को ही दोष दिया. उन्होंने कहा, “मैं बार-बार सोचती रही कि अगर हम हरियाणा में अपना गांव छोड़कर यहां काम करने नहीं आए होते, तो क्या यह सब होता? वह अपने दादा-दादी और चचेरे भाई-बहनों के बीच बड़ी होती. अगर मैंने नौकरी नहीं की होती, तो मैं उसके साथ होती.” यह कहते-कहते उनका गला भर आया.

घायल, लेकिन टूटी नहीं
पिछले कुछ दिनों से यह किशोरी अपने शरीर के घावों से उबरने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस घटना का उसके मन पर क्या असर पड़ा है, इसे लेकर वह खुद भी निश्चित नहीं है.
उसकी मां ने आंसू पोंछते हुए कहा, “वह अपनी भावनाओं के बारे में ज्यादा बात नहीं करती. बस कभी-कभी कहती है कि उसके सीने में दर्द है या कमर में दर्द है. रात में कई बार उसकी योनि में तेज दर्द होता है, जिसकी वजह से उसका शरीर झटके लेने लगता है.”
13 साल की बच्ची ने दिप्रिंट से कहा कि अब वह “इन बातों के बारे में ज्यादा सोचना नहीं चाहती.” उसने कहा, “मैं बस स्कूल वापस जाने का इंतिजार कर रही हूं. उन्होंने कहा है कि स्टाफ की कमी है, इसलिए आठ दिन बाद आना.”
बेटी की स्कूल लौटने की इच्छा पर मुस्कुराते हुए उसकी मां ने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि अब समाज उसके साथ कैसा व्यवहार करेगा. उन्होंने कहा, “मुझे डर है कि अब यहां लोग उसके साथ अलग तरह का व्यवहार करेंगे. उसके दोस्त तो शायद उसके साथ खेलेंगे, लेकिन क्या उनके मां-बाप इसकी इजाजत देंगे? मेरी बेटी के भविष्य में क्या लिखा है?”
मां की चिंता से बेपरवाह, किशोरी अपनी मां के फोन पर रील्स देखने लगी. फिर उसने मुस्कुराते हुए अपनी चिंतित मां से भरोसा दिलाने वाले अंदाज में कहा, “एक दिन मैं पुलिस अफसर बनूंगी.”
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