Monday, 6 December, 2021
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जबरन वसूली से भ्रष्टाचार तक, मुम्बई के पूर्व पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह के खिलाफ ये हैं मामले

सिंह राज्य में जबरन वसूली और भ्रष्टाचार के कम से कम 5 आरोपों का सामना कर रहे हैं. इसी साल उन्होंने राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ, भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे.

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मुम्बई: बृहस्पतिवार सुबह जैसे ही वह मुम्बई में उतरे, पूर्व मुम्बई पुलिस चीफ परमबीर सिंह शहर के पश्चिमी उपनगर कांदीवली स्थित क्राइम ब्रांच यूनिट 9 के ऑफिस की ओर रवाना हो गए. आठ महीना पहले तक आईपीएस अधिकारी इस कार्यालय में इसके और पूरी मुम्बई पुलिस मशीनरी के मुखिया की हैसियत से जाते होंगे.

लेकिन बृहस्पतिवार को सिंह, जिन्हें मार्च में महानिदेशक होम गार्ड्स के पद पर चलता कर दिया गया था, और जो मई से काम पर नहीं पहुंचे थे, इस ऑफिस में एक अभियुक्त की तरह दाख़िल हुए, एक ऐसे केस में पूछताछ के लिए, जिसमें एक स्थानीय अदालत ने उन्हें एक ‘घोषित अपराधी’ क़रार दे रखा है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, सिंह से सात घंटे तक पूछताछ की गई.

विवादास्पद आईपीएस अधिकारी सिंह राज्य में जबरन वसूली, और भ्रष्टाचार के कम से कम पांच आरोपों का सामना कर रहे हैं. इनमें से तीन मामलों में अदालतों ने उनके खिलाफ ग़ैर-ज़मानती वॉरंट जारी किए हुए हैं. महाराष्ट्र सरकार ने सिंह को निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

इसके अलावा, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) सिंह के खिलाफ दो खुली जांच कर रहा है, जबकि केयू चांदीवाल कमीशन सिंह की अपने यहां पेशी पर ज़ोर दे रहा है. बृहस्पतिवार को पैनल ने आईपीएस अधिकारी को उसके सामने पेश होने के लिए कहा, और उनके वकील को याद दिलाया, कि आयोग पहले ही एक ज़मानती वॉरंट जारी कर चुका है. कोर्ट रिकॉर्ड्स के अनुसार कमीशन ने कहा, कि अगर सिंह पेश नहीं होते हैं ‘तो पुलिस को श्री परमबीर सिंह की पेशी कराने के लिए, ज़मानती वॉरंट की तामील करने को कहा जाएगा.’

एक-सदस्यीय चांदीवाल आयोग का गठन, महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार ने, पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ, सिंह के आरोपों की जांच करने के लिए किया था. सिंह इस साल मार्च में उस समय विवादों में आ गए, जब उन्होंने महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक धमाकेदार पत्र लिखकर आरोप लगाया, कि देशमुख ने अपने अधिकारियों को, जिनमें अब बर्ख़ास्त हो चुका पुलिस अधिकारी सचिन वाझे भी शामिल था, मुम्बई के शराबख़ानों तथा रेस्टोरेंट्स से पैसा वसूलने का निर्देश दिया था.

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ये पत्र तब सामने आया जब महाराष्ट्र सरकार ने, सिंह को मुम्बई पुलिस प्रमुख के पद से हटाकर, उनका तबादला महानिदेशक होम गार्ड्स के पद पर कर दिया था. इससे पहले उन पर उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुम्बई आवास एंटिलिया के बाहर बरामद हुए विस्फोटकों की जांच में, कथित रूप से ख़ामियों के आरोप लगाए गए थे.

इस साल मई में सिंह छुट्टी पर चले गए, और उसके बाद बृहस्पतिवार को मुम्बई में नज़र आए, जिससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी थी. उन्होंने मीडिया को बताया है कि इस दौरान वो चंडीगढ़ में ठहरे हुए थे.

