हैदराबाद, 26 अक्टूबर (भाषा) हैदराबाद में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी की पत्नी की इस साल मई में हुई हत्या के मामले में नेपाल के एक गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी।
हैदराबाद के पुलिस आयुक्त वी. सी. सज्जनार ने बताया कि पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए नेपाल के कुख्यात अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी रे विनय रंजन की पत्नी तनुजा रंजन की हत्या करने और घर में लूटपाट करने में शामिल था।
यह घटना छह और सात मई की दरमियानी रात जुबली हिल्स थाना क्षेत्र के प्रशासन नगर में हुई थी।
पुलिस के अनुसार, आठ मई को पीड़िता की बेटी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी मां अपने शयनकक्ष में मृत पाई गईं। उनके हाथ बंधे हुए थे और मुंह में कपड़ा ठुंसा हुआ था।
पुलिस ने बताया कि शयनकक्ष में सामान बिखरा हुआ था, अलमारियां खुली पड़ी थीं और कीमती सामान गायब था। पुलिस ने बताया कि घर में काम करने वाली सहायिका धर्मा तिरुवा उर्फ कल्पना घटना के बाद से फरार थी और उसका मोबाइल फोन बंद था। घरेलू सहायिका नेपाल की रहने वाली थी।
सज्जनार ने बताया कि जांच में सामने आया कि आरोपी साझा इरादे से घर में अवैध रूप से घुसे, पीड़िता का मुंह और नाक दबाकर उनकी हत्या कर दी तथा 225 ग्राम सोने के आभूषण और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए।
उन्होंने बताया कि लगातार प्रयासों, चौबीसों घंटे तकनीकी निगरानी और विभिन्न राज्यों में संदिग्धों की तलाश के बाद हैदराबाद पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने पुख्ता सूचना के आधार पर सोमवार को शहर के नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों की पहचान धर्मा, गणेश बी. के., चंद्र बहादुर तमांग और गणेश बहादुर शाही के रूप में हुई है। ये सभी नेपाल के निवासी हैं और क्रमशः घरेलू सहायिका, मजदूर, रसोइये और चौकीदार के रूप में काम करते थे।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 51,130 रुपये नकद भी बरामद किए हैं।
इससे पहले 22 मई को कार्यबल की टीमों ने मुख्य आरोपी सुनील बहादुर आउजी और चोरी का सामान खरीदने वाले दिलीप बहादुर मिजार को गिरफ्तार किया था। उनके पास से चोरी किए गए 26 ग्राम सोने के आभूषण बरामद किए गए थे।
वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों का पता लगाने के लिए एसआईटी ने कई राज्यों में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। टीम ने बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, सूरत, पटना, दिल्ली, लखनऊ और उत्तराखंड का दौरा किया। पुलिसकर्मियों ने भारत-नेपाल सीमा पर भी पांच महीने से अधिक समय तक डेरा डालकर दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में गहन जांच की तथा आरोपियों के बारे में अहम जानकारियां जुटाईं।
पुलिस ने बताया कि धर्मा इस साल जून में अपने एक रिश्तेदार के माध्यम से हैदराबाद आई थी और घरेलू सहायिका के रूप में काम करने लगी थी।
नौकरी के दौरान वह पुणे में रहने वाले नेपाली नागरिक विकास के संपर्क में थी। अप्रैल में वह अपने बीमार पिता की देखभाल के लिए पुणे गई थी, जहां उसकी मुलाकात इन लोगों से हुई।
पुलिस के अनुसार, सात मई को गणेश और अन्य आरोपी धर्मा के कार्यस्थल के पास उससे मिले। उन्होंने घटनास्थल का मुआयना किया और उसे बताया कि उन्हें घर में प्रवेश करने में किस तरह मदद करनी है।
छह और सात मई की दरमियानी रात योजना के अनुसार धर्मा ने दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य घर में घुस गए।
पुलिस आयुक्त ने बताया, ‘‘जब पीड़िता अचानक जाग गईं, तो एक आरोपी ने उनका मुंह दबा दिया और उन पर हमला किया, जबकि गणेश ने उनके हाथ-पैर बांध दिए। दम घुटने के कारण उनकी मौत हो गई।’’
इसके बाद आरोपियों ने अलमारियां खंगाली और सोने के आभूषण तथा अन्य कीमती सामान लेकर पिछले दरवाजे से फरार हो गए। पुलिस से बचने के लिए वे तीन छोटे गुटे में बंट गए और नेपाल भाग गए।
पुलिस ने बताया कि उन्होंने नेपाल में अलग-अलग स्थानों पर चोरी का सामान ठिकाने लगा दिया।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य घरेलू सहायकों को माध्यम बनाकर बेंगलुरु और दिल्ली में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। उनकी गिरफ्तारी से नए अपराधों को रोकने में मदद मिली।
पुलिस ने बताया कि फरार आरोपियों का पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए विशेष टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं तथा तकनीकी निगरानी कर रही हैं।
भाषा शोभना नरेश
नरेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.