गोरेगांव केस जिसके लिए सिंह क्राइम ब्रांच ऑफिस गए

जिस केस के सिलसिले में सिंह बृहस्पतिवार सुबह क्राइम ब्रांच के कांदीवली ऑफिस पहुंचे, वो इस साल अगस्त में गोरेगांव पुलिस स्टेशन में, बिमल अग्रवाल नाम के एक होटल मालिक और नागरिक ठेकेदार की शिकायत पर दर्ज की गई थी. सिंह के अलावा एफआईआर में वाझे और चार अन्य लोगों के भी नाम थे- दाऊद इब्राहिम का संदिग्ध सहायक रियाज़ भाटी, कथित हवाला ऑपरेटर अल्पेश पटेल, और दो अन्य- सुमित सिंह तथा विनय सिंह.

अभियुक्तों ने अग्रवाल के साझे में चल रहे दो बार और रेस्टोरेंट्स पर छापा न मारने के एवज़ में, कथित रूप से उससे 9 लाख रुपए वसूल किए. उसे अभियुक्तों के लिए क़रीब 3 लाख रुपए की क़ीमत के, दो स्मार्टफोन ख़रीदने के लिए भी कथित रूप से मजबूर किया गया.

केस को अंत में अपराध शाखा के हवाले कर दिया गया और पुलिस ने सुमित सिंह तथा पटेल को गिरफ्तार कर लिया. मुम्बई की एक मेट्रोपेलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अक्तूबर में, परमबीर सिंह, विनय सिंह और रियाज़ भाटी के खिलाफ ग़ैर-ज़मानती वॉरंट जारी कर दिए.

इसी महीने, एक स्थानीय कोर्ट ने कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (सीआरपीसी) की धारा 82 के तहत सिंह को एक ‘घोषित अपराधी’ क़रार दे दिया. सीआरपीसी की धारा 83 के अनुसार, ऐसी घोषणा जारी करने के बाद कोर्ट, अभियुक्त की संपत्ति ज़ब्त करने के आदेश भी जारी कर सकती है.


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डेवलपर से 20 करोड़ रुपए की जबरन वसूली का आरोप

शहर के पूर्व पुलिस प्रमुख के खिलाफ मुम्बई में दर्ज, जबरन वसूली के एक और केस में आरोप है कि परमबीर सिंह ने अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर, एक डेवलपर से 20 करोड़ रुपए जबरन वसूलने की कोशिश की. इस साल जुलाई में मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन ने, एक भू-सम्पत्ति दलाल श्याम सुंदर अग्रवाल की शिकायत पर, एक एफआईआर दर्ज कर ली.

अपनी शिकायत में, अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उसके एक पूर्व साझीदार संजय पुनामिया ने, जिससे वो 2011 में अलग हो गया था, सिंह से अपनी जान-पहचान का फायदा उठाकर, अग्रवाल को डराने के लिए उसके खिलाफ ‘झूठे मामले’ दायर करा दिए.

एफआईआर के अनुसार, 2017 में जिस समय सिंह ठाणे पुलिस आयुक्त थे, ठाणे पुलिस ने, नगर भूमि अधिकतम सीमा और विनियमन अधिनियम के अंतर्गत, सरकार को ज़मीन सरेंडर करने से बचने के लिए, कागज़ों में हेराफेरी करने के आरोप में अग्रवाल को गिरफ्तार किया था.

अग्रवाल ने अपनी शिकायत में कहा कि पुनामिया ने एक और मध्यस्थ के ज़रिए उसके सामने समझौते की पेशकश रखी, जो अग्रवाल के भतीजे से सिंह के आवास पर मिला. मध्यस्थ ने धमकी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो अग्रवाल पर महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) लगवा दिया जाएगा. उसने 20 करोड़ रुपए की मांग की, जिसमें से 9 करोड़ रुपए अदा किए गए.

अग्रवाल की शिकायत में आगे कहा गया, कि 2021 में जब सिंह मुम्बई पुलिस प्रमुख थे, तो पुनामिया ने अग्रवाल के खिलाफ जुहु पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उसने अग्रवाल पर गैंग्सटर छेटा राजन के ज़रिए, उसे धमकियां भेजने का आरोप लगाया.

जुलाई में मरीन ड्राइव पुलिस ने पुनामिया और व्यवसायी सुनील जैन को गिरफ्तार कर लिया. सितंबर में एक मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने दोनों को ज़मानत दे दी.

इसी महीने खुफिया पुलिस विभाग ने, पुलिस इंस्पेक्टर नंद कुमार गोपाले और असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर आशा कोरके को, कथित तौर पर सिंह की ओर से अग्रवाल को धमकाने और उससे पैसा वसूलने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया.

इसी महीने एक सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने, इस मामले में सिंह के खिलाफ एक ग़ैर-ज़मानती वॉरंट जारी कर दिया.


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ठाणे में जबरन वसूली के मामले

मरीन ड्राइव एफआईआर दर्ज होने के एक दिन बाद अग्रवाल के भतीजे शरद अग्रवाल ने इसी तरह की शिकायत ठाणे के कोपरी पुलिस स्टेशन में, सिंह, ठाणे के एक पुलिस उपायुक्त, और तीन शहरियों के खिलाफ दर्ज कराई. शरद अग्रवाल का आरोप था कि अभियुक्तों ने उससे जबरन 2 करोड़ रुपए वसूले और उसे कुछ प्लॉट देने के लिए मजबूर किया.

बाद में जुलाई में, ठाणे नगर पुलिस थाने ने जबरन वसूली का एक और केस, सिंह तथा छह अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ दर्ज किया, जिनमें मुम्बई पुलिस के रिटायर्ड शार्प शूटर प्रदीप शर्मा भी शामिल थे, जिन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एंटिला विस्फोटक मामले में गिरफ्तार कर लिया.

इस केस में बिल्डर केतन तन्ना ने शिकायत की थी कि सिंह और दूसरे अभियुक्तों ने मिलकर, जनवरी 2018 से फरवरी 2019 के बीच, कथित रूप से उनसे 1.25 करोड़ रुपए जबरन वसूले थे, जब सिंह ठाणे पुलिस प्रमुख थे. उसका आरोप था कि अभियुक्त उसे ठाणे एंटी एक्सटॉर्शन सेल के ऑफिस में बुलाते थे, जिसके प्रमुख उस समय शर्मा थे, और उसे गंभीर आपराधिक मामलों की धमकी देते थे. शिकायतकर्त्ता ने आरोप लगाया कि अभियुक्तों ने, उसके एक दोस्त और संदिग्ध बुकी सोनू जालान से भी, इसी तरीक़े से 3 करोड़ रुपए वसूल किए.

पिछले महीने ठाणे की एक कोर्ट ने इस मामले में सिंह और 28 अन्य के खिलाफ एक ग़ैर-ज़मानती वॉरंट जारी कर दिया.

अप्रैल में, अकोला पुलिस ने सिंह और 27 अन्य के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कर ली, जिसका आधार अकोला पुलिस स्टेशन कंट्रोल रूम में तैनात, पुलिस इंस्पेक्टर भीमराव घड़गे की एक शिकायत थी. घड़गे ने, जो 2015 से 2018 के बीच ठाणे पुलिस के साथ तैनात था, सिंह और अन्य के खिलाफ रिश्वत के कई आरोप लगाए थे, जिनमें उससे कुछ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के लिए मना करना भी शामिल था.

उसने ये भी आरोप लगाया कि जब उसने निर्देशों का पालन नहीं किया, तो उसके खिलाफ पांच एफआईआर दर्ज की गईं, और उसे सस्पेंड कर दिया गया. सिंह और अन्य पर आपराधिक साज़िश, सबूत मिटाने, और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़ी धाराओं के तहत मुक़दमा क़ायम किया गया. बाद में केस को ठाणे पुलिस को भेज दिया गया.

सितंबर में एसीबी ने इंस्पेक्टर घड़गे की शिकायत पर खुली जांच शुरू कर दी. आईपीएस अधिकारी के खिलाफ पहले ही एक दूसरी खुली जांच, इंस्पेक्टर अनूप डांगे द्वारा लगाए गए, रिश्वत के आरोपों के आधार पर चल रही है, जिनका आरोप है कि एसीबी के प्रमुख रहते हुए सिंह ने, अंडरवर्ल्ड से जुड़े कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की थी.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